तेहरान/नई दिल्ली:ओमान के समंदर में एक तेल टैंकर पर हुए खूनी हमले ने अब अमेरिका और ईरान के बीच की कूटनीतिक लड़ाई को बेहद निजी और तीखा बना दिया है। इस हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी, जिसके बाद दोनों देशों के बीच बयानों के तीर चलने शुरू हो गए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जब इस पूरी वारदात के लिए सीधे तौर पर ईरान को कटघरे में खड़ा किया, तो तेहरान ने भी पलटवार करने में देर नहीं की। भारत में ईरान के दूतावास ने ट्रंप के दावों की हवा निकालते हुए साफ कह दिया कि यह आरोप पूरी तरह बेबुनियाद हैं। ईरान का सीधा और गंभीर आरोप है कि भारतीय समुद्री कर्मियों की जान किसी और ने नहीं, बल्कि खुद अमेरिकी सेना की हरकतों ने ली है।
ट्रंप का सीधा हमला: ‘समंदर में गुंडागर्दी फैला रहा है ईरान’
इस नए विवाद की चिंगारी तब भड़की जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान जारी कर हॉर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान के आस-पास के समुद्री इलाकों में जहाजों पर हो रहे हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की। ट्रंप ने सीधे तौर पर ईरान का नाम लेते हुए कहा कि भारतीय जहाजों और वहां काम करने वाले बेकसूर लोगों को निशाना बनाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने इसे वैश्विक व्यापार और समुद्री सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया।
ट्रंप यहीं नहीं रुके; उन्होंने दावा किया कि ईरान के इशारे पर काम करने वाले कुछ उग्रवादी तत्व अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों को अशांत करने की साजिश रच रहे हैं। ट्रंप के इस आक्रामक तेवर के बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया में सुगबुगाहट तेज हो गई कि अमेरिका इस मुद्दे पर कोई बड़ा कदम उठा सकता है।
ट्रंप की दो टूक चेतावनी- इजरायल ने ईरान पर और हमला किया तो कूटनीति का पूरा खेल बिगड़ जाएगा
ईरान का कड़ा जवाब: ‘अपनी नाकामी छिपाने के लिए झूठ का सहारा ले रहा वॉशिंगटन’
ईरान ने भी इस मामले में जरा भी नरमी नहीं दिखाई और उलटा अमेरिका को ही मुल्जिम बना दिया। नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास ने एक कड़ा बयान जारी कर कहा कि ट्रंप के आरोप और कुछ नहीं, बल्कि दुनिया की आंखों में धूल झोंकने और असल हकीकत को दबाने की एक नाकाम कोशिश है। ईरान का दावा है कि जिस कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ, वह असल में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई या उनके किसी खुफिया ऑपरेशन की चपेट में आया था।ईरानी अधिकारियों ने साफ कहा कि अमेरिका अपनी गलती और जिम्मेदारी से भागने के लिए दूसरों पर कीचड़ उछाल रहा है।
ओमान तट पर आखिर क्या हुआ था?
अगर इस पूरे मामले की जड़ में जाएं, तो यह दर्दनाक हादसा ओमान के तट के करीब हुआ, जो दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापारिक रास्तों में से एक है। एक कमर्शियल तेल टैंकर, जिसमें भारत सहित कई देशों के क्रू मेंबर्स सवार थे, अचानक एक बड़े धमाके या हमले का शिकार हो गया। हमला इतना भीषण था कि जहाज मलबे में तब्दील होने लगा और चालक दल के कई सदस्य समंदर की लहरों के बीच लापता हो गए।बाद में जब खोजी अभियान चलाया गया, तब जाकर इस बात की तस्दीक हुई कि तीन भारतीय नाविक इस हमले में अपनी जान गंवा चुके हैं। इस खबर ने देश के भीतर सुरक्षा एजेंसियों को तो चौंकाया ही, साथ ही मारे गए नाविकों के घरों में भी कोहराम मचा दिया। अब हर कोई बस इसी बात का जवाब ढूंढ रहा है कि आखिर उन बेकसूरों की खता क्या थी?
भारत का रुख: कूटनीतिक संतुलन के साथ नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि
अपने तीन नागरिकों को खोने के बाद भारत सरकार का रुख बेहद सख्त और नपा-तुला है। विदेश मंत्रालय ने इस पूरी घटना पर गहरा दुख और नाराजगी जताते हुए सीधे अमेरिकी प्रशासन के सामने अपनी चिंताएं रखी हैं। भारत ने साफ लफ्जों में कहा है कि अंतरराष्ट्रीय रूटों पर काम करने वाले उसके नागरिकों की सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जा सकता।भारत सरकार ने दोनों देशों को याद दिलाया कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों का हर हाल में सम्मान होना चाहिए और किसी भी देश की आपसी सैन्य तनातनी या टकराव के बीच निर्दोष आम नागरिकों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। नई दिल्ली फिलहाल पूरे हालात पर पैनी नजर रखे हुए है और मारे गए नाविकों के परिवारों की हर संभव मदद कर रही है।
वैश्विक बाजार और अर्थव्यवस्था पर आफत
जानकारों का मानना है कि यह मामला सिर्फ दो देशों की जुबानी जंग तक सीमित नहीं रहने वाला। हॉर्मुज जलडमरूमध्य को दुनिया की ‘आर्थिक नस’ कहा जाता है, क्योंकि दुनिया भर में सप्लाई होने वाले कच्चे तेल का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी संकरे रास्ते से होकर गुजरता है। अगर अमेरिका और ईरान के बीच यह तनातनी और बढ़ी, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिससे भारत समेत पूरी दुनिया में महंगाई का नया दौर शुरू हो सकता है।पिछले कुछ समय से इस पूरे इलाके में ड्रोन हमलों और कमर्शियल जहाजों को बंधक बनाने के मामले बढ़े हैं। यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र सहित पूरी दुनिया इस ताजा विवाद को बेहद गंभीरता से देख रही है। फिलहाल, सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस खूनी हादसे की कड़ियां कहां जुड़ती हैं और आने वाले दिनों में यह कूटनीतिक जंग क्या नया मोड़ लेती है।







