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क्या म.प्र. के गेस्ट प्रोफेसर हमेशा के लिए गेस्ट ही रह जाएंगे..?

क्या म.प्र. के गेस्ट प्रोफेसर हमेशा के लिए गेस्ट ही रह जाएंगे..?
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 30, 2026 6:02 अपराह्न
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मध्यप्रदेश में कई गेस्ट प्रोफेसरो ने हाईकोर्ट में सरकार के खिलाफ याचिका दायर की। याचिका में लगभग 2 दशक से गेस्ट पद पर सेवा देने के बाद भी उनके नियमितीकरण पर जिक्र किया गया है। गेस्ट प्रोफेसरो ने आरोप लगाया है कि वह सभी मापदंडों को पूरा करते है तब भी मध्यप्रदेश सरकार उनको नियमित नहीं कर रही है। 

इधर मप्र के कॉलेजों में हजारों पद इसलिए खाली पड़े हुए है क्योंकि सरकार समय से न परीक्षा ले रही है न तो समय से इंटरव्यू करवा रही है। अगर सारी प्रक्रिया पूरी हो जा रही है तब भी समय से कैंडिडेट को महाविद्यालय आवंटित नहीं की जा रही हैं। मध्यप्रदेश के गेस्ट प्रोफेसरो का हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना जायज भी है क्योंकि रेगुलर भर्ती के विरुद्ध सेवा दे रहे गेस्ट प्रोफेसरो से शिवराज सिंह चौहान ने वादा किया था कि उनको नियमित किया जाएगा।

उच्च शिक्षा मंत्री अभी तक बचते बचाते आ रहे

इस पूरे मामले में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार अभी तक बचते बचाते आ रहे है। उनके द्वारा लगातार यही कहा जा रहा है कि सरकार नया पैटर्न लागू करेगी जिससे निश्चित रूप से अतिथि विद्वानों को लाभ मिलेगा। सरकार हरियाणा मॉडल पर भी काम कर रही हैं। बता दे कि हरियाणा की सरकार ने एक निश्चित समय बाद सभी अतिथि विद्वानों को परमानेंट करने का अधिनियम वाला प्रस्ताव पारित किया हैं। हरियाणा मॉडल पर काम करते हुए मध्यप्रदेश की सरकार भी कुछ उसी तरीके से काम कर सकती है।

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अभी लगभग 80,000 हजार गेस्ट प्रोफेसर दे रहे सेवा

अभी परमानेंट प्रोफ़ेसर की सेवा के विरुद्ध गेस्ट प्रोफेसर हर जगह अपनी सेवा दे रहे है। गेस्ट प्रोफेसर शायद परमानेंट प्रोफ़ेसर से भी ज़्यादा काम करते है। उनका काम ठीक वैसे ही रहता है जैसे एक रेगुलर टीचर का। सरकार ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से गेस्ट प्रोफेसरो की भर्ती करती है। उनको बाकायदा सरकारी कॉलेज भी आवंटित होते है और वहां उनको ज्वाइनिंग भी करना होता है।

शिवराज सरकार ने मानदेय किया था 50,000 फिक्स

जब शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों की महापंचायत बुलाई थी तब शिवराज सिंह चौहान ने अतिथि विद्वानों से वादा किया था कि उनकी सरकार बनी तो सभी अतिथि विद्वानों का मासिक मानदेय 50,000 होगा। शिवराज सिंह चौहान ने जो वादा मध्यप्रदेश के अतिथि विद्वानों से किया वो निभाया भी उन्होंने सरकार बनते ही गेस्ट प्रोफेसरो का मासिक मानदेय 50,000 किया भी।

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सारी सुविधाओं का न मिल पाना भी है एक परेशानी

कहने को तो गेस्ट प्रोफेसर पूरा काम रेगुलर प्रोफ़ेसर जैसा ही करते है लेकिन उनको छुट्टियां उतनी नहीं मिलती जितनी एक परमानेंट प्रोफ़ेसर को मिलती है। गेस्ट प्रोफेसर को न ही मेडिकल लीव मिलती है और न ही फैमिली फंड। जो भी मिलता है वो 50,000 के मासिक मानदेय में ही निर्धारित होता है। अगर गेस्ट प्रोफेसर जिस कॉलेज में अपनी सेवा दे रहा है वहां एक परमानेंट प्रोफ़ेसर आ जाए तब उस गेस्ट प्रोफेसर का क्या वह कहां जाएगा..? इसका भी समाधान मध्यप्रदेश की सरकार को करना होगा। कही ऐसा न हो कि गेस्ट प्रोफेसर एक दिन सड़क पर आ जाए और सरकार बोले कि हमें इस बारे में कोई जानकारी हीं नहीं है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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