डेलीबार्ता, कोलकाता-पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर ‘शक्ति’ की आराधना और सियासी दांव-पेच का अनूठा संगम देखने को मिल रहा है। विधानसभा चुनावों की आहट के बीच PM नरेंद्र मोदी ने बंगाल की जनता के नाम एक बेहद भावुक पत्र लिखा है। इस पत्र की सबसे खास बात इसकी शुरुआत है ‘जय मां काली’।
प्रधानमंत्री का यह संबोधन केवल एक आध्यात्मिक शुरुआत नहीं है, बल्कि इसे बंगाल के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने में गहराई से उतरने की बीजेपी की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस पत्र के माध्यम से पीएम मोदी ने किन बड़े मुद्दों पर चिंता जताई है और बीजेपी का ‘नारा’ क्यों बदल रहा है।
1. ‘जय श्री राम’ से ‘जय मां काली’ तक का सफर- सांस्कृतिक जुड़ाव की कोशिश
बीजेपी अब तक बंगाल में मुख्य रूप से ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के साथ चुनावी मैदान में उतरती रही है। हालांकि, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ‘जय श्री राम’ का नारा उत्तरी और पश्चिमी भारत में अधिक प्रभावी रहा है। बंगाल की मिट्टी में मां काली और मां दुर्गा की भक्ति रची-बसी है।
- रणनीति में बदलाव- पीएम मोदी द्वारा ‘जय मां काली’ का उल्लेख करना यह संकेत देता है कि बीजेपी अब बंगाल की स्थानीय पहचान और धार्मिक भावनाओं के साथ अधिक मजबूती से जुड़ना चाहती है।
- अस्मिता का सवाल – मां दुर्गा और मां काली बंगाल के घर-घर की आराध्य हैं। इस नारे के जरिए बीजेपी ममता बनर्जी की टीएमसी को उसी के गढ़ में चुनौती देने की तैयारी कर रही है, जो अक्सर बीजेपी पर ‘बाहरी’ होने का आरोप लगाती रही है।
2. घुसपैठ का मुद्दा- सीमावर्ती सुरक्षा पर जताई गहरी चिंता
प्रधानमंत्री ने अपने पत्र में बंगाल के एक सबसे ज्वलंत मुद्दे कथित बांग्लादेशी घुसपैठ (Bangladeshi infiltration) पर अपनी चिंता को प्रमुखता से साझा किया है। PM मोदी ने स्पष्ट किया कि अवैध घुसपैठ न केवल राज्य की जनसांख्यिकी को बदल रही है, बल्कि यह बंगाल की सुरक्षा और संसाधनों के लिए भी एक बड़ा खतरा है।
”बंगाल की अस्मिता और सुरक्षा को अक्षुण्ण (intact) रखना हमारी प्राथमिकता है। घुसपैठ की समस्या (problem of infiltration) पर लगाम लगाना अब राज्य के भविष्य के लिए अनिवार्य हो गया है।”
3. महिला सुरक्षा – आरजी कर कांड का साया और ‘शक्ति’ का आह्वान
प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी के अन्य बड़े नेताओं ने बंगाल में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर तीखा प्रहार किया है। हाल ही में हुए आरजी कर मेडिकल कॉलेज और दुर्गापुर मेडिकल कॉलेज की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था।
- दुर्गा की शक्ति का आह्वान- बीजेपी महिला मोर्चा की बैठकों में अब महिलाओं से अपनी रक्षा के लिए ‘अंदर की दुर्गा’ को जगाने की अपील की जा रही है।
- प्राथमिकता- पीएम ने दोहराया कि बीजेपी के सत्ता में आने पर महिलाओं की सुरक्षा और उनका सम्मान सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।
4. दिग्गजों का जमावड़ा और ‘मिशन बंगाल’ की तैयारी
केवल प्रधानमंत्री ही नहीं, बल्कि बीजेपी के तमाम दिग्गज नेता अब अपनी स्पीच में बंगाल की ‘शक्ति पूजा’ को महत्व दे रहे हैं|
- रेखा गुप्ता- दिल्ली की मुख्यमंत्री ने कोलकाता में मां दुर्गा की स्तुति से भाषण की शुरुआत की।
- अन्नपूर्णा देवी- केंद्रीय मंत्री ने मां दुर्गा और मां तारा के जयकारों के साथ अपनी बात समाप्त की।
- सुवेंदु अधिकारी- नेता प्रतिपक्ष ने भी गंगा माता और मां तारा का आह्वान कर स्थानीय भावनाओं को सहलाया है।
क्या टूटेगा 2026 में ममता बनर्जी की सत्ता का किला?
पश्चिम बंगाल (West Bengal) में ममता बनर्जी 2011 से सत्ता पर काबिज हैं। उन्होंने वामदलों के 33 साल के ऐतिहासिक शासन (Historical governance) को उखाड़ फेंका था। मई 2026 में वह CM के तौर पर अपने 15 साल का कार्यकाल पूरे करेंगी। BJP इस बार किसी भी कीमत पर इस ‘अजेय’ (Invincible) सत्ता के किले को गिराना चाहती है।
BJP की रणनीति अब केवल विकास के वादों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह ‘सोनार बांग्ला’ (Sonar Bangla) के सपने को बंगाल की धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़कर पेश कर रही है। PM मोदी का यह भावुक नोट (sentimental note) उसी दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
ऐसे में यह माना जाए कि प्रधानमंत्री का ‘जय मां काली’ (Jai Maa Kali) के साथ लिखा गया यह पत्र बंगाल (Bengal) के मतदाताओं के दिल को जितने की एक मार्मिक कोशिश है। अब देखना यह होगा कि भाजपा का यह प्रयास 2026 में बंगाल के लिए कितना कारगर साबित होता हैं |
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