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खावड़ा परियोजना से बढ़ी रफ्तार -हरित ऊर्जा में अडानी ग्रीन की बड़ी छलांग

खावड़ा परियोजना से बढ़ी रफ्तार -हरित ऊर्जा में अडानी ग्रीन की बड़ी छलांग
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 8, 2026 1:55 अपराह्न
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नई दिल्ली | रिन्यूएबल एनर्जी की दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने की कोशिशों में जुटी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड  ने वित्त वर्ष 2025-26 में एक ऐसा मील का पत्थर गाड़ा है, जिसने ग्लोबल मार्केट का ध्यान अपनी ओर खींचा है। कंपनी ने महज एक साल के भीतर अपनी झोली में 5,051 मेगावाट की नई बिजली उत्पादन क्षमता जोड़ी है। इसे अब तक के सबसे बड़े हरित ऊर्जा विस्तार अभियानों में से एक माना जा रहा है।

गुजरात का सफेद रण बना कामयाबी का आधार

अडानी ग्रीन की इस तेज रफ्तार के पीछे सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है गुजरात के कच्छ में स्थित खावड़ा मेगा प्रोजेक्ट। करीब 538 वर्ग किलोमीटर के विशाल और बंजर इलाके में फैली यह परियोजना अब धीरे-धीरे आकार लेने लगी है। कंपनी ने यहां अब तक 9.4 गीगावाट क्षमता का ढांचा तैयार कर लिया है। इसी प्रोजेक्ट की बदौलत कंपनी की कुल परिचालन क्षमता पिछले साल के 14.2 गीगावाट से बढ़कर अब 19.3 गीगावाट के स्तर पर पहुंच गई है, जो करीब 35 प्रतिशत की प्रभावशाली वार्षिक वृद्धि को दर्शाता है। यह विस्तार इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दुनिया के सबसे दुर्गम इलाकों में से एक में अंजाम दिया जा रहा है।

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बिजली उत्पादन और बिक्री में दर्ज हुआ भारी उछाल

क्षमता विस्तार के साथ-साथ कंपनी के बिजली उत्पादन में भी जबरदस्त तेजी देखी गई है। वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों के अनुसार, कंपनी ने कुल 37.6 अरब यूनिट बिजली की बिक्री की है, जो पिछले साल की तुलना में 34 प्रतिशत अधिक है। कंपनी का दावा है कि उसकी इन परियोजनाओं से लाखों घरों को स्वच्छ ऊर्जा मिल रही है, जिससे कार्बन उत्सर्जन को कम करने के राष्ट्रीय लक्ष्य को बड़ी मजबूती मिल रही है। खावड़ा में सौर और पवन ऊर्जा के साथ-साथ हाइब्रिड मॉडल पर भी काम किया जा रहा है ताकि बिजली की आपूर्ति निरंतर बनी रहे। आधुनिक तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से इन परियोजनाओं की चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, जिससे तकनीकी खराबी की गुंजाइश कम हुई है।

ट्रांसमिशन लाइनों की कमी से मुनाफे पर चोट

इतनी बड़ी कामयाबी के बावजूद एक बड़ी तकनीकी चुनौती ने कंपनी की राह रोकी है। रिपोर्टों के अनुसार, बिजली पैदा करने की क्षमता तो तेजी से बढ़ गई, लेकिन उस बिजली को नेशनल ग्रिड तक पहुँचाने वाली ट्रांसमिशन लाइनें कम पड़ गईं। इस असंतुलन के कारण कंपनी अपनी पूरी बिजली बाजार में नहीं बेच सकी, जिससे उसे हजारों करोड़ रुपये के संभावित मुनाफे का नुकसान उठाना पड़ा। इसके अलावा, कुछ प्रोजेक्ट्स के समय से काफी पहले तैयार हो जाने की वजह से कंपनी को अपनी बिजली कम कीमतों पर बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा। हालांकि प्रबंधन को भरोसा है कि नई ट्रांसमिशन लाइनें शुरू होते ही यह समस्या सुलझ जाएगी, लेकिन फिलहाल यह बुनियादी ढांचे की कमी कंपनी के लिए एक बड़ा सबक बनकर उभरी है।

 वित्तीय संतुलन की बड़ी चुनौती

अडानी ग्रीन के लिए सबसे चिंताजनक पहलू उसका बढ़ता हुआ कर्ज है। विस्तार की इस तेज दौड़ में कंपनी के ऊपर देनदारियों का बोझ काफी बढ़ गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 में कंपनी का शुद्ध कर्ज जो 64,462 करोड़ रुपये था, वह मार्च 2026 के अंत तक बढ़कर 91,252 करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है। बाजार के जानकारों का मानना है कि भले ही कंपनी का कैश फ्लो और मुनाफा बढ़ रहा हो, लेकिन इतने भारी-भरकम कर्ज और बड़े निवेश के बीच वित्तीय संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा। आने वाले समय में निवेशकों और रेटिंग एजेंसियों की नजर इस बात पर होगी कि कंपनी अपने लोन के ब्याज और मूलधन को चुकाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।

भविष्य की रणनीति और बैटरी स्टोरेज पर फोकस

ऊर्जा के क्षेत्र में स्थिरता लाने के लिए अडानी ग्रीन अब केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि वह बैटरी स्टोरेज सेक्टर में भी बड़ा दांव खेल रही है। खावड़ा प्रोजेक्ट के भीतर ही 1,376 मेगावाट घंटा की बैटरी स्टोरेज क्षमता शुरू की गई है। इसका मकसद सौर और पवन ऊर्जा से बनने वाली अतिरिक्त बिजली को सुरक्षित रखना है, ताकि रात के समय या हवा न चलने पर भी बिजली की सप्लाई बाधित न हो। कंपनी अगले साल इस क्षमता को और बढ़ाने की योजना बना रही है, जिसे भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में वही कंपनी बाजार में टिक पाएगी जिसके पास बिजली स्टोर करने की सबसे बेहतर तकनीक होगी। 

आगे की राह

अडानी ग्रीन ने 2029 तक खावड़ा से 30 गीगावाट बिजली पैदा करने का जो लक्ष्य रखा है, वह उसे दुनिया की सबसे बड़ी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनियों की कतार में खड़ा कर देगा। लेकिन इस सफर में कंपनी को न केवल अपने कर्ज के बोझ को कम करना होगा, बल्कि सरकारी और निजी ट्रांसमिशन ग्रिड के साथ भी तालमेल बिठाना होगा। कंपनी को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि वह केवल उत्पादन न बढ़ाए बल्कि अपनी वित्तीय सेहत को भी दुरुस्त रखे। आने वाले कुछ साल यह तय करेंगे कि अडानी का यह ‘ग्रीन विजन’ वित्तीय स्थिरता के साथ कितनी दूर तक जा पाता है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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