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भगवान नरसिंह जयंती 2026- इस दिन करें ये पूजा मिलेगा शुभ फल

भगवान नरसिंह जयंती 2026- इस दिन करें ये पूजा मिलेगा शुभ फल
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 25, 2026 2:40 अपराह्न
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हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को नरसिंह जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह वह दिन है जब अधर्म का नाश करने और अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने आधे नर और आधे सिंह के रूप में ‘नृसिंह’ अवतार लिया था यह भगवान विष्णु के सबसे उग्र और शक्तिशाली अवतार है

तिथि और शुभ मुहूर्त (30 अप्रैल 2026)

​वर्ष 2026 में नरसिंह जयंती 30 अप्रैल गुरुवार को मनाई जाएगी। इस दिन भक्त उपवास रखते हैं और गोधूलि वेला शाम के समय में भगवान की विशेष पूजा करते हैं क्योंकि भगवान का प्राकट्य इसी समय हुआ था।

विवरणसमय / तिथि
चतुर्दशी तिथि प्रारंभ30 अप्रैल 2026, सुबह 05:15 बजे से
चतुर्दशी तिथि समाप्त01 मई 2026, सुबह 03:40 बजे तक
पूजा का शुभ मुहूर्त (सांयकाल)शाम 04:25 से शाम 07:05 तक
पारण का समय01 मई 2026, सूर्योदय के पश्चात

नरसिंह अवतार का अर्थ

‘नरसिंह’ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है ‘नर’ (मनुष्य) और ‘सिंह’ (शेर)। भगवान का यह स्वरूप यह दर्शाता है कि ईश्वर सर्वव्यापी हैं और वे किसी भी रूप में प्रकट होकर अपने भक्तों की रक्षा कर सकते हैं। यह अवतार क्रोध और करुणा का एक साथ संगम है दुष्टों के लिए काल और भक्तों के लिए परम कृपालु।

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​नरसिंह जयंती का धार्मिक महत्व

​नरसिंह जयंती केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। इसका महत्व निम्नलिखित बिंदुओं से समझा जा सकता है:

  • भक्त की रक्षा –  यह पर्व सिखाता है कि यदि भक्ति सच्ची हो तो ईश्वर खंभे को फाड़कर भी प्रकट हो सकते हैं।
  • अधर्म का विनाश –  हिरण्यकशिपु जैसे शक्तिशाली असुर का अंत यह सिद्ध करता है कि अहंकार और अत्याचार का अंत निश्चित है।
  • नियमों की मर्यादा – भगवान ने ब्रह्मा जी के वरदान का मान भी रखा और असुर का वध भी किया जो उनकी बुद्धिमत्ता और मर्यादा को दर्शाता है।

​पौराणिक कथा – भक्त प्रहलाद और हिरण्यकशिपु

​प्राचीन काल में कश्यप ऋषि के पुत्र हिरण्यकशिपु ने कठिन तपस्या करके ब्रह्मा जी से वरदान प्राप्त किया था। उसने माँगा कि:

​”न मैं मनुष्य से मरूँ, न पशु से; न दिन में, न रात में; न अस्त्र से, न शस्त्र से; न घर के भीतर, न बाहर; न धरती पर और न आकाश में।”

​अजेय होने के अहंकार में उसने खुद को भगवान घोषित कर दिया। लेकिन उसका पुत्र प्रहलाद भगवान विष्णु का अनन्य भक्त निकला। हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद को मारने के कई प्रयास किए (पहाड़ से फेंकना, विष देना, होलिका की गोद में बिठाना), लेकिन भगवान की कृपा से प्रहलाद हर बार बच गया।vvvvvvvvv

  • न पशु न मनुष्य –  नर-सिंह रूप में पकड़ा।

​अंत में, जब हिरण्यकशिपु ने प्रहलाद से पूछा, “कहाँ है तेरा भगवान?” और लोहे के खंभे की ओर इशारा किया, तब भगवान विष्णु उस खंभे को चीरकर नरसिंह रूप में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकशिपु को​न भीतर न बाहर –  महल की चौखट पर लिटाया।

  • न दिन न रात –  गोधूलि बेला (शाम) में मारा।
  • न भूमि न अस्त्र –  अपनी जांघों पर रखकर अपने नाखूनों से उसका वध किया।

​पूजा विधि (Step-by-Step)

​नरसिंह जयंती के दिन व्रत रखने का विशेष विधान है।

​प्रातः काल:

  • ​ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
  • ​पूजा घर की सफाई करें और व्रत का संकल्प लें।

​सांयकाल की मुख्य पूजा

​भगवान नरसिंह का प्राकट्य शाम को हुआ था, इसलिए मुख्य पूजा इसी समय होती है।

  • पंचामृत स्नान – भगवान नरसिंह और माता लक्ष्मी की मूर्ति को गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से स्नान कराएं।
  • श्रृंगार – भगवान को पीले वस्त्र, चंदन, पुष्प और ऋतु फल अर्पित करें।
  • नैवेद्य –  उन्हें विशेष रूप से ठंडी चीजें अर्पित की जाती हैं जैसे ‘पनाक’ (गुड़ का शरबत) और भीगी हुई मूंग की दाल।
  • दीपदान –  घी का दीपक जलाकर आरती करें।

​भगवान नरसिंह के प्रभावशाली मंत्र

​पूजा के दौरान इन मंत्रों का जाप करने से शत्रु बाधा दूर होती है और भय का नाश होता है।

​ नरसिंह महामंत्र

उग्रं वीरं महाविष्णुं ज्वलन्तं सर्वतोमुखम्।

नृसिंहं भीषणं भद्रं मृत्युमृत्युं नमाम्यहम्॥

अर्थ –  हे उग्र और वीर महाविष्णु, आपकी ज्वाला चारों ओर व्याप्त है। हे डरावने और कल्याणकारी नृसिंह देव, जो मृत्यु की भी मृत्यु हैं, मैं आपको नमन करता हूँ।

​बीज मंत्र

॥ ॐ श्री लक्ष्मी नृसिंहाय नमः ॥

इस दिन क्या करें और क्या न करें?

क्या करेंक्या न करें
इस दिन सामर्थ्य अनुसार दान (अन्न, जल) करें।तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन, मांस) का त्याग करें।
विष्णु सहस्रनाम’ का पाठ करें।किसी का अपमान या क्रोध न करें।
जरूरतमंदों को ठंडे शरबत का वितरण करें।दिन के समय सोने से बचें।

​भगवान नरसिंह की पूजा हमें साहस और धैर्य प्रदान करती है। 30 अप्रैल 2026 को पड़ने वाली यह जयंती हमें यह याद दिलाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों यदि हमारी श्रद्धा प्रहलाद जैसी अटूट है तो स्वयं भगवान हमारी रक्षा के लिए दौड़े चले आएंगे।

अस्वीकरण – यह लेख धार्मिक मान्यताओं और शास्त्रों पर आधारित है। व्यक्तिगत पूजा या अनुष्ठान के लिए अपने पुरोहित या ज्योतिषी से परामर्श अवश्य लें।

जय नरसिंह देव

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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