हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व है और वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी जिसे मोहिनी एकादशी कहा जाता है अपने आप में अद्वितीय है। यह वह पावन दिन है जब भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर असुरों से अमृत की रक्षा की थी।
मोहिनी एकादशी 2026 की तिथि और शुभ मुहूर्त
वर्ष 2026 में मोहिनी एकादशी का व्रत 27 अप्रैल, सोमवार को रखा जाएगा।
- एकादशी तिथि प्रारंभ – 27 अप्रैल 2026 को प्रातः 04:15 बजे से।
- एकादशी तिथि समाप्त – 28 अप्रैल 2026 को प्रातः 02:30 बजे तक।
- पारण (व्रत तोड़ने) का समय – 28 अप्रैल 2026 को सुबह 05:45 से 08:20 के बीच।
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विशेष नोट – चूँकि उदयातिथि 27 अप्रैल को मिल रही है इसलिए इसी दिन व्रत रखना शास्त्रसम्मत और सर्वोत्तम है।
मोहिनी एकादशी का अर्थ और महत्व
’मोहिनी’ का अर्थ है मन को मोह लेने वाली। पौराणिक कथाओं के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान जब अमृत कलश निकला तो देवताओं और असुरों के बीच युद्ध छिड़ गया। तब भगवान विष्णु ने एक अत्यंत सुंदर स्त्री ‘मोहिनी’ का रूप धारण किया और अपनी माया से असुरों को भ्रमित कर सारा अमृत देवताओं को पिला दिया। इससे देवता अमर हो गए और धर्म की जीत हुई।
इस व्रत का आध्यात्मिक महत्व
- पापों का नाश – पद्म पुराण के अनुसार, इस व्रत को करने से मनुष्य के जन्म-जन्मांतर के पाप कट जाते हैं।
- दुखों से मुक्ति – यह व्रत मोह-माया के बंधनों को ढीला करता है और मानसिक शांति प्रदान करता है।
- मोक्ष की प्राप्ति – जो व्यक्ति भक्तिभाव से यह व्रत करता है उसे अंत में विष्णु लोक (बैकुंठ) की प्राप्ति होती है।
मोहिनी एकादशी पूजन विधि (Step-by-Step)
एकादशी का व्रत दशमी की रात्रि से ही शुरू हो जाता है। शुद्ध और सात्विक मन से पूजा करने के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करें
पूर्व तैयारी (दशमी के दिन)
- दशमी की रात को सात्विक भोजन करें। तामसिक भोजन (प्याज, लहसुन) और भारी भोजन का त्याग करें।
- ब्रह्मचर्य का पालन करें।
मुख्य पूजा (एकादशी के दिन)
- संकल्प – सुबह सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नान करें और स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- वेदी स्थापना – घर के मंदिर में भगवान विष्णु (या उनके मोहिनी स्वरूप) की प्रतिमा स्थापित करें।
- पंचामृत स्नान – भगवान को गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) से स्नान कराएं।
- श्रृंगार – भगवान को पीले फूल, पीले फल, तुलसी दल और चंदन अर्पित करें।
- धूप-दीप – घी का दीपक जलाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का जाप करें।
- नैवेद्य – भगवान को सात्विक भोग लगाएं। ध्यान रहे भगवान विष्णु को बिना तुलसी दल के भोग स्वीकार्य नहीं होता।
- आरती – पूजा के अंत में विष्णु जी की आरती करें और अनजाने में हुई भूल के लिए क्षमा मांगें।
मोहिनी एकादशी व्रत कथा (संक्षिप्त)
त्रेतायुग में सरस्वती नदी के किनारे भद्रावती नाम की एक नगरी थी। वहां द्युतिमान नामक राजा राज्य करता था। उसी नगरी में धनपाल नामक एक वैश्य रहता था जो अत्यंत धर्मात्मा और विष्णु भक्त था। उसके पाँच पुत्र थे जिनमें सबसे छोटा पुत्र धृष्टबुद्धि बहुत पापी और दुराचारी था। वह जुआ मदिरा और अन्य गलत व्यसनों में लिप्त रहता था।
पिता ने दुखी होकर उसे घर से निकाल दिया। दर-दर भटकते हुए वह भूख-प्यास से व्याकुल होकर महर्षि कौण्डिन्य के आश्रम पहुँचा। उस समय वैशाख का महीना था। धृष्टबुद्धि ने महर्षि के चरणों में गिरकर अपने उद्धार का मार्ग पूछा।
महर्षि कौण्डिन्य ने दया भाव से उसे मोहिनी एकादशी का व्रत करने की सलाह दी। धृष्टबुद्धि ने पूर्ण विधि-विधान से यह व्रत किया जिसके प्रभाव से उसके समस्त पाप भस्म हो गए। उसे दिव्य शरीर प्राप्त हुआ और अंत में वह गरुड़ पर सवार होकर विष्णु लोक गया।
क्या करें और क्या न करें (Do’s and Don’ts)
| क्या करें | क्या न करें |
| पूरे दिन भगवान का नाम जपें। | चावल का सेवन वर्जित है। |
| रात्रि जागरण और कीर्तन करें। | क्रोध, विवाद और झूठ से बचें। |
| तुलसी के पौधे में दीपक जलाएं। | बैंगन या मसूर की दाल न खाएं। |
| ब्राह्मणों और गरीबों को दान दें। | बाल या नाखून न काटें। |
मोहिनी एकादशी पर दान का महत्व
वैशाख मास में जल और छाया का दान महादान माना जाता है। इस दिन आप निम्नलिखित वस्तुओं का दान कर सकते हैं:
- जल सेवा – प्याऊ लगवाना या पानी के मटके दान करना।
- अन्न दान – जरूरतमंदों को अनाज और मौसमी फल (जैसे तरबूज, आम) देना।
- छाता और जूते – गर्मी से राहत दिलाने वाली वस्तुओं का दान अत्यंत शुभ होता है।
मोहिनी एकादशी केवल उपवास रखने का नाम नहीं है बल्कि यह अपनी इंद्रियों को ‘मोह’ से हटाकर ‘ईश्वर’ में लगाने का दिन है। यदि आप 27 अप्रैल 2026 को सच्ची श्रद्धा के साथ यह व्रत करते हैं, तो भगवान विष्णु की कृपा से आपके जीवन के सभी कष्ट दूर होंगे और सुख-समृद्धि का वास होगा।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय







