नई दिल्ली/त्रिवेंद्रम| 17 मई 2026 की अलसुबह भारतीय रेलवे के नेटवर्क पर एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। त्रिवेंद्रम सेंट्रल (Thiruvananthapuram Central) से दिल्ली के हज़रत निज़ामुद्दीन (Hazrat Nizamuddin) की ओर जा रही देश की सबसे प्रतिष्ठित ट्रेनों में से एक, त्रिवेंद्रम-हज़रत निज़ामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12431) के AC थ्री-टियर (B-1) कोच में अचानक भीषण आग लग गई।
आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरा कोच धुएं के गुबार और लपटों से घिर गया। राहत और सबसे बड़ी संतोष की बात यह रही कि ट्रेन के इस डिब्बे में सवार सभी 68 यात्रियों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों की त्वरित सूझबूझ के कारण इस घटना में कोई जनहानि (कैजुअल्टी) नहीं हुई।
घटना कब, कहाँ और कितने बजे हुई?
यह खौफनाक हादसा आज यानी 17 मई 2026 की सुबह लगभग 5:45 बजे हुआ। उस वक्त ट्रेन अपनी रफ्तार से दौड़ रही थी और अधिकांश यात्री गहरी नींद में सो रहे थे।
तभी अचानक कोच संख्या B-1 के टॉयलेट और पैनल बोर्ड के पास से धुआं उठना शुरू हुआ। कुछ ही मिनटों में धुएं ने विकराल रूप ले लिया और आग की लपटें दिखाई देने लगीं। लोको पायलट और गार्ड ने स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए तुरंत इमरजेंसी ब्रेक लगाए और ट्रेन को नजदीकी स्टेशन/आउटर पर सुरक्षित रोक दिया। ट्रेन रुकते ही रेलवे स्टाफ ने बिना वक्त गंवाए राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया।
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कैसे हुआ हादसा और कैसे पाए काबू?
शुरुआती जांच और चश्मदीदों के मुताबिक, आग लगने का प्राथमिक कारण इलेक्ट्रिक शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। कोच के पावर पैनल में अचानक स्पार्किंग हुई, जिसने देखते ही देखते पास के ज्वलनशील मटीरियल को चपेट में ले लिया।
- यात्रियों में मची अफरा-तफरी – जैसे ही कोच में धुआं भरा, यात्रियों का दम घुटने लगा और चीख-पुकार मच गई। अलार्म बजने और सह-यात्रियों के चिल्लाने से सो रहे लोग तुरंत जाग गए।
- रेलवे स्टाफ की मुस्तैदी – ट्रेन के ऑन-बोर्ड स्टाफ, आरपीएफ (RPF) के जवानों और कोच अटेंडेंट ने साहस का परिचय दिया। उन्होंने तुरंत आपातकालीन खिड़कियां (Emergency Windows) और दरवाजे खोले।
- समय पर इवैक्युएशन – कोच में मौजूद सभी 68 यात्रियों को एक-एक करके सुरक्षित नीचे उतारा गया। यात्रियों का सामान निकालने का भी पूरा प्रयास किया गया, हालांकि कुछ यात्रियों का कीमती सामान कोच के अंदर ही छूट गया।
ट्रेन रुकने के कुछ ही मिनटों के भीतर स्थानीय दमकल विभाग (Fire Brigade) और रेलवे के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंच गए। फायर फाइटर्स ने कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया। सुरक्षा के लिहाज से प्रभावित B-1 कोच को तुरंत ट्रेन के बाकी हिस्सों से अलग (Isolate) कर दिया गया, ताकि आग अन्य डिब्बों में न फैल सके।
यात्रियों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था
हादसे के बाद रेलवे प्रशासन तुरंत एक्शन में आया। प्रभावित कोच (B-1) के सभी 68 यात्रियों को पास के स्टेशनों पर प्राथमिक उपचार, पानी और नाश्ता मुहैया कराया गया। घबराए हुए यात्रियों को सांत्वना बंधाया गया।
रेलवे ने त्वरित निर्णय लेते हुए प्रभावित यात्रियों को आगे की यात्रा के लिए ट्रेन के अन्य खाली पड़े एसी कोचों और अतिरिक्त जोड़ी गई बोगियों में शिफ्ट किया। इसके साथ ही, यात्रियों के परिजनों की सहूलियत के लिए रेलवे ने तुरंत आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर जारी किए, ताकि लोग अपने करीबियों की कुशलता की जानकारी ले सकें।
उच्च स्तरीय जांच के आदेश
इस हाई-प्रोफाइल ट्रेन हादसे को लेकर रेल मंत्रालय ने सख्त रुख अपनाया है। रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया गया है।
रेलवे प्रवक्ता का आधिकारिक बयान
हमारी पहली प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा थी जिसमें हम सफल रहे सभी 68 यात्री सुरक्षित हैं आग लगने के सटीक कारणों का पता लगाने के लिए फॉरेंसिक और तकनीकी टीम जांच कर रही है। अगर इस घटना में किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आधुनिक सुरक्षा प्रणालियों पर उठे सवाल
त्रिवेंद्रम-निज़ामुद्दीन राजधानी एक्सप्रेस जैसी प्रीमियम ट्रेन में इस तरह की घटना होना भारतीय रेलवे की सुरक्षा प्रणालियों पर गंभीर सवाल खड़े करता है। हालांकि ऑटोमैटिक फायर अलार्म और रेलवे स्टाफ की तत्परता ने आज एक बहुत बड़े नरसंहार को रोक लिया।
यात्रियों ने सुरक्षित बचने के बाद भगवान और रेलवे स्टाफ का शुक्रिया अदा किया है। फिलहाल ट्रैक को बहाल कर दिया गया है और राजधानी एक्सप्रेस को नए कोच के साथ गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। यह घटना हमें याद दिलाती है कि यात्रा के दौरान सुरक्षा मानकों की निरंतर निगरानी कितनी अनिवार्य है।







