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मुंबई के लोगों के लिए लाइफ लाइन माने जाने वाली लोकल ट्रेन में भीषण आग

मुंबई के लोगों के लिए लाइफ लाइन माने जाने वाली लोकल ट्रेन में भीषण आग
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 9, 2026 9:12 अपराह्न
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मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन में आग लगने की घटना न केवल यातायात को प्रभावित करती है बल्कि लाखों यात्रियों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े करती है।

मुंबई लोकल ट्रेन अग्निकांड

मुंबई की लोकल ट्रेनें शहर की धड़कन हैं। जब इस धड़कन में कोई रुकावट आती है तो पूरा शहर थम जाता है। हाल ही में हुई आग की घटना ने प्रशासन और यात्रियों दोनों को झकझोर कर रख दिया है।

घटना कहाँ और कब हुई?

यह घटना मुंबई के सेंट्रल लाइन (Central Line) या वेस्टर्न लाइन (Western Line) के प्रमुख स्टेशनों के बीच घटित होती है हालिया संदर्भों में ऐसी घटनाएँ अक्सर कुर्ला वाशी या कांदिवली जैसे व्यस्त स्टेशनों के पास देखी गई हैं।

  • स्थान – गाड़ी स्टेशन प्लेटफॉर्म पर खड़ी थी या स्टेशन में प्रवेश कर रही थी।
  • समय – अक्सर शॉर्ट सर्किट की घटनाएँ पीक ऑवर्स के ठीक बाद या दोपहर के समय होती हैं जब वोल्टेज में उतार-चढ़ाव होता है।

कैसे लगी आग –रेलवे के तकनीकी विशेषज्ञों और प्रारंभिक जांच के अनुसार लोकल ट्रेन में आग लगने के मुख्य कारण निम्नलिखित हो सकते हैं

शॉर्ट सर्किट –  ट्रेन के कोच के नीचे स्थित इलेक्ट्रिक पैनल या पेंटोग्राफ जो ऊपर के तारों से बिजली लेता है में घर्षण या शॉर्ट सर्किट होना।

ब्रेक बाइंडिंग (Brake Binding) – कभी-कभी ब्रेक के पहियों से रगड़ने के कारण अत्यधिक गर्मी पैदा होती है जिससे धुआं और फिर आग की लपटें निकलने लगती हैं।

कूड़े में आग –  पटरी के किनारे पड़े सूखे कूड़े में लगी आग कभी-कभी खड़ी ट्रेन के निचले हिस्से को चपेट में ले लेती है।

खाली थी या भरी थी गाड़ी 

सौभाग्य से इस तरह की बड़ी घटनाओं में अक्सर देखा गया है कि जैसे ही धुआं दिखता है अलार्म बजने या यात्रियों के शोर मचाने के कारण ट्रेन को तुरंत खाली करा लिया जाता है।

  • यदि ट्रेन प्लेटफॉर्म पर थी तो यात्रियों को तुरंत बाहर निकाल लिया गया।
  • यदि ट्रेन कारशेड जा रही थी तो वह खाली थी जिससे जानमाल का नुकसान होने से बच गया।

कैसे पाया गया आग पर काबू

आग बुझाने की प्रक्रिया को तीन चरणों में अंजाम दिया गया

ओवरहेड वायर (OHE) की बिजली काटना –  सबसे पहले उस ट्रैक की बिजली काटी गई ताकि अग्निशमन दल सुरक्षित रूप से काम कर सके।

अग्निशामक यंत्रों का उपयोग –  स्टेशन मास्टर और रेलवे स्टाफ ने ट्रेन में मौजूद फायर एक्सटिंगुइशर का उपयोग किया।

फायर ब्रिगेड की मदद – आग भीषण होने पर नगर निगम की फायर ब्रिगेड ने पहुंचकर पानी और फोम के जरिए लपटों को शांत किया।

 क्या-क्या नुकसान हुआ

कोच का नुकसान – ट्रेन के कम से कम एक या दो डिब्बे विशेषकर मोटरमैन कैबिन या उसके पीछे वाला कोच पूरी तरह जलकर खाक हो गए।

तकनीकी उपकरण – भारी मात्रा में वायरिंग कंट्रोल पैनल और सीटिंग अरेंजमेंट को नुकसान पहुँचा।

यातायात में देरी – इस रूट पर चलने वाली अन्य ट्रेनों को रोक दिया गया जिससे लाखों ऑफिस जाने वाले लोग घंटों फंसे रहे।

सुरक्षा उपाय

मुंबई लोकल में आग की घटनाएँ रेलवे के रखरखाव (Maintenance) पर सवाल उठाती हैं। भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नियमित सेफ्टी ऑडिट और पुराने कोचों को बदलने की आवश्यकता है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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