व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

पुलवामा के वीरों को राष्ट्र का नमन- “हर भारतीय को उनकी हिम्मत से ताकत मिलती है” प्रधानमंत्री का भावुक संदेश

पुलवामा के वीरों को राष्ट्र का नमन- “हर भारतीय को उनकी हिम्मत से ताकत मिलती है” प्रधानमंत्री का भावुक संदेश
नवजोत कौर सिद्धू
On: फ़रवरी 14, 2026 1:32 अपराह्न
Follow Us:

डेलीबार्ता,नई दिल्ली-14 फरवरी भारत के इतिहास का वह दिन है, जिसे देश कभी भूल नहीं सकता। वर्ष 2019 में हुए पुलवामा आतंकी हमले ने पूरे राष्ट्र को झकझोर दिया था। इस हमले में देश के 40 वीर जवानों ने मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए थे। आज भी जब इस घटना को याद किया जाता है तो हर भारतीय का सिर गर्व से ऊंचा हो जाता है और आंखें नम हो जाती हैं।

इस हमले की बरसी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनकी बहादुरी और देशभक्ति आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने कहा कि देश का हर नागरिक जवानों की हिम्मत से शक्ति और साहस प्राप्त करता है।

प्रधानमंत्री का भावुक संदेश: देशभक्ति और बलिदान अमर

प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर अपने संदेश में लिखा कि पुलवामा में बलिदान देने वाले बहादुर जवानों की देशसेवा, उनका संकल्प और समर्पण हमेशा भारतवासियों के दिलों में जीवित रहेगा।

उन्होंने कहा कि इन वीरों ने अपने कर्तव्य को सर्वोपरि रखते हुए राष्ट्र की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका साहस केवल एक घटना नहीं, बल्कि राष्ट्र की सामूहिक चेतना का हिस्सा बन चुका है। प्रधानमंत्री के इस संदेश ने पूरे देश में भावनात्मक माहौल बना दिया और लोगों ने भी सोशल मीडिया के माध्यम से शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

पुलवामा हमला- जब पूरा देश एकजुट हो गया

14 फरवरी 2019 को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को शोक और आक्रोश से भर दिया था। विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों को लेकर जा रही बस को निशाना बनाया।

यह हमला इतना भीषण था कि मौके पर ही 40 जवान शहीद हो गए। देश के अलग-अलग राज्यों से आए ये जवान अपने परिवारों से दूर देश की सुरक्षा में तैनात थे। घटना के बाद पूरे भारत में शोक की लहर दौड़ गई। स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी संस्थानों और आम नागरिकों ने मोमबत्ती जलाकर और श्रद्धांजलि सभाएं आयोजित कर वीरों को याद किया।

राष्ट्रव्यापी शोक से राष्ट्रीय संकल्प तक

हमले के बाद देशभर में गुस्सा और दुख दोनों देखने को मिले। लोगों ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। यह वह समय था जब राजनीतिक विचारधाराओं से ऊपर उठकर पूरा देश एकजुट दिखाई दिया।

शहीदों के पार्थिव शरीर जब उनके गृह राज्यों में पहुंचे, तो हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। “भारत माता की जय” और “वंदे मातरम्” के नारों के बीच अंतिम विदाई दी गई। इस घटना ने यह साबित किया कि भारतीय समाज अपने सैनिकों के प्रति कितना सम्मान और भावनात्मक जुड़ाव रखता है।

उपराष्ट्रपति की श्रद्धांजलि-बलिदान हमेशा प्रेरित करेगा

उपराष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन ने भी शहीद जवानों को नमन करते हुए कहा कि उनका सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र की स्मृति में सदैव अंकित रहेगा।

उन्होंने अपने संदेश में कहा कि देश की सुरक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाले वीरों की वीरता भारत को एक मजबूत और सुरक्षित राष्ट्र बनाने की प्रेरणा देती रहेगी। उनके अनुसार, सैनिकों का त्याग केवल सीमा की रक्षा नहीं करता बल्कि राष्ट्र की आत्मा को भी मजबूत करता है।

आतंक के खिलाफ भारत की जवाबी कार्रवाई

पुलवामा हमले के बाद भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया। कुछ ही दिनों बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के बालाकोट क्षेत्र में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की, जिसे बालाकोट एयरस्ट्राइक के नाम से जाना गया।

इस कार्रवाई को भारत की निर्णायक प्रतिक्रिया के रूप में देखा गया। देशभर में इसे आतंकवाद के खिलाफ मजबूत संदेश माना गया। इस घटना ने राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी रणनीतियों पर व्यापक चर्चा को भी जन्म दिया।

शहीदों की याद क्यों है आज भी जीवित?

पुलवामा के शहीद केवल सैनिक नहीं थे, बल्कि देश के अलग-अलग हिस्सों से आए आम परिवारों के बेटे थे। किसी के छोटे बच्चे थे, कोई परिवार का इकलौता सहारा था, तो कोई शादी के कुछ ही महीनों बाद ड्यूटी पर लौटा था।

इनकी कहानियां आज भी लोगों को भावुक कर देती हैं। यही कारण है कि हर साल उनकी बरसी पर देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। स्कूलों में बच्चों को वीरता और देशभक्ति की कहानियां सुनाई जाती हैं ताकि नई पीढ़ी सैनिकों के त्याग को समझ सके।

देशभक्ति का नया अर्थ,एकता और जिम्मेदारी

पुलवामा हमले के बाद देश में देशभक्ति की भावना और अधिक मजबूत हुई। लोगों ने सुरक्षा बलों के प्रति सम्मान व्यक्त किया और कई सामाजिक संगठनों ने शहीद परिवारों की मदद के लिए अभियान चलाए।

यह घटना केवल दुखद स्मृति नहीं रही, बल्कि राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बन गई। लोगों ने महसूस किया कि देश की सुरक्षा केवल सैनिकों की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हर नागरिक का कर्तव्य है चाहे वह कानून का पालन करना हो, समाज में शांति बनाए रखना हो या राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखना।

प्रधानमंत्री का संदेश क्यों महत्वपूर्ण है?

प्रधानमंत्री द्वारा हर वर्ष शहीदों को याद करना केवल औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं माना जाता, बल्कि यह देश को यह याद दिलाने का प्रयास भी है कि स्वतंत्रता और सुरक्षा की कीमत क्या होती है।

उनका यह संदेश कि “हर भारतीय को उनकी हिम्मत से ताकत मिलती है” इस बात को दर्शाता है कि सैनिकों का साहस पूरे राष्ट्र की मानसिक शक्ति बन जाता है। यह केवल सैनिकों के सम्मान का प्रश्न नहीं, बल्कि राष्ट्रीय पहचान और गौरव से जुड़ा विषय है।

अमर रहेगा पुलवामा के वीरों का बलिदान

पुलवामा हमला भारत के इतिहास का दर्दनाक अध्याय जरूर है, लेकिन साथ ही यह देश की एकता, साहस और संकल्प का प्रतीक भी बन गया है। शहीद जवानों ने यह साबित कर दिया कि राष्ट्र की सुरक्षा के लिए भारतीय सैनिक किसी भी हद तक जा सकते हैं।आज जब देश उनके बलिदान को याद करता है, तो यह केवल श्रद्धांजलि नहीं बल्कि एक संकल्प भी होता है कि आतंकवाद के खिलाफ मजबूती से खड़े रहने है और भारत को सुरक्षित, मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।

पुलवामा के वीरों की शहादत आने वाली पीढ़ियों को हमेशा यह सिखाती रहेगी कि देश पहले है, और राष्ट्र सेवा से बड़ा कोई धर्म नहीं। उनका साहस, त्याग और समर्पण भारत की आत्मा में सदैव जीवित रहेगा।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment