नई दिल्ली। भारतीय फुटबॉल के घरेलू ढांचे में एक बड़ा बदलाव होने जा रहा है। देश की प्रतिष्ठित फुटबॉल प्रतियोगिता आई-लीग अब नए नाम, नए फॉर्मैट और नई प्रशासनिक व्यवस्था के साथ आगे बढ़ेगी। आगामी सत्र से आई-लीग को ‘इंडियन फुटबॉल लीग (IFL)’ के नाम से जाना जाएगा। इसके साथ ही प्रतियोगिता के ढांचे को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा और संचालन के लिए एक नई गवर्निंग काउंसिल तथा मैनेजिंग कमेटी का गठन किया जाएगा।
ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन (AIFF) और लीग में शामिल क्लबों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में इन अहम फैसलों पर सहमति बनी। हालांकि इन प्रस्तावों को अंतिम रूप देने के लिए AIFF की कार्यकारिणी समिति की मंजूरी अभी बाकी है, लेकिन सभी क्लबों ने बदलावों का समर्थन किया है। नए सत्र की शुरुआत 21 फरवरी 2026 से प्रस्तावित है।
आई-लीग से इंडियन फुटबॉल लीग तक का सफर
लीग का नाम बदलकर इंडियन फुटबॉल लीग रखने का उद्देश्य प्रतियोगिता को एक नई पहचान देना और इसे अधिक व्यापक राष्ट्रीय मंच के रूप में स्थापित करना है। अधिकारियों का मानना है कि नया नाम लीग की ब्रांड वैल्यू बढ़ाने के साथ-साथ दर्शकों और प्रायोजकों को भी आकर्षित करेगा।
क्लब मालिकों ने इसे भारतीय फुटबॉल के लिए ऐतिहासिक कदम बताया है। उनके अनुसार, अब लीग केवल एआईएफएफ द्वारा संचालित नहीं होगी, बल्कि क्लब भी निर्णय प्रक्रिया में बराबर की भागीदारी निभाएंगे।
नया फॉर्मैट: दो चरणों में होगी प्रतियोगिता
नई इंडियन फुटबॉल लीग को अधिक रोमांचक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए इसके फॉर्मैट में भी बदलाव किया गया है। प्रस्तावित ढांचे के अनुसार लीग अब दो चरणों में खेली जाएगी।
पहले चरण में सभी टीमें होम और अवे आधार पर एक-दूसरे से मुकाबला करेंगी। इसके बाद अंक तालिका के आधार पर टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा।
शीर्ष टीमें चैंपियनशिप राउंड में प्रवेश करेंगी, जहां खिताब की लड़ाई होगी। निचले पायदान की टीमें रेलिगेशन राउंड में खेलेंगी, जहां लीग में बने रहने के लिए संघर्ष होगा। पहले चरण में अर्जित अंक दूसरे चरण में भी जोड़े जाएंगे, जिससे हर मुकाबले का महत्व बना रहेगा। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से लीग में अंत तक प्रतिस्पर्धा बनी रहेगी और दर्शकों की रुचि भी बढ़ेगी।
एशियाई फुटबॉल संघ (AFC) का कड़ा एक्शन: मोहन बागान पर प्रतिबंध, एक लाख डॉलर से अधिक का जुर्माना
नई गवर्निंग काउंसिल और मैनेजिंग कमेटी
लीग के प्रशासनिक ढांचे में भी बड़ा बदलाव किया जा रहा है। अब संचालन के लिए एक स्वतंत्र गवर्निंग काउंसिल बनाई जाएगी, जिसमें प्रत्येक भाग लेने वाले क्लब का प्रतिनिधि शामिल होगा। इसके साथ ही एआईएफएफ के तीन सदस्य, कुछ वाणिज्यिक साझेदार और दो स्वतंत्र विशेषज्ञ भी इस परिषद का हिस्सा होंगे।
यह काउंसिल लीग से जुड़े अहम फैसले लेगी, नीतियां तय करेगी और दीर्घकालिक विकास की दिशा निर्धारित करेगी।
इसके अलावा एक मैनेजिंग कमेटी भी गठित की जाएगी, जो लीग के रोजमर्रा के संचालन, आयोजन, वित्तीय प्रबंधन और व्यावसायिक गतिविधियों को संभालेगी।
राजस्थान यूनाइटेड एफसी के चेयरमैन के.के. टक को इस नई व्यवस्था में अहम जिम्मेदारी दी गई है और उन्हें गवर्निंग काउंसिल के सदस्य के रूप में शामिल किया गया है।
क्लबों को मिलेगा अधिक अधिकार
नई व्यवस्था के तहत लीग के स्वामित्व और संचालन में क्लबों की भूमिका पहले से कहीं अधिक मजबूत होगी। प्रस्तावित मॉडल के अनुसार:
- क्लबों के पास लगभग 60 प्रतिशत हिस्सेदारी होगी
- वाणिज्यिक साझेदारों को 30 प्रतिशत
- एआईएफएफ के पास 10 प्रतिशत हिस्सेदारी रहेगी
इससे क्लब सीधे तौर पर लीग के विकास, राजस्व और भविष्य की योजनाओं में भागीदार बनेंगे। इसके साथ ही आगामी सत्र में भाग लेने वाले क्लबों को प्रवेश शुल्क के रूप में लगभग 20 लाख रुपये जमा करने होंगे। यह राशि लीग के आयोजन और प्रशासनिक खर्चों में इस्तेमाल की जाएगी।
भारतीय फुटबॉल के लिए नई दिशा
विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव भारतीय फुटबॉल को अधिक पेशेवर और संगठित बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। लंबे समय से आई-लीग और इंडियन सुपर लीग (ISL) के बीच संतुलन और भविष्य की संरचना को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
नई इंडियन फुटबॉल लीग क्लबों को मजबूत आधार देगी, युवा खिलाड़ियों को अधिक मौके मिलेंगे और प्रतियोगिता का स्तर भी ऊंचा होगा।एआई एफएफ अधिकारियों का कहना है कि लक्ष्य केवल लीग का नाम बदलना नहीं, बल्कि एक ऐसा ढांचा तैयार करना है जो लंबे समय तक टिकाऊ हो और भारतीय फुटबॉल को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजबूत बनाए।
आई-लीग का इंडियन फुटबॉल लीग में रूपांतरण भारतीय फुटबॉल इतिहास का एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है। नया नाम, नया फॉर्मैट और नई प्रशासनिक व्यवस्था लीग को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में बड़ा प्रयास है।
यदि एआईएफएफ की कार्यकारिणी समिति से अंतिम मंजूरी मिल जाती है, तो फरवरी 2026 से भारतीय फुटबॉल प्रेमियों को एक नए रूप में घरेलू फुटबॉल का रोमांच देखने को मिलेगा — जो खेल के भविष्य के लिए उम्मीदों से भरा साबित हो सकता है।







