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“जहां चाह,वहां राह” को पूरा कर रहा Night School, बदल रही महिलाओं की तकदीर

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नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 2, 2025 5:54 अपराह्न
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राजस्थान के डीडवाना कुचामन जिला अंर्तगत बेरवाई गांव का night school कालबेलिया महिलाओं की जिंदगी बदल रहा है। दो साल पहले शुरू हुए इस स्कूल में अब 100 से अधिक महिलाएं शिक्षा के साथ-साथ हेल्थ, परिवार नियोजन और बिजनेस के गुर सीख रही हैं। दिन में काम करने वाली ये महिलाएं रात में ज्ञान अर्जित कर रही हैं, जिससे वे आत्मनिर्भर बन रही हैं।

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"जहां चाह,वहां राह" को पूरा कर रहा Night School, बदल रही महिलाओं की तकदीर 4

कहा जाता है न कि अगर कोई राह दिखाने वाला हो तो अंधेरे में भी उजाला फैलाया जा सकता है। बस एक ऐसी ही छोटी सी पहल एक परिवार, एक गांव और एक शहर की नहीं बल्कि पूरे समाज की तकदीर बदल सकती है। दो साल पहले ऐसी ही पहल हुई राजस्थान के जयपुर से लगे डीडवाना कुचामन जिले के एक छोटे से गांव में। इस पहल ने दर्जनों परिवारों की जिंदगी बदल दी। इस पहल के तहत एक night school संचालित किया जाना था ताकि कालबेलिया वर्ग की महिलाओं को शिक्षित किया जा सके। अब इस नाईट स्कूल में केवल शिक्षा ही नहीं बल्कि बिजनेस के गुर भी सिखाए जाने लगे हैं।

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Night school बदल रहा महिलाओं की तकदीर

नवगठित जिले डीडवाना कुचामन में परबतसर के पास रुपनगढ़ तहसील में स्थित एक गांव है जिसका नाम है बेरवाई। इस गांव में night school चलता है। दो साल पहले जब नाइट स्कूल शुरू किया गया। तब केवल कालबेलिया वर्ग की महिलाओं को शिक्षित करने के लिए नाइट स्कूल खोला गया था। एक एनजीओ की ओर से संचालित यह night school में अब महिलाओं की जिंदगी बदल रहा है। इस नाइट स्कूल में ना केवल शिक्षित किया जा रहा है बल्कि महिलाओं को हेल्थ, परिवार नियोजन के साथ बिजनेस के गुर भी सिखाए जा रहे हैं।

Night School से सीखे बिजनेस के गुर

बेरवाई गांव में चलने वाले इस night school में दो साल पहले 8-10 महिलाएं आती थी,लेकिन आज 100 से ज्यादा महिलाएं इस night school से जुड़ चुकी हैं। जो महिलाएं कभी स्कूल नहीं गई।

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वे अब night school जाकर सब कुछ सीख रही है। यहां ना केवल बालिकाएं बल्कि जवान और प्रौढ़ अवस्था की महिलाएं स्वास्थ्य और परिवार नियोजन के साथ बिजनेस के तरीके भी सीख रही है। महिलाएं दिन में अपने घर परिवार का काम करती है और रात्रि के समय स्कूल पहुंचती है। जो महिलाएं पहले हस्ताक्षर करना भी नहीं जानती थी, आज वे अपने अधिकारों के बारे में पूरी जानकारी रखती हैं। मंथन एनजीओ की ओर से एक्सपर्ट को नियमित रूप से क्लास लेने के लिए भेजा जाता है।

महिलाओं में बढ़ा आत्मविश्वास, दिखी जागरुकता

नाइट स्कूल में ट्रेनिंग देने वाली एएनएम बताती है है कि पहले महिलाएं काफी संकोच करती थी लेकिन अब उनमें काफी बदलाव आया है। महिलाएं खुद आगे आकर सवाल पूछती हैं। वे पढ़ाई के साथ स्वास्थ्य से जुड़े सवाल भी पूछती हैं। फैमिली प्लानिंग के बारे में भी बात करती हैं। सुलोचना का कहना है कि कालबेलिया वर्ग की महिलाओं द्वारा सवाल पूछना अलग अनुभव कराता है। महिलाओं का आत्मविश्वास रोमांचित करने वाला है। महिलाएं खुद अच्छे बुरे का फैसला लेने में सक्षम हो रही है।

मंथन की रंग ला रही है मुहिम

मंथन संस्था के तेजाराम माली का कहना है कि night school एक ऐसा प्लेटफार्म है जहां महिलाओं को पढ़ना लिखना सिखाने के साथ उन्हें आत्मनिर्भर बनाने तरीके सिखाए जाते हैं। माली कहते हैं कि भले ही नाइट स्कूल में आने वाली ज्यादातर महिलाएं खानाबदोश वर्ग की हैं लेकिन उनमें सीखने की ललक बहुत ज्यादा है। कई महिलाएं आज आत्मनिर्भर हो चुकी है। वे खुद अन्य महिलाओं के लिए एक ट्रेनर की भूमिका निभाने में सक्षम हो रही है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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