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बैन के बाद trend बदल गया: ऑनलाइन gambling पर रोक लगने के बाद offshore betting platforms का उपयोग करीब 14% बढ़ गया

ऑनलाइन gambling पर रोक लगने के बाद offshore betting platforms का उपयोग
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 10, 2025 10:59 पूर्वाह्न
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भारत में ऑनलाइन रियल मनी गेम्स (RMG) पर प्रतिबंध लगने के बाद, एक चौंकाने वाली प्रवृत्ति सामने आई है। उपभोक्ता संगठन CUTS इंटरनेशनल के एक नए सर्वेक्षण के अनुसार, ऑनलाइन जुए पर रोक लगाने के सरकारी प्रयास का उलटा असर हुआ है। प्रतिबंध के बाद, यूजर्स ने अवैध ऑफशोर सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म का उपयोग काफी बढ़ा दिया है, जो नीति-निर्माताओं के लिए एक बड़ी चुनौती है।

ऑनलाइन gambling पर रोक लगने के बाद offshore betting platforms का उपयोग

उपयोग में महत्वपूर्ण उछाल

CUTS इंटरनेशनल द्वारा दिल्ली-एनसीआर के 1,000 पूर्व RMG उपयोगकर्ताओं पर किए गए इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष बताते हैं कि ऑनलाइन जुआ पर प्रतिबंध लगने के बाद ऑफशोर प्लेटफॉर्म का उपयोग 13.7 प्रतिशत अंक तक बढ़ गया है (68.3% से बढ़कर 82% हो गया)। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, यह उछाल 20% तक भी दर्ज किया गया है। यह डेटा साफ दिखाता है कि यूजर्स ने वैध प्लेटफॉर्म बंद होने के बाद, सीधे अवैध और अनियमित विदेशी प्लेटफॉर्म का रुख किया है।

सर्वेक्षण में पाया गया कि लगभग एक-चौथाई (25%) यूजर्स ने 1 सितंबर 2025 (प्रतिबंध की प्रभावी तिथि) के बाद ही इन ऑफशोर सट्टेबाजी ऐप्स का इस्तेमाल शुरू किया है। भले ही 11% ने जुआ खेलना बंद कर दिया, लेकिन 57% से अधिक ने ऑफशोर साइटों का उपयोग जारी रखा, जो एक महत्वपूर्ण बदलाव को दर्शाता है।

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बढ़ी हुई आवृत्ति और खर्च

प्रतिबंध ने न केवल यूजर्स को ऑफशोर प्लेटफॉर्म की ओर धकेला है, बल्कि इन प्लेटफॉर्म पर उनकी भागीदारी की तीव्रता को भी बढ़ा दिया है:

  • दैनिक पहुंच में वृद्धि: प्रतिबंध से पहले केवल 3.4% यूजर्स इन प्लेटफॉर्म को रोजाना एक्सेस करते थे, जो बाद में बढ़कर चौंकाने वाले 42% तक पहुँच गया।
  • समय में वृद्धि: प्रति सत्र दो घंटे से अधिक समय बिताने वाले यूजर्स की संख्या प्रतिबंध से पहले 3.4% थी, जो बाद में बढ़कर 44% हो गई, जो ऑफशोर साइटों पर अधिक गहरी संलिप्तता को दर्शाता है।

इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि यूजर्स का मासिक खर्च तेजी से बढ़ा है। प्रतिबंध से पहले, केवल 7.6% यूजर्स प्रति माह ₹5,000 से ₹9,999 खर्च करते थे, जो बाद में बढ़कर 26.2% हो गया। एक नया वर्ग भी उभरा है, जिसमें 13.5% यूजर्स अब प्रति माह ₹10,000 से अधिक खर्च कर रहे हैं, जिसकी पहले कोई रिपोर्ट नहीं थी। सर्वेक्षण में ऐसे उदाहरण भी मिले हैं जहाँ मासिक खर्च ₹25,000 से अधिक है।

नीति का अनपेक्षित परिणाम और जोखिम

CUTS इंटरनेशनल के रिसर्च डायरेक्टर अमोल कुलकर्णी के अनुसार, ये व्यवहारिक बदलाव नीति के अनपेक्षित परिणाम को दर्शाते हैं। प्रतिबंध का उद्देश्य जुए के खतरों को कम करना था, लेकिन इसके बजाय इसने खिलाड़ियों को अनियमित ऑफशोर बाजारों की ओर मोड़ दिया है।

ऑफशोर प्लेटफॉर्म अनियमित होने के कारण, ये कई वित्तीय और व्यवहारिक जोखिम पैदा करते हैं:

  • सुरक्षा का अभाव: इन प्लेटफॉर्म पर कोई विनियामक निरीक्षण नहीं होता, जिससे उपयोगकर्ताओं को धोखाधड़ी, डेटा की चोरी और धन शोधन (Money Laundering) का अधिक खतरा होता है।
  • आसान पहुंच: सर्वेक्षण में 93.7% यूजर्स ने जमा और निकासी की प्रक्रिया को बहुत आसान बताया, जो बार-बार, उच्च-आवृत्ति वाले जुए को बढ़ावा देता है।
  • कर चोरी: विदेशी ऑपरेटर अक्सर जीएसटी और अन्य भारतीय करों का भुगतान करने से बचते हैं, जिससे देश को राजस्व का नुकसान होता है।

आगे की राह

इस सर्वेक्षण के निष्कर्ष भारत में ऑनलाइन गेमिंग और जुए के विनियमन की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हैं। प्रतिबंध लगाने की नीति ने घरेलू, विनियमित बाजार को समाप्त कर दिया है, जिससे उपयोगकर्ताओं को सीधे अवैध ऑफशोर संस्थाओं के हाथों में धकेल दिया गया है। सरकार को अब एक ऐसा संतुलित विनियामक ढांचा बनाने पर ध्यान देना चाहिए जो नवाचार को प्रोत्साहित करे, उपभोक्ता सुरक्षा सुनिश्चित करे और साथ ही अवैध जुए पर सख्ती से रोक लगाए, न कि केवल प्रतिबंध लगाए।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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