फरवरी 2026 के इस दूसरे सप्ताह में पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में एक बार फिर मौसमी हलचल तेज हो गई है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के ताजा बुलेटिन के अनुसार, एक के बाद एक सक्रिय हो रहे दो पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण पहाड़ों पर भारी बर्फबारी और बारिश का दौर शुरू होने वाला है।
इसका सीधा और सकारात्मक असर दिल्ली-एनसीआर की हवा पर भी पड़ने वाला है।
किन-किन स्थानों पर है भारी बारिश और बर्फबारी की चेतावनी?
मौसम विभाग के अनुसार, 5 फरवरी से शुरू हुआ पहला पश्चिमी विक्षोभ और 8-9 फरवरी से आने वाला दूसरा मजबूत सिस्टम उत्तर-पश्चिम भारत के पहाड़ी राज्यों को प्रभावित करेगा।
प्रमुख चेतावनी क्षेत्र (Hotspots)
- जम्मू-कश्मीर और लद्दाख – कुपवाड़ा, बारामूला, गुलमर्ग और पहलगाम जैसे ऊंचे इलाकों में भारी बर्फबारी की संभावना है। श्रीनगर और आसपास के मैदानी इलाकों में मध्यम से भारी बारिश का अनुमान है।
- हिमाचल प्रदेश – लाहौल-स्पीति, किन्नौर, चंबा, कुल्लू (रोहतांग पास) और शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में 9 से 11 फरवरी के बीच “वेट स्पेल” (गीला दौर) रहने वाला है। यहां गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की भी चेतावनी दी गई है।
- उत्तराखंड – उत्तरकाशी, चमोली और पिथौरागढ़ जैसे सीमावर्ती जिलों में बर्फबारी का अलर्ट है। केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में भी बर्फ की मोटी परत जमने की उम्मीद है। निचले इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है।
- नोट – उत्तराखंड के कुछ क्षेत्रों में 6 फरवरी को पाले (Ground Frost) की भी चेतावनी दी गई है, जो फसलों के लिए हानिकारक हो सकता है।
दिल्ली-एनसीआर से हिमालय तक बदलेगा मौसम, फिर होगी बारिश और पहाड़ों पर बर्फबारी
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण स्तर में गिरावट कैसे आएगी?
दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर (AQI) अक्सर सर्दियों में ‘बेहद खराब’ श्रेणी में रहता है। हिमालय में होने वाली इस बर्फबारी और बारिश का असर मैदानी इलाकों की हवा को साफ करने में दो मुख्य तरीकों से काम करता है
विंड स्पीड (हवा की गति) में वृद्धि
जब पश्चिमी विक्षोभ हिमालय से टकराता है, तो यह उत्तर-पश्चिम भारत में हवा के दबाव के पैटर्न को बदल देता है। 6 और 7 फरवरी को दिल्ली-एनसीआर में 20-30 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
सिद्धांत – तेज़ हवाएं प्रदूषकों (PM 2.5 और PM 10) को एक जगह टिकने नहीं देतीं और उन्हें दूर उड़ा ले जाती हैं (Dispersion)।
‘वॉश-आउट’ प्रभाव (Wash-out Effect)
यदि पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से दिल्ली या आसपास के मैदानी इलाकों (पंजाब, हरियाणा) में हल्की बूंदाबांदी भी होती है, तो यह ‘प्राकृतिक क्लीनर’ का काम करती है।
सिद्धांत – बारिश की बूंदें हवा में मौजूद धूल और धुएं के कणों के साथ मिलकर उन्हें भारी बना देती हैं, जिससे वे जमीन पर बैठ जाते हैं। इसे वैज्ञानिक भाषा में Scavenging कहा जाता है।
थर्मल इन्वर्जन का टूटना
सर्दियों में ठंडी हवा भारी होकर जमीन के करीब बैठ जाती है, जो प्रदूषण को एक ‘ढक्कन’ की तरह ढंक लेती है। विक्षोभ के आने से तापमान में बदलाव होता है और हवा ऊपर की ओर उठने लगती है, जिससे प्रदूषित हवा का घेरा टूट जाता है।
मौसम का विस्तृत विश्लेषण (विस्तृत जानकारी)
इस बार का मौसमी बदलाव केवल एक दिन का नहीं है, बल्कि यह एक डबल स्पेल (Double Spell) है।
| तिथि | घटना | संभावित प्रभाव |
| 5 – 7 फरवरी | पहला पश्चिमी विक्षोभ | पहाड़ों पर बर्फबारी, दिल्ली में तेज़ हवाएं और बादल। |
| 8 फरवरी रात | दूसरा पश्चिमी विक्षोभ का प्रवेश | मैदानी इलाकों में नमी और तापमान में वृद्धि। |
| 9 – 11 फरवरी | व्यापक वर्षा और हिमपात | पहाड़ों पर जनजीवन प्रभावित, मैदानी राज्यों में प्रदूषण से बड़ी राहत। |
कृषि पर प्रभाव
यह बारिश गेहूं और सरसों जैसी रबी फसलों के लिए ‘अमृत’ के समान है, क्योंकि इस समय फसलों को नमी की आवश्यकता होती है। हालांकि, जहां ओलावृष्टि (Hailstorm) की चेतावनी है, वहां किसानों को सावधान रहने की सलाह दी गई है।
यातायात और पर्यटन
भारी बर्फबारी के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग और लेह-मनाली मार्ग बाधित हो सकते हैं। पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे ऊंचे इलाकों में जाने से पहले स्थानीय मौसम बुलेटिन जरूर देखें।
फरवरी का यह दूसरा सप्ताह उत्तर भारत के लिए राहत भरा हो सकता है। जहां पहाड़ों पर बर्फ की चादर पर्यटकों और पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) के लिए अच्छी खबर है,
वहीं दिल्ली-एनसीआर के निवासियों के लिए यह ‘प्रदूषण से आजादी’ का अवसर लेकर आएगा। यदि हवा की गति 25 किमी/घंटा से अधिक बनी रहती है, तो हम AQI को 300+ से गिरकर 150-200 (मध्यम श्रेणी) के बीच देख सकते हैं।







