ज़ाग्रेब (क्रोएशिया) अंतरराष्ट्रीय कुश्ती के मंच पर भारत ने एक बार फिर अपनी ताकत का अहसास कराया है। क्रोएशिया की राजधानी ज़ाग्रेब में आयोजित यूडब्ल्यूडब्ल्यू रैंकिंग सीरीज़ ज़ाग्रेब ओपन 2026 में भारतीय पहलवानों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 14 पदक अपने नाम किए। इस प्रतियोगिता में पुरुष और महिला दोनों वर्गों के भारतीय पहलवानों ने विश्व स्तर के दिग्गज प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ दमदार कुश्ती दिखाई।
यह टूर्नामेंट नई ओलंपिक साइकिल की शुरुआत के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें मिले रैंकिंग अंक आने वाली विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक क्वालिफिकेशन के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
पुरुष पहलवानों का प्रभावशाली प्रदर्शन
भारतीय पुरुष पहलवानों ने फ्रीस्टाइल और ग्रीको-रोमन दोनों शैलियों में शानदार खेल दिखाया। सुजीत कलकल ने अपने भार वर्ग में बेहतरीन तकनीक और आक्रामक रवैये के साथ मुकाबले जीतते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा जमाया। पूरे टूर्नामेंट में सुजीत का नियंत्रण और संतुलन काबिले-तारीफ रहा।
ओलंपिक पदक विजेता अमन सहरावत ने भी अपनी लय बरकरार रखते हुए रजत पदक जीता। फाइनल मुकाबले में उन्होंने कड़ा संघर्ष किया और यह साबित किया कि वे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सबसे भरोसेमंद उम्मीदों में से एक हैं।
इसके अलावा चेतन और पुलकित ने ग्रीको-रोमन वर्ग में रजत पदक जीतकर भारतीय दल के खाते में अहम योगदान दिया। दोनों पहलवानों ने यूरोपीय खिलाड़ियों के खिलाफ मजबूत रक्षात्मक और तकनीकी कुश्ती का प्रदर्शन किया।
कांस्य पदक जीतने वालों में विक्की हुड्डा और दिनेश धनखड़ शामिल रहे। विक्की हुड्डा ने 97 किलोग्राम वर्ग में संघर्षपूर्ण मुकाबलों के बाद पोडियम पर जगह बनाई जबकि भारी वजन वर्ग में दिनेश धनखड़ ने अपनी ताकत और अनुभव का शानदार उपयोग करते हुए कांस्य पदक जीता।
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महिला पहलवानों ने भी बढ़ाया भारत का गौरव
ज़ाग्रेब ओपन में भारतीय महिला पहलवानों का प्रदर्शन भी बेहद सराहनीय रहा। मनीषा भानवाला ने अपने भार वर्ग में जबरदस्त कुश्ती का प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उनकी जीत ने यह साबित किया कि भारतीय महिला कुश्ती लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।
नीलम सिरोही और दिक्षा मलिक ने अपने-अपने भार वर्गों में रजत पदक जीतकर भारत को मजबूत बढ़त दिलाई। दोनों पहलवानों ने पूरे टूर्नामेंट में आत्मविश्वास और तकनीकी परिपक्वता का परिचय दिया।
वहीं अंतिम पंघाल और मुस्कान ने कांस्य पदक जीतकर महिला वर्ग में भारत के पदक अभियान को और मजबूती दी। अंतिम पंघाल की आक्रामक शैली और मुस्कान की रणनीतिक कुश्ती ने दर्शकों और विशेषज्ञों का ध्यान आकर्षित किया।
टीम प्रयास का नतीजा रहा 14 पदकों का आंकड़ा
ज़ाग्रेब ओपन 2026 में भारत के खाते में आए 14 पदक केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं बल्कि पूरी टीम की सामूहिक मेहनत का परिणाम रहे। अलग-अलग भार वर्गों और शैलियों में पदक जीतना इस बात का संकेत है कि भारतीय कुश्ती अब सीमित नहीं बल्कि व्यापक और संतुलित रूप से आगे बढ़ रही है।
कोचिंग स्टाफ और सहयोगी टीम की रणनीति फिटनेस पर ध्यान और युवा पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय अनुभव दिलाने की नीति का असर इस प्रदर्शन में साफ नजर आया।
आगे की तैयारी के लिए मजबूत आधार
इस टूर्नामेंट से मिले अनुभव और रैंकिंग अंक आने वाली एशियाई चैंपियनशिप विश्व कुश्ती चैंपियनशिप और अन्य अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए बेहद अहम साबित होंगे। अमन सहरावत, सुजीत कलकल, मनीषा भानवाला और अंतिम पंघाल जैसे नामों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत नई ओलंपिक साइकिल में पूरी मजबूती के साथ उतरने को तैयार है।







