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Petrol Diesel Prices- मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव के कारण भारत अब रुस से खरीदेगा तेल अमेरिका ने 30 दिन की अस्थाई छूट दी भारत में नहीं बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम 

Petrol Diesel Prices- मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव के कारण भारत अब रुस से खरीदेगा तेल अमेरिका ने 30 दिन की अस्थाई छूट दी
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 6, 2026 3:28 अपराह्न
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मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया) में बढ़ते तनाव और अमेरिका-इजरायल-ईरान के बीच छिड़े संघर्ष ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण है क्योंकि हम अपनी जरूरत का 85% से अधिक तेल आयात करते हैं। वर्तमान में होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के बाधित होने से भारत की तेल आपूर्ति पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।

इस संकट के बीच भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वपूर्ण सहमति बनी है। अब भारत-रूस से तेल लेगा 

मिडिल ईस्ट संकट और भारत की रणनीति –  रूस से तेल की वापसी

पिछले कुछ महीनों में भारत ने अमेरिका के साथ एक व्यापारिक समझौते के तहत रूस से तेल खरीदना काफी कम कर दिया था। जनवरी 2026 में रूस से भारत का तेल आयात पिछले 44 महीनों के निचले स्तर पर पहुँच गया था। लेकिन मार्च 2026 में मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद स्थितियां बदल गई हैं।

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अमेरिका द्वारा 30 दिन की ‘अस्थाई छूट’ (Waiver)

अमेरिका ने हाल ही में भारत को 30 दिनों की विशेष छूट प्रदान की है। इस छूट के तहत

  • भारतीय रिफाइनरियां उन रूसी तेल टैंकरों से तेल खरीद और उतार सकती हैं जो 5 मार्च 2026 तक समुद्र में लदे (Loaded) थे।
  • यह छूट 4 अप्रैल 2026 तक प्रभावी रहेगी।
  • अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अनुसार इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बनाए रखना है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से कीमतों में जो उछाल आया है उसे नियंत्रित किया जा सके।

 पेट्रोल-डीजल के दाम – भारत में क्या असर होगा?

युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें $85 प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं। हालांकि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर यह है कि

  • दाम स्थिर रहेंगे-  भारत सरकार और सरकारी तेल कंपनियों (OMCs) ने संकेत दिया है कि फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं की जाएगी।
  • सुरक्षित भंडार (Strategic Reserves)-  भारत के पास लगभग 25-30 दिनों का कच्चा तेल भंडार मौजूद है, जो किसी भी अल्पकालिक बाधा से निपटने में सक्षम है।
  • OMCs का सहयोग – तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों में उछाल का बोझ फिलहाल खुद वहन कर रही हैं ताकि मुद्रास्फीति (Inflation) पर नियंत्रण बना रहे।

क्यों किया था भारत ने रूस से तेल खरीदना कम 

यह समझना आवश्यक है कि जो भारत 2023-24 में रूस का सबसे बड़ा ग्राहक था उसने अचानक खरीदारी कम क्यों कर दी थी। इसके पीछे मुख्य रूप से अमेरिका का प्रभाव और दबाव था।

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अमेरिका का प्रभाव और ‘ट्रेड डील’

नवंबर 2025 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के सत्ता में आने के बाद, अमेरिका ने भारत पर दबाव बनाया कि वह रूस से अपनी ऊर्जा निर्भरता खत्म करे। इसके बदले में अमेरिका ने भारत को कई प्रलोभन और चेतावनियाँ दी थीं 

  • टैरिफ में छूट – अमेरिका ने भारत पर लगाए गए 25% दंडात्मक टैरिफ (Punitive Tariffs) को हटाने का वादा किया था बशर्ते भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे।
  • अमेरिकी ऊर्जा का विकल्प –  अमेरिका चाहता था कि भारत रूस के बजाय उससे (अमेरिका से) तेल और प्राकृतिक गैस खरीदे।
  • प्रतिबंधों का डर – अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने रूसी तेल कंपनियों (जैसे Rosneft और Lukoil) पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे जिससे भारतीय बैंकों के लिए भुगतान करना और जहाजों के लिए बीमा (Insurance) प्राप्त करना कठिन हो गया था।

इन कारणों से, भारत ने धीरे-धीरे रूस से अपना आयात घटाकर खाड़ी देशों (इराक, यूएई) और अमेरिका की ओर रुख किया था।

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मिडिल ईस्ट तनाव-  होर्मुज जलडमरूमध्य का महत्व

भारत के लिए मिडिल ईस्ट संकट इतना गंभीर क्यों है? इसका उत्तर भौगोलिक स्थिति में छिपा है।

कारकविवरण
होर्मुज जलडमरूमध्यदुनिया के कुल तेल व्यापार का 20% और भारत के तेल आयात का 40% इसी रास्ते से गुजरता है।
रूट की सुरक्षाईरान और इजरायल के बीच संघर्ष के कारण यहाँ जहाजों पर हमले और कब्जे का खतरा बढ़ गया है।
वैकल्पिक मार्गरूस से तेल मंगाना अब भारत के लिए अधिक सुरक्षित विकल्प बन गया है क्योंकि यह मार्ग मिडिल ईस्ट के युद्ध क्षेत्र से बाहर है।

भारत के लिए आगे की राह

भारत की विदेश नीति हमेशा ‘राष्ट्र प्रथम’ (Nation First) पर आधारित रही है। अमेरिका द्वारा दी गई यह 30 दिन की छूट भारत की कूटनीतिक जीत है। इससे भारत को दो फायदे होंगे

  • ऊर्जा सुरक्षा – खाड़ी देशों से आपूर्ति बाधित होने पर रूसी तेल एक ‘बैकअप’ के रूप में काम करेगा।
  • आर्थिक स्थिरता –  तेल की कीमतों में स्थिरता रहने से देश में माल ढुलाई और अन्य चीजों के दाम नहीं बढ़ेंगे।

हालांकि यह छूट केवल 30 दिनों के लिए है। यदि मिडिल ईस्ट में युद्ध लंबा चलता है तो भारत को फिर से रूस के साथ दीर्घकालिक संबंधों या अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना होगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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