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क्रिसमस प्रार्थना सभा में  दिल्ली के कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में मौजूद रहे पीएम मोदी 

क्रिसमस प्रार्थना सभा में  दिल्ली के कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन में मौजूद रहे पीएम मोदी 
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 26, 2025 8:29 अपराह्न
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​दिल्ली के हृदय स्थल में स्थित कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन (Cathedral Church of the Redemption) न केवल अपनी वास्तुकला के लिए जाना जाता है, बल्कि यह भारत की समावेशी संस्कृति का भी प्रतीक है। हाल ही में क्रिसमस के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यहाँ उपस्थिति ने एक नया अध्याय लिखा है। यह दौरा न केवल एक औपचारिक मुलाकात थी, बल्कि सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास के मंत्र को धरातल पर उतारने का एक सशक्त माध्यम भी था।

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​ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और आयोजन का महत्व

​कैथेड्रल चर्च ऑफ द रिडेम्पशन जिसे वायसराय चर्च के रूप में भी जाना जाता है नई दिल्ली के सबसे महत्वपूर्ण चर्चों में से एक है। इसकी स्थापना 1930 के दशक में हुई थी। क्रिसमस के दिन जब प्रधानमंत्री मोदी यहाँ पहुँचे तो उनका स्वागत चर्च के पादरियों और ईसाई समुदाय के गणमान्य सदस्यों द्वारा पारंपरिक तरीके से किया गया।

​प्रधानमंत्री का इस प्रार्थना सभा में शामिल होना कई मायनों में महत्वपूर्ण है-

  • ​सांस्कृतिक एकता-यह भारत की धर्मनिरपेक्ष छवि को और अधिक मजबूती प्रदान करता है।
  • ​संवाद का सेतु-सरकार और अल्पसंख्यक समुदायों के बीच सीधे संवाद और सौहार्द को बढ़ावा देता है।
  • ​वैश्विक संदेश-पूरी दुनिया को यह संदेश जाता है कि भारत अपनी विविधताओं का उत्सव मनाने वाला देश है।

​चर्च के भीतर का दृश्य और प्रधानमंत्री की भागीदारी

​क्रिसमस की सुबह चर्च को विशेष रूप से सजाया गया था। मोमबत्तियों की रोशनी क्रिसमस ट्री और कैरल भजन के स्वर ने वातावरण को बेहद आध्यात्मिक बना दिया था।

​प्रार्थना और कैरल गान-प्रधानमंत्री मोदी ने चर्च में आयोजित विशेष प्रार्थना सभा में भाग लिया। उन्होंने शांति और मानवता के कल्याण के लिए की गई प्रार्थनाओं को ध्यानपूर्वक सुना। चर्च के क्वायर Choir समूह द्वारा गाए गए कैरल ने उत्सव के उल्लास को और बढ़ा दिया। पीएम मोदी ने बच्चों से बातचीत की और उनके साथ समय बिताया जो इस दौरे के सबसे सुखद क्षणों में से एक था।

​यीशु मसीह के आदर्शों का स्मरण-चर्च प्रशासन के साथ बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने ईसा मसीह के जीवन और उनकी शिक्षाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि दया सेवा और करुणा के उनके संदेश आज के समय में और भी अधिक प्रासंगिक हैं।

​प्रधानमंत्री का संदेश

  •  सेवा और करुणा-​यद्यपि यह एक निजी प्रार्थना सभा की तरह थी लेकिन प्रधानमंत्री की उपस्थिति का सार उनके पूर्व के भाषणों और कार्यों से मेल खाता है। उन्होंने अक्सर ईसाई समुदाय के समाज निर्माण में योगदान की सराहना की है।
  • ​शिक्षा और स्वास्थ्य में योगदान-प्रधानमंत्री ने हमेशा माना है कि मिशनरी स्कूलों और अस्पतालों ने भारत के सुदूर क्षेत्रों में स्वास्थ्य और शिक्षा की अलख जगाई है।
  • ​मानवीय मूल्य-क्रिसमस को उन्होंने केवल एक त्योहार नहीं बल्कि मानवता बलिदान और निस्वार्थ प्रेम के उत्सव के रूप में परिभाषित किया है।

ईसाई समुदाय की प्रतिक्रिया

​प्रधानमंत्री के इस दौरे का ईसाई समुदाय ने गर्मजोशी से स्वागत किया। चर्च ऑफ द रिडेम्पशन के अधिकारियों ने इसे एक ऐतिहासिक क्षण बताया। समुदाय के सदस्यों का मानना है कि देश के प्रधान का उनके पवित्र स्थल पर आना उनके प्रति सम्मान और सुरक्षा के भाव को प्रदर्शित करता है।

​यह देखना सुखद है कि प्रधानमंत्री हमारे बीच आए और हमारे त्योहार की खुशियों में शामिल हुए। यह वसुधैव कुटुंबकम की भावना को दर्शाता है। 

​राजनीतिक और सामाजिक निहितार्थ

​विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री की ऐसी पहल समाज के विभिन्न वर्गों के बीच की दूरियों को कम करने में सहायक होती हैं।

  • ​समावेशी राजनीति -यह दौरा विपक्षी दलों द्वारा लगाए जाने वाले भेदभाव के आरोपों का एक कड़ा उत्तर था।
  • ​अल्पसंख्यक सशक्तिकरण -सरकार की विभिन्न योजनाओं जैसे छात्रवृत्ति और विकास कार्य का लाभ ईसाई समुदाय तक पहुँचाने के संकल्प को इससे बल मिलता है।

 कैथेड्रल चर्च की वास्तुकला और इतिहास

हम आपको यह भी बता दे कि कैथेड्रल चर्च, यहाँ यह आयोजन हुआ वह एक प्राचीन चर्च है| 1927 और 1935 के बीच निर्मित इस चर्च का डिजाइन हेनरी मेड द्वारा तैयार किया गया था। इसकी ऊंची छतें और मेहराबें शांति का अनुभव कराती हैं। प्रधानमंत्री ने चर्च की ऐतिहासिक वास्तुकला में भी रुचि दिखाई जो दिल्ली की विरासत का एक अभिन्न अंग है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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