देश की सत्ता का अहम केंद्र रहे ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक का एक युग अब समाप्त होने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को साउथ ब्लॉक में अपनी आखिरी कैबिनेट बैठक की अध्यक्षता करेंगे। इसके बाद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ब्रिटिश कालीन इस इमारत से निकलकर नवनिर्मित ‘सेवा तीर्थ’ में शिफ्ट हो जाएगा।
रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक और नॉर्थ ब्लॉक का निर्माण 1931 में हुआ था। आजादी के बाद से ही साउथ ब्लॉक सरकार के बड़े और ऐतिहासिक फैसलों का साक्षी रहा है। प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की पहली कैबिनेट बैठक भी यहीं आयोजित हुई थी।
सेवा तीर्थ जाएंगे प्रधानमंत्री और मंत्रीमंडल
रिपोर्ट्स के मुताबिक, शुक्रवार को कैबिनेट बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी, केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी ‘सेवा तीर्थ’ परिसर जाएंगे। यह नया प्रशासनिक भवन साउथ ब्लॉक से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर स्थित है।
सेवा तीर्थ परिसर में
- सेवा तीर्थ-1: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO)
- सेवा तीर्थ-2: कैबिनेट सचिवालय
- सेवा तीर्थ-3: राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) का कार्यालय
यहीं ‘इंडिया हाउस’ भी स्थित है, जो उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधिमंडलों की मेजबानी का नया केंद्र होगा।
पीएमओ का इतिहास: छोटे सचिवालय से ताकतवर दफ्तर तक
प्रधानमंत्री कार्यालय की शुरुआत 1947 में एक छोटे से प्रधानमंत्री सचिवालय (PMS) के रूप में हुई थी।
- 1964: लाल बहादुर शास्त्री के कार्यकाल में कार्य आवंटन नियमों के जरिए इसे वैधानिक दर्जा मिला।
- इंदिरा गांधी काल: कार्यालय का दायरा और प्रभाव बढ़ा।
- 1977: मोरारजी देसाई सरकार के दौरान इसका नाम बदलकर ‘प्रधानमंत्री कार्यालय’ (PMO) कर दिया गया।
- अब रक्षा और विदेश मंत्रालय भी आने वाले हफ्तों में साउथ ब्लॉक से अन्य स्थानों पर स्थानांतरित किए जाएंगे।
एक छत के नीचे शासन का शीर्ष ढांचा
सेवा तीर्थ की खास बात यह है कि यहां शासन के सर्वोच्च केंद्र एक ही परिसर में काम करेंगे। पहले ये संस्थाएं अलग-अलग इमारतों में थीं, जिससे संवेदनशील मामलों पर समन्वय में समय लगता था।
अब प्रधानमंत्री, कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल का कार्यालय एक ही परिसर में होगा। इससे फैसले लेने की प्रक्रिया और तेज तथा समन्वित होने की उम्मीद है।
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नाम में भी संदेश: ‘कार्यपालिका परिसर’ से ‘सेवा तीर्थ’
इस परिसर का प्रारंभिक नाम ‘कार्यपालिका परिसर’ रखा गया था, लेकिन बाद में इसे ‘सेवा तीर्थ’ नाम दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, यह बदलाव प्रशासन में ‘सत्ता’ से ज्यादा ‘सेवा’ की भावना को केंद्र में रखने का प्रतीक है।
साउथ और नॉर्थ ब्लॉक का भविष्य
प्रधानमंत्री कार्यालय के पूरी तरह खाली होने के बाद साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को ‘युग युगीन भारत संग्रहालय’ में बदला जाएगा। इससे ये ऐतिहासिक इमारतें आम जनता के लिए खुलेंगी और भारत की शासन यात्रा का इतिहास प्रदर्शित करेंगी।
1,200 करोड़ की लागत से बना नया परिसर
करीब 1,200 करोड़ रुपये की लागत से तैयार सेवा तीर्थ केवल एक नया भवन नहीं, बल्कि प्रशासनिक ढांचे में बदलाव का प्रतीक माना जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम सिर्फ स्थान परिवर्तन नहीं, बल्कि शासन के तरीके में व्यापक बदलाव का संकेत है।
साउथ ब्लॉक की दीवारों ने आजादी के बाद के भारत की नीतियों, युद्धकालीन फैसलों और आर्थिक सुधारों को देखा है। अब ‘सेवा तीर्थ’ में एक नए अध्याय की शुरुआत होने जा रही है।
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