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यह कैसा राजनीतिक गठबंधन अब भाजपा के साथ खड़ी हुई कांग्रेस

यह कैसा राजनीतिक गठबंधन अब भाजपा के साथ खड़ी हुई कांग्रेस
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 7, 2026 3:58 अपराह्न
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अंबरनाथ नगर पालिका के हालिया चुनावों ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक ऐसा भूचाल ला दिया है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की होगी। एक तरफ जहां राज्य और केंद्र में भाजपा और एकनाथ शिंदे की शिवसेना महायुति के रूप में साथ हैं वहीं अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस और अजित पवार की एनसीपी के साथ हाथ मिलाकर शिवसेना को सत्ता से बाहर कर दिया है।

अंबरनाथ नगर पालिका चुनाव 2025-26 – एक ऐतिहासिक उलटफेर

अंबरनाथ जो दशकों से शिवसेना का अभेद्य किला माना जाता रहा है वहां इस बार सत्ता का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। दिसंबर 2025 में हुए इन चुनावों के नतीजे जनवरी 2026 की शुरुआत में सामने आए जिसने न केवल स्थानीय बल्कि राज्य स्तर के नेताओं को भी चौंका दिया।

गठबंधन का स्वरूपन-  अंबरनाथ विकास अघाड़ी

भाजपा ने शिवसेना शिंदे गुट को दरकिनार करते हुए कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अजित पवार गुट के साथ मिलकर अंबरनाथ विकास अघाड़ी  नामक एक नया मोर्चा बनाया। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य अंबरनाथ नगर पालिका से शिवसेना के 35 साल पुराने वर्चस्व को खत्म करना था।

सीटों का गणित –  किसको कितनी मिलीं सीटें

अंबरनाथ नगर पालिका की कुल 60 सीटों के लिए हुए चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। सीटों का विवरण इस प्रकार है-

पार्टी का नाम व जीती गई सीटें 

  • शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) –  27 
  • भारतीय जनता पार्टी भाजपा –  14 
  • भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस –  12
  • एनसीपी (अजित पवार गुट) – 04 
  • निर्दलीय अन्य –  03 

सबसे ज्यादा सीटें शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी लेकिन बहुमत के आंकड़े 31 से दूर रह गई।

भाजपा ने अध्यक्ष पद कैसे जीता

हालांकि शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी थी लेकिन भाजपा ने राजनीतिक कुशलता दिखाते हुए कांग्रेस 12 और एनसीपी 4 के साथ गठबंधन कर लिया। इस तरह उनके पास कुल 30+ पार्षदों का समर्थन हो गया कुछ निर्दलीयों के साथ यह संख्या 32 तक पहुँच गई।

नवनिर्वाचित अध्यक्ष का नाम

भाजपा की उम्मीदवार तेजश्री करंजुले पाटिल को अंबरनाथ नगर पालिका का नया अध्यक्ष नगराध्यक्ष चुना गया है। उन्होंने शिवसेना की उम्मीदवार मनीषा वालेकर को सीधे मुकाबले में पटखनी दी। अभिजीत करंजुले पाटिल को इस नए गठबंधन अंबरनाथ विकास अघाड़ी का समूह नेता नियुक्त किया गया है।

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क्यों किया गया शिवसेना को साइड

शिवसेना को सत्ता से बाहर रखने के पीछे कई गहरे कारण और स्थानीय विवाद रहे हैं

भ्रष्टाचार के आरोप –  भाजपा के स्थानीय नेताओं विशेषकर करंजुले पाटिल परिवार ने आरोप लगाया कि पिछले 25-35 वर्षों से शिवसेना के शासन में अंबरनाथ में भारी भ्रष्टाचार और आतंक की राजनीति व्याप्त थी।

विकास की कमी –  विपक्ष का दावा था कि शिवसेना ने शहर के बुनियादी ढांचे पर ध्यान नहीं दिया जिससे जनता में असंतोष था।

अस्तित्व की लड़ाई –  भाजपा अंबरनाथ में अपना स्वतंत्र आधार मजबूत करना चाहती थी। उन्हें लगा कि अगर वे हमेशा शिवसेना के पीछे रहे तो पार्टी कभी भी इस क्षेत्र में नंबर वन नहीं बन पाएगी।

महायुति में दरार –  स्थानीय स्तर पर टिकट बंटवारे और वर्चस्व को लेकर भाजपा और शिंदे सेना के बीच काफी समय से खींचतान चल रही थी जो चुनाव आते-आते खुले विद्रोह में बदल गई।

क्यों भाजपा-कांग्रेस साथ 

यह गठबंधन वैचारिक कम और रणनीतिक ज्यादा है। 

भाजपा के लिए – भाजपा का मानना है कि स्थानीय निकाय चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं। शिवसेना को हराने के लिए उन्हें संख्या बल की जरूरत थी जो कांग्रेस के पास था।

कांग्रेस के लिए –  कांग्रेस के लिए यह शिवसेना (शिंदे गुट) को कमजोर करने का एक मौका था। राज्य में भले ही वे भाजपा के विरोधी हों लेकिन स्थानीय स्तर पर अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने के लिए उन्होंने हाथ मिलाना उचित समझा।

शिंदे गुट के लिए झटका – मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के सांसद बेटे श्रीकांत शिंदे के निर्वाचन क्षेत्र कल्याण लोकसभा के अंतर्गत आने वाले अंबरनाथ में यह हार शिवसेना के लिए एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका है।

अंबरनाथ का यह चुनाव परिणाम यह साबित करता है कि राजनीति में कोई भी स्थायी दुश्मन या दोस्त नहीं होता। भाजपा का कांग्रेस के साथ खड़ा होना इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में महाराष्ट्र की स्थानीय राजनीति और भी पेचीदा हो सकती है। जहां एक तरफ महायुति राज्य स्तर पर एकजुट होने का दावा करती है वहीं अंबरनाथ जैसे उदाहरण गठबंधन की नींव में दरारें दिखाते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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