प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मलेशिया यात्रा केवल एक कूटनीतिक औपचारिकता नहीं थी, बल्कि यह ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ को अगले स्तर पर ले जाने का एक ठोस प्रयास था। 8 साल के लंबे अंतराल के बाद (पिछली यात्रा 2018 में हुई थी), इस दौरे ने दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की उपस्थिति को और भी मजबूत कर दिया है।
कुआलालंपुर के परदाना पुत्रा (Perdana Putra) परिसर में हुआ भव्य स्वागत इस बात का प्रतीक है कि मलेशिया भारत को अपने एक सबसे भरोसेमंद रणनीतिक साझेदार के रूप में देखता है।
परदाना पुत्रा में शाही स्वागत और द्विपक्षीय वार्ता
मलेशिया के प्रशासनिक केंद्र, पुत्रजया स्थित ‘परदाना पुत्रा’ परिसर में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत एक पारंपरिक और भव्य रेड कार्पेट समारोह के साथ किया गया।
- गार्ड ऑफ ऑनर – मलेशियाई सशस्त्र बलों द्वारा पीएम मोदी को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, जो दोनों देशों के बीच गहरे सम्मान और सैन्य कूटनीति का संकेत है।
- द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन – स्वागत समारोह के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री मोदी और उनके मलेशियाई समकक्ष के बीच द्विपक्षीय बातचीत शुरू हुई। इस वार्ता का मुख्य केंद्र रक्षा सहयोग, व्यापार असंतुलन को कम करना, डिजिटल अर्थव्यवस्था और अर्धचालक (Semiconductors) की आपूर्ति श्रृंखला था।
- रणनीतिक साझेदारी – दोनों नेताओं ने अपनी ‘रणनीतिक साझेदारी’ को ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ (Comprehensive Strategic Partnership) में बदलने की प्रतिबद्धता दोहराई।
10वां भारत-मलेशिया CEO फोरम – आर्थिक कूटनीति का मंच
इस यात्रा का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 10वां भारत-मलेशिया CEO फोरम रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के शीर्ष उद्योगपतियों को संबोधित किया।
व्यापार के प्रमुख स्तंभ
- पाम ऑयल और कृषि – मलेशिया से भारत आने वाले पाम तेल और भारत से मलेशिया जाने वाले चावल व मांस के व्यापार को सुव्यवस्थित करने पर चर्चा हुई।
- UPI और डिजिटल भुगतान – भारत के UPI सिस्टम को मलेशिया के ‘PayNet’ के साथ जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई, जिससे पर्यटकों और प्रवासियों के लिए लेनदेन आसान हो जाएगा।
- रुपये में व्यापार – डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए द्विपक्षीय व्यापार को भारतीय रुपये (INR) और मलेशियाई रिंगिट (MYR) में निपटाने के तंत्र को और मजबूत करने पर सहमति बनी।
महत्वपूर्ण तथ्य – मलेशिया वर्तमान में आसियान (ASEAN) क्षेत्र में भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है।
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सांस्कृतिक सेतु – भारतीय मूल के लोगों से संवाद
मलेशिया में भारतीय मूल के लोगों (PIO) की एक बड़ी आबादी रहती है, जो वहां की अर्थव्यवस्था और संस्कृति का अभिन्न अंग है। प्रधानमंत्री ने कुआलालंपुर में एक विशाल जनसभा को संबोधित किया।
- सांस्कृतिक प्रदर्शन – भारतीय मूल के स्थानीय कलाकारों ने भरतनाट्यम और ओडिसी जैसे क्लासिकल डांस की मंत्रमुग्ध कर देने वाली प्रस्तुतियां दीं। यह प्रदर्शन इस बात का प्रमाण था कि सात समुद्र पार भी भारतीय संस्कृति की जड़ें कितनी गहरी हैं।
- प्रवासियों की भूमिका – पीएम मोदी ने मलेशियाई भारतीयों को भारत का “लिविंग ब्रिज” (जीवंत सेतु) बताया। उन्होंने तमिलनाडु और भारत के अन्य हिस्सों के साथ उनके ऐतिहासिक संबंधों की सराहना की।
रक्षा और सुरक्षा सहयोग
एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बदलती भू-राजनीति को देखते हुए, रक्षा सहयोग इस यात्रा का एक संवेदनशील लेकिन महत्वपूर्ण मुद्दा था।
- Su-30 फाइटर जेट्स – दोनों देश सुखोई-30 लड़ाकू विमानों का उपयोग करते हैं। भारत ने मलेशियाई वायु सेना को इन विमानों के रखरखाव और स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति में सहयोग देने की पेशकश की है।
- आतंकवाद और कट्टरपंथ – समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ सूचना साझा करने के लिए एक विशेष कार्य समूह (Joint Working Group) को सक्रिय करने पर सहमति बनी।
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8 साल का अंतराल और बदलती कूटनीति
2018 के बाद यह पीएम मोदी की पहली मलेशिया यात्रा थी। इन 8 वर्षों में वैश्विक राजनीति में बड़े बदलाव आए हैं।
| पहलू | 2018 की स्थिति | वर्तमान स्थिति (2026 संदर्भ) |
| कूटनीतिक फोकस | बुनियादी ढांचा और निवेश | डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और AI |
| ऊर्जा | पारंपरिक तेल व्यापार | ग्रीन हाइड्रोजन और सोलर ग्रिड |
| क्षेत्रीय सुरक्षा | सामान्य सहयोग | दक्षिण चीन सागर पर साझा चिंताएं |
भविष्य की रूपरेखा – ‘मेक इन इंडिया’ और ‘मलेशिया फर्स्ट’
दोनों नेताओं ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और मलेशिया की औद्योगिक नीतियां एक-दूसरे की पूरक हो सकती हैं। विशेष रूप से चिप निर्माण (Chip Manufacturing) में मलेशिया का अनुभव और भारत का बड़ा बाजार मिलकर वैश्विक स्तर पर एक नया विकल्प पेश कर सकते हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा केवल पुराने रिश्तों को याद करने के लिए नहीं थी, बल्कि भविष्य के नए ब्लूप्रिंट को तैयार करने के लिए थी। सांस्कृतिक एकता, आर्थिक मजबूती और सामरिक सुरक्षा के तीन स्तंभों पर आधारित यह दौरा आने वाले दशक में दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की भूमिका को और अधिक स्पष्ट करेगा।







