व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

प्रधानमंत्री मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से की फोन पर बात सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की सहमती

प्रधानमंत्री मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति से की फोन पर बात सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय साझेदारी की सहमती
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 31, 2026 6:15 अपराह्न
Follow Us:

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेनेजुएला के नेतृत्व के बीच हालिया कूटनीतिक बातचीत अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीति के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह संवाद केवल दो देशों के बीच की बातचीत नहीं है, बल्कि यह बदलती वैश्विक व्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति भारत के रुख को भी रेखांकित करता है।

 प्रधानमंत्री मोदी और वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति –  एक ऐतिहासिक संवाद

शुक्रवार को हुई यह फोन कॉल भारत की ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) के नेतृत्व की रणनीति का हिस्सा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वेनेजुएला की कार्यवाहक राष्ट्रपति (विपक्ष द्वारा समर्थित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त) के साथ पहली बार औपचारिक बातचीत की।

बातचीत के मुख्य बिंदु

  • द्विपक्षीय साझेदारी – दोनों नेताओं ने स्वास्थ्य, कृषि, ऊर्जा और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की।
  • ऊर्जा सुरक्षा –  वेनेजुएला दुनिया के सबसे बड़े तेल भंडार वाले देशों में से एक है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए वेनेजुएला के साथ पुराने संबंधों को फिर से सक्रिय करना चाहता है।
  • लोकतांत्रिक समर्थन –  प्रधानमंत्री मोदी ने शांतिपूर्ण संवाद और लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के माध्यम से मुद्दों को सुलझाने के महत्व पर जोर दिया।

कार्यवाहक राष्ट्रपति का पद और अंतरराष्ट्रीय विवाद

वेनेजुएला में “कार्यवाहक राष्ट्रपति” (Interim President) का पद एक जटिल संवैधानिक और राजनीतिक संकट की उपज है।

यह पद किसके द्वारा बनाया गया?

वेनेजुएला के संविधान के अनुच्छेद 233 के तहत, यदि राष्ट्रपति का पद रिक्त हो जाता है या चुनाव अवैध माने जाते हैं, तो ‘नेशनल असेंबली’ (National Assembly) के अध्यक्ष को कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में शपथ दिलाई जा सकती है।

  • विपक्ष का तर्क –  2018 के चुनावों को अंतरराष्ट्रीय समुदाय (विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ) ने “फर्जी” और “अलोकतांत्रिक” घोषित किया था।
  • अघोषित नेतृत्व – इसी आधार पर विपक्ष ने निकोलस मादुरो के शासन को अवैध मानते हुए अपने नेता को कार्यवाहक राष्ट्रपति घोषित किया। इसे 50 से अधिक देशों ने मान्यता दी थी।

अमेरिका की भूमिका और आर्थिक प्रतिबंध

वेनेजुएला के संकट में संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) एक केंद्रीय खिलाड़ी रहा है।

अमेरिका का नियम और रुख

  • प्रतिबंध (Sanctions) –  अमेरिका ने वेनेजुएला के सरकारी तेल क्षेत्र (PDVSA) पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं ताकि मादुरो सरकार की आय का स्रोत बंद किया जा सके।
  • मान्यता –  अमेरिका आधिकारिक तौर पर मादुरो को राष्ट्रपति नहीं मानता। वह कार्यवाहक सरकार और लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई नेशनल असेंबली का समर्थन करता है।
  • मानवीय सहायता – अमेरिका ने वेनेजुएला में जारी आर्थिक पतन और शरणार्थी संकट को रोकने के लिए लाखों डॉलर की सहायता का प्रस्ताव दिया है, लेकिन केवल लोकतांत्रिक सुधारों की शर्त पर।

पुराने राष्ट्रपति (निकोलस मादुरो) और ‘गिरफ्तारी’ की स्थिति

यह समझना महत्वपूर्ण है कि निकोलस मादुरो अभी भी वेनेजुएला के राष्ट्रपति भवन (Miraflores Palace) पर काबिज हैं और सेना का समर्थन उन्हें प्राप्त है।

 क्या उन्हें पकड़ा गया? आधिकारिक रूप से मादुरो को अभी तक पकड़ा नहीं गया है, लेकिन अमेरिका ने उन पर ‘नारको-टेररिज्म’ (Narco-Terrorism) का आरोप लगाया है।

  • ईनामी राशि –  अमेरिकी न्याय विभाग ने मादुरो की गिरफ्तारी या सजा में मदद करने वाली जानकारी देने के लिए 15 मिलियन डॉलर के ईनाम की घोषणा कर रखी है।
  • ICC की जांच –  अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) भी मादुरो सरकार के खिलाफ मानवता के विरुद्ध अपराधों (Crime against humanity) की जांच कर रहा है।

भारत-वेनेजुएला संबंधों का भविष्य

भारत के लिए वेनेजुएला के साथ संबंध बनाना एक “बैलेंसिंग एक्ट” है। एक तरफ भारत के अमेरिका के साथ घनिष्ठ संबंध हैं, तो दूसरी तरफ वेनेजुएला तेल का एक सस्ता और बड़ा स्रोत है।

प्रमुख क्षेत्रों में सहमति

  • ऊर्जा  –  ओएनजीसी (ONGC) और रिलायंस जैसी भारतीय कंपनियों ने वेनेजुएला के तेल क्षेत्रों में निवेश किया है। 
  • फार्मा  – भारत वेनेजुएला को सस्ती दवाएं और वैक्सीन उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। 
  • व्यापार  –  दोनों देश स्थानीय मुद्राओं में व्यापार करने के तरीकों पर विचार कर रहे हैं ताकि डॉलर के प्रतिबंधों से बचा जा सके। 

प्रधानमंत्री मोदी की यह फोन कॉल संकेत देती है कि भारत अब वेनेजुएला के राजनीतिक परिदृश्य में सभी हितधारकों के साथ जुड़ने को तैयार है। यह भारत की व्यावहारिक विदेश नीति (Pragmatic Foreign Policy) का प्रमाण है, जहाँ वह अपने राष्ट्रीय हितों (ऊर्जा सुरक्षा) को अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के साथ तालमेल बिठाकर चल रहा है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment