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हाथ मिलाकर गले लगाया… भारत आए रूस के राष्ट्रपति पुतिन का पीएम मोदी ने ऐसे किया स्वागत

रूस के राष्ट्रपति
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 5, 2025 12:45 पूर्वाह्न
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रूस के राष्ट्रपति का दिल्ली में शानदार स्वागत, दोस्ताना ‘Hug’ और साथ की कार यात्रा चर्चा में

रूस के राष्ट्रपति Vladimir Putin बुधवार शाम को भारत के दो-दिवसीय दौरे पर दिल्ली पहुँचे, और उनका स्वागत खुद प्रधानमंत्री Narendra Modi ने किया। एयरपोर्ट पर मोदी और पुतिन की मुलाकात बेहद गर्मजोशी भरी रही — पहले हाथ मिलाया गया, फिर दोनों नेताओं ने गले लगकर स्वागत किया, जिसे देखकर कूटनीतिक गलियारे भी मुस्कुरा उठे।

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उसके बाद दोनों एक ही कार में सवार होकर एयरपोर्ट से आगे रवाना हुए — यह नज़ारा पिछले कुछ सालों की तुलना में रिश्तों की गर्माहट और निकटता का प्रतीक माना जा रहा है।

क्या है इस दौरे की पृष्ठभूमि?

2025 के इस दौरे की अहमियत इसलिए भी बढ़ गई है क्योंकि ये रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत का पहला दौरा है, लगभग चार साल बाद, जब रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू हुआ था।

भारत और रूस ने 23वीं भारत–रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन के लिए पुतिन को आमंत्रित किया था। इस शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों देश रक्षा, ऊर्जा, व्यापार और अन्य रणनीतिक क्षेत्रीय सहयोग की समीक्षा करेंगे।पुतिन के साथ बड़े पैमाने पर व्यापार और उद्योग प्रतिनिधिमंडल भी आया है, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि इस दौरे में व्यापार और आर्थिक साझेदारी को भी नई दिशा दी जाएगी।

पहली मुलाकात: एयरपोर्ट से निजी डिनर तक गर्म शुरुआत

पुतिन के दिल्ली पहुंचने के बाद मोदी ने उन्हें निजी रूप से एयरपोर्ट पर रिसीव किया — यह एक दुर्लभ कूटनीतिक व्यवहार है, और इसे दोनों देशों के बीच विशेष रिश्ते का संकेत माना जा रहा है। शाम को मोदी पुतिन के सम्मान में अपने निजी निवास पर एक निजी डिनर की मेजबानी करेंगे। यह अनौपचारिक बैठक दोनों नेताओं के बीच बातचीत की शुरुआत का एक प्रतीक माना जा रहा है।

मौजूदा राजनीतिक और वैश्विक परिप्रेक्ष्य में दौरे की अहमियत

यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब रूस को पश्चिमी देशों द्वारा आर्थिक और राजनयिक दबावों का सामना करना पड़ रहा है। इसी बीच पुतिन का भारत आना और मोदी का उन्हें गर्मजोशी से स्वागत करना, यह संदेश देता है कि भारत अपनी विदेश नीति में अपनी अविभाज्य आज़ादी बनाए रखते हुए, रूस-भारत साझेदारी को महत्व देता है।

रूस के राष्ट्रपति

विशेष रूप से, रक्षा समझौतों, ऊर्जा आपूर्ति और तकनीकी सहयोग जैसे विषय इस शिखर सम्मेलन का मुख्य एजेंडा हैं। यह दौरा इस तथ्य को फिर से रेखांकित करता है कि भारत और रूस का “विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक भागीदारी” (Special & Privileged Strategic Partnership) आज भी जीवित है।

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भारत–रूस रिश्ता: दोस्ती से ज्यादा रणनीति

मोदी और पुतिन की मित्रता पहली बार सार्वजनिक नहीं दिखी है — पिछले कुछ सालों में कई बार उनकी सहज बॉन्डिंग सामने आई है। 2024 में मोदी की मास्को यात्रा पर, पुतिन ने उदार स्वागत किया था; अब उसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए, भारत ने पुतिन का पाकिस्तान सहित अन्य देशों के बीच नहीं बल्कि, बड़े देश के रूप में स्वागत किया है। ऐसे दौर में, जब वैश्विक राजनीति जटिल है, इस गर्मजोशी भरे स्वागत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अपनी विदेश नीति में आत्मनिर्भरता और संतुलन को अहमियत देता है — साथ ही अपने पारंपरिक साझेदारों को भूला नहीं।

नज़रें टिकी: कल की शिखर वार्ता पर

कल यानी शुक्रवार को पुतिन और मोदी के बीच हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय शिखर वार्ता होगी। राष्ट्रपति भवन में राजकीय स्वागत, राजघाट में श्रद्धांजलि और उसके बाद व्यापार–प्रदर्शन व अन्य बैठकों की रूपरेखा तय है। इस यात्रा से निकलने वाले रिज़ॉल्यूशन्स, रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत–रूस की रणनीति को नई दिशा देंगे।

दोस्ती, रणनीति और भरोसे का संकेत

यूं तो विदेशों में नेताओं का मिलना-जुलना सामान्य है, लेकिन रूस के राष्ट्रपति पुतिन का भारत आना और मोदी का खुद एयरपोर्ट पर जाना — यह सिर्फ औपचारिकता नहीं, बल्कि उस गहरी दोस्ती और विश्वास का प्रतीक है जो दशकों से बना हुआ है। हाथ मिलाना, गले लगना, एक ही कार से निकलना, ये छोटे-छोटे दृश्य उस मैसेज का प्रतीक हैं कि भारत-रूस साझेदारी सिर्फ कूटनीति या समझौतों तक सीमित नहीं; यह एक मानव-संबंध है, जो बदलते वैश्विक माहौल में भी मजबूत बना हुआ है

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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