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Rajya Sabha Elections – छत्तीसगढ़ में महिला चेहरों पर दांव जानिये भाजपा – कांग्रेस का समीकरण और रणनीति 

Rajya Sabha Elections - छत्तीसगढ़ में महिला चेहरों पर दांव जानिये भाजपा - कांग्रेस का समीकरण और रणनीति 
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 5, 2026 8:32 अपराह्न
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डेलीबार्ता,रायपुर छत्तीसगढ़ में राज्यसभा चुनाव के बाद राजनीतिक गर्मी एक बार फिर चरम पर है। दरअसल राज्यसभा की दो सीटों के लिए होने वाले चुनाव ने छत्तीसगढ़ में तमाम चर्चाओं को गर्म कर दिया है। खास बात यह है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख दलों नें अपनें उम्मीदवारों के नाम सामनें ला दिये हैं और अहम यह है कि दोनों ही पार्टियों नें इस बार महिला नेताओं पर भरोसा जताया है। 

कांग्रेस ने जहां मौजूदा राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम को फिर से मैदान में उतारा है वहीं भाजपा ने बलौदाबाजार की रहने वाली लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाया है, दूसरी तरफ विधानसभा में संख्या बल के लिहाज से दोनों का निर्विरोध चुनाव जीतना लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन इन नामों के चयन के पीछे कई गहरे राजनीतिक संदेश और रणनीतियां भी हैं। 

गौरतलब है कि राज्यसभा के लिए उम्मीदवारों का चयन केवल संसदीय प्रतिनिधित्व भर नहीं होता, बल्कि यह आने वाले चुनावों की रणनीति का भी संकेत देता है। छत्तीसगढ़ में भी दोनों दलों ने महिला उम्मीदवारों के जरिए कई राजनीतिक समीकरणों को साधने की कोशिश की है। इसमें महिला मतदाताओं को अपनी ओर आकर्षित करना, क्षेत्रीय संतुलन, जातिगत समीकरण एक गहरी रणनीति के रुप में शामिल मानी जा रही है।

जातिगत समीकरणों को साधने की रणनीति

छत्तीसगढ़ की राजनीति में जातिगत समीकरण भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाकर कुर्मी समाज को साधने का प्रयास किया है। लक्ष्मी वर्मा का मनवा कुर्मी समाज में मजबूत प्रभाव माना जाता है और वे लंबे समय से इस समाज से जुड़ी संस्थाओं में सक्रिय रही हैं।

वे वर्ष 2000 से 2006 तक मनवा कुर्मी क्षत्रिय समाज की प्रदेश महिला महामंत्री रहीं। इसके बाद उन्होंने 2006 से 2008 तक प्रदेश संगठन मंत्री और 2008 से 2010 तक प्रदेश महिला अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान में वे अखिल भारतीय कुर्मी क्षत्रिय महासभा की महिला राष्ट्रीय महासचिव के पद पर कार्यरत हैं।

कुर्मी समाज प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली माना जाता है और पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल भी इसी समाज से आते हैं। ऐसे में भाजपा का यह कदम राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे पार्टी कुर्मी समाज के साथ-साथ महिला मतदाताओं को भी अपने पक्ष में करने की कोशिश कर रही है।

वहीं कांग्रेस ने आदिवासी समाज से आने वाली फूलोदेवी नेताम को उम्मीदवार बनाकर आदिवासी वोट बैंक को मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। छत्तीसगढ़ में आदिवासी आबादी का बड़ा हिस्सा है और बस्तर क्षेत्र में तो यह और भी अधिक प्रभावशाली है। ऐसे में कांग्रेस का यह फैसला आने वाले चुनावों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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क्षेत्रीय संतुलन साधने की कोशिश

राज्यसभा उम्मीदवारों के चयन में क्षेत्रीय संतुलन को हमेशा अहम माना जाता है। भाजपा ने लक्ष्मी वर्मा को उम्मीदवार बनाकर रायपुर और उसके आसपास के क्षेत्रों को साधने की कोशिश की है। लक्ष्मी वर्मा बलौदाबाजार जिले की रहने वाली हैं और लंबे समय से पार्टी संगठन में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। संगठन के विभिन्न पदों पर काम करने के कारण उनका पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच अच्छा प्रभाव माना जाता है।

भाजपा का मानना है कि इस फैसले से रायपुर संभाग और आसपास के क्षेत्रों में पार्टी की पकड़ और मजबूत होगी। लक्ष्मी वर्मा ने अपने राजनीतिक जीवन में जमीनी स्तर से काम किया है और संगठन में महिला नेतृत्व को मजबूत करने में भी उनकी भूमिका रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस ने बस्तर क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए फूलोदेवी नेताम को फिर से उम्मीदवार बनाया है। कोंडागांव जिले की रहने वाली फूलोदेवी नेताम आदिवासी समाज से आती हैं और बस्तर इलाके में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है। कांग्रेस को उम्मीद है कि उनके जरिए आदिवासी क्षेत्र में पार्टी का जनाधार और मजबूत होगा।

बस्तर क्षेत्र छत्तीसगढ़ की राजनीति में बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां की सीटें चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की क्षमता रखती हैं। ऐसे में कांग्रेस ने फूलोदेवी नेताम को दोबारा मौका देकर बस्तर के मतदाताओं को स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी आदिवासी नेतृत्व को महत्व देती है।

महिला वोट बैंक पर नजर

दोनों दलों द्वारा महिला उम्मीदवारों को मैदान में उतारने के पीछे एक बड़ा कारण महिला मतदाताओं को साधना भी माना जा रहा है। छत्तीसगढ़ में महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से अधिक है और हाल के चुनावों में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ी है।

भाजपा की राज्य सरकार महिलाओं के लिए कई योजनाएं चला रही है, जिनमें महतारी वंदन योजना प्रमुख है। इस योजना के माध्यम से सरकार महिलाओं को आर्थिक सहायता देने का प्रयास कर रही है। इसके अलावा सरकार ने इस वर्ष को ‘मातृशक्ति’ के रूप में मनाने की भी घोषणा की है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महिला उम्मीदवार को राज्यसभा भेजकर भाजपा यह संदेश देना चाहती है कि वह केवल योजनाओं की घोषणा ही नहीं कर रही, बल्कि महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व भी दे रही है।

कांग्रेस भी इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहती। इसलिए उसने भी महिला उम्मीदवार पर भरोसा जताकर महिला मतदाताओं को आकर्षित करने की रणनीति बनाई है।

कांग्रेस में अंदरूनी विवाद को भी मिला विराम

कांग्रेस द्वारा फूलोदेवी नेताम को दोबारा उम्मीदवार बनाने के पीछे एक और अहम कारण पार्टी के भीतर चल रहा संभावित विवाद भी माना जा रहा है। राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर पार्टी के भीतर कई नेताओं के नाम चर्चा में थे और इससे अंदरूनी खींचतान की संभावना बन रही थी।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसे समय में पार्टी नेतृत्व ने एक सुरक्षित विकल्प के तौर पर फूलोदेवी नेताम को दोबारा मौका देने का फैसला किया। इससे न केवल अंदरूनी विवाद को शांत करने में मदद मिली, बल्कि पार्टी को एक अनुभवी चेहरा भी मिल गया।

राजनीतिक जानकारों के अनुसार, कांग्रेस के सामने राज्यसभा उम्मीदवार को लेकर संभावित घमासान की स्थिति थी। ऐसे में फूलोदेवी नेताम को दोबारा उम्मीदवार बनाना सबसे सुरक्षित और प्रभावी निर्णय था। उनका मानना है कि चुनावी वर्ष में महिला उम्मीदवारों को राज्यसभा भेजने का राजनीतिक संदेश भी महत्वपूर्ण होगा।

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चुनावी साल को ध्यान में रखकर फैसला

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि दोनों दलों ने यह फैसला केवल राज्यसभा चुनाव को ध्यान में रखकर नहीं लिया है, बल्कि इसके पीछे आने वाले चुनावों की रणनीति भी जुड़ी हुई है। महिला मतदाताओं की बढ़ती भूमिका को देखते हुए दोनों दल महिला नेतृत्व को आगे लाने का प्रयास कर रहे हैं।

भाजपा जहां ‘महतारी गौरव वर्ष’ और महिला कल्याण योजनाओं के जरिए महिला मतदाताओं को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है, वहीं कांग्रेस भी महिला नेतृत्व को आगे कर राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

ऐसे में देखा जाए तो छत्तीसगढ़ की इन दो राज्यसभा सीटों के लिए घोषित उम्मीदवार केवल औपचारिक चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि यह प्रदेश की राजनीति में आने वाले समय के लिए दोनों दलों की रणनीति का संकेत भी देते हैं। महिला उम्मीदवारों के चयन के जरिए दोनों दलों ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले चुनावों में महिला मतदाता और सामाजिक समीकरण निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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