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भगवान श्री राम जन्मोत्सव- भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी राम नवमी

भगवान श्री राम जन्मोत्सव- भगवान विष्णु के सातवें अवतार भगवान श्री राम के जन्मोत्सव के रूप में 26 मार्च 2026 को मनाई जाएगी राम नवमी
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 8, 2026 9:46 अपराह्न
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राम नवमी केवल एक त्यौहार नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, नैतिकता और धर्म की विजय का प्रतीक है। चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व करोड़ों भक्तों के हृदय में आस्था की ज्योति प्रज्वलित करता है। वर्ष 2026 में यह पावन पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा।

राम नवमी 2026 –  तिथि और शुभ मुहूर्त

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस वर्ष राम नवमी की तिथि और मुहूर्त इस प्रकार हैं

  •   राम नवमी तिथि –  26 मार्च 2026
  •   नवमी तिथि प्रारंभ – 25 मार्च 2026 की देर रात से।
  •  नवमी तिथि समाप्त – 26 मार्च 2026 की शाम तक।
  •  अभिजीत मुहूर्त (जन्म समय) – दोपहर 11 – 30 से 1 – 30 के बीच स्थान के अनुसार थोड़ा परिवर्तन संभव है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

भगवान श्री राम, भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। त्रेतायुग में जब रावण का अत्याचार अपनी पराकाष्ठा पर था तब धर्म की स्थापना के लिए विष्णु जी ने अयोध्या के राजा दशरथ और माता कौशल्या के पुत्र के रूप में अवतार लिया।

  • श्री राम का व्यक्तित्व –  मर्यादा पुरुषोत्तम उन्हें ‘मर्यादा पुरुषोत्तम’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि उन्होंने मानवीय सीमाओं में रहकर आदर्शों का उच्चतम मानक स्थापित किया।
  • आदर्श पुत्र –  पिता के वचनों के लिए राजपाट का त्याग।
  • आदर्श भाई –  भरत और लक्ष्मण के प्रति अटूट प्रेम।
  • आदर्श राजा –  ‘राम राज्य’ की अवधारणा, जहाँ प्रजा का सुख ही सर्वोपरि था।

राम नवमी का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में चैत्र नवरात्रि का विशेष महत्व है। नवरात्रि के नौवें दिन राम नवमी मनाई जाती है जो शक्ति और भक्ति के संगम को दर्शाती है।

  • बुराई पर अच्छाई की जीत – यह दिन सिखाता है कि सत्य कितना भी कठिन क्यों न हो अंततः विजय उसी की होती है।
  • अध्यात्मिक शुद्धि –  इस दिन व्रत रखने और रामचरितमानस का पाठ करने से मन और आत्मा की शुद्धि होती है।
  • ग्रह शांति – ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन पूजा करने से सूर्य ग्रह के दोषों का निवारण होता है।

उत्सव और परंपराएं-भारत के कोने-कोने में राम नवमी अलग-अलग रीति-रिवाजों से मनाई जाती है

अयोध्या का भव्य उत्सव-रामलला की जन्मभूमि अयोध्या में इस दिन का आकर्षण अद्वितीय होता है। सरयू नदी में पवित्र स्नान के बाद भक्त कनक भवन और नवनिर्मित श्री राम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन करते हैं।

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पूजा विधि

  • कलश स्थापना – सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लिया जाता है।
  • षोडशोपचार पूजन –  भगवान राम की मूर्ति को गंगाजल और दूध से स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाए जाते हैं।
  • रामचरितमानस पाठ – अखंड रामायण या ‘सुंदरकांड’ का पाठ किया जाता है।
  • पंजीरी और पंचामृत –  धनिया की पंजीरी और पंचामृत का विशेष भोग लगाया जाता है।

राम राज्य की प्रासंगिकता (आधुनिक संदर्भ में)

आज के युग में ‘राम राज्य’ की चर्चा अक्सर सुशासन (Good Governance) के उदाहरण के रूप में की जाती है।

  •  समानता –  जहाँ हर नागरिक को न्याय मिले।
  •  कर्तव्य निष्ठा –  राजा और प्रजा दोनों अपने कर्तव्यों के प्रति सजग हों।
  •   करुणा – समाज के अंतिम व्यक्ति के प्रति दया का भाव।

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राम नवमी के विशेष मंत्र

पूजा के समय इन मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायी माना जाता है

  •  ॐ रामाय नमः
  •  श्री राम जय राम जय जय राम
  •   राम नामेति रामेति, रमे रामे मनोरमे। सहस्रनाम तत्तुल्यं, रामनाम वरानने॥

राम नवमी हमें याद दिलाती है कि जीवन में कितनी भी चुनौतियां क्यों न आएं हमें अपने धर्म और सिद्धांतों से पीछे नहीं हटना चाहिए। 26 मार्च 2026 को जब हम यह पर्व मनाएंगे तो हमारा लक्ष्य केवल उत्सव मनाना नहीं बल्कि श्री राम के गुणों को अपने भीतर उतारना होना चाहिए।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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