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क्या है भोगी उत्सव क्यों मनाया जाता है यह

क्या है भोगी उत्सव क्यों मनाया जाता है यह
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 13, 2026 1:47 अपराह्न
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भोगी (Bhogi) दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है जो विशेष रूप से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और कर्नाटक में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह चार दिवसीय पोंगल (Pongal) या संक्रांति उत्सव का पहला दिन होता है।

क्या है भोगी उत्सव

भोगी त्योहार हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार मार्गशीर्ष महीने के अंतिम दिन मनाया जाता है। यह आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर में 13 या 14 जनवरी को पड़ता है। यह दिन पुराने को त्यागने और नए का स्वागत करने का प्रतीक है।

क्यों मनाया जाता है भोगी उत्सव 

  • इंद्र देव का सम्मान – पौराणिक कथाओं के अनुसार यह दिन देवराज इंद्र को समर्पित है जिन्हें भोगी भी कहा जाता है। इंद्र बादलों और वर्षा के देवता हैं। किसान अच्छी फसल और समृद्धि के लिए उनका आभार व्यक्त करते हैं।
  • भगवान कृष्ण और इंद्र की कथा – एक अन्य मान्यता के अनुसार जब इंद्र को अपनी शक्तियों पर गर्व हो गया था तब भगवान कृष्ण ने गोकुल वासियों को इंद्र की जगह गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा। इससे इंद्र क्रोधित हुए और मूसलाधार वर्षा की। अंततः कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत उठाकर सबकी रक्षा की और इंद्र का अहंकार तोड़ा। इंद्र के पश्चाताप करने के बाद इस दिन को उत्सव के रूप में मनाया जाने लगा।
  • ऋतु परिवर्तन – वैज्ञानिक रूप से यह शीत ऋतु के समापन और सूर्य के उत्तरायण होने की पूर्व संध्या है।

भोगी उत्सव की प्रमुख परंपराएं

  • भोगी मंतलु (भोगी की होली)-इस दिन की सबसे बड़ी विशेषता अलाव (Bonfire) जलाना है। सुबह तड़के लोग अपने घरों के पुराने बेकार लकड़ी के सामान पुराने कपड़े और अन्य अनुपयोगी वस्तुओं को आग के हवाले कर देते हैं।
  • आध्यात्मिक संदेश – यह बुराइयों पुरानी आदतों और नकारात्मकता को जलाकर मन को शुद्ध करने का प्रतीक है।
  • भोगी पल्लू (Bhogi Pallu)-आंध्र प्रदेश में बच्चों के लिए एक विशेष रस्म होती है। बेर (रेगी पंड्लु) गन्ने के टुकड़े और सिक्कों को मिलाकर बच्चों के सिर पर डाला जाता है। माना जाता है कि इससे बच्चों को नजर नहीं लगती और वे स्वस्थ रहते हैं।
  • मुग्गु या कोलम (रंगोली)-महिलाएं अपने घरों के सामने चावल के आटे और रंगों से भव्य रंगोली (Muggulu) बनाती हैं। इन रंगोलियों के बीच में गोबर के उपले (Gobbemma) रखे जाते हैं जिन्हें फूलों से सजाया जाता है।

भोगी का विशेष भोजन

इस दिन कुछ खास व्यंजन बनाए जाते हैं जो स्वास्थ्य और परंपरा दोनों का मिश्रण हैं-

  • पुलीहोरा (Pulihora) – इमली वाले चावल।
  • बोब्बटलु (Bobbatlu – Puran Poli) – चने की दाल और गुड़ से बनी मीठी रोटी।
  • सज्जा रोट्टे (Sajja Rotte) –  बाजरे की रोटी और मक्खन।

सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व

  • सफाई और नवीनीकरण –  यह दिन स्वच्छता का संदेश देता है। लोग अपने घरों को रंगते हैं और फूलों से सजाते हैं।
  • एकता का प्रतीक –  समुदाय के लोग एक साथ अलाव के पास इकट्ठा होते हैं, जिससे आपसी भाईचारा बढ़ता है।
  • किसानों का पर्व –  यह फसल कटाई का उत्सव है, इसलिए यह सीधे तौर पर भारत की कृषि प्रधान संस्कृति से जुड़ा है।

वर्तमान समय में भोगी और पर्यावरण 

आजकल भोगी के अलाव में प्लास्टिक या टायर जैसी चीजें जलाने से प्रदूषण होता है। इसलिए अब इको-फ्रेंडली भोगी मनाने पर जोर दिया जा रहा है जिसमें केवल प्राकृतिक और जैव-अपघटनीय (Biodegradable) वस्तुओं को ही जलाया जाता है।

भोगी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है बल्कि यह जीवन में बदलाव और सकारात्मकता लाने का एक जरिया है। यह हमें सिखाता है कि प्रगति के लिए पुरानी और व्यर्थ चीजों का त्याग करना आवश्यक है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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