डेलीबार्ता,रमजान विशेष-इस्लाम धर्म का सबसे पवित्र महीना रमजान (Ramadan) हर साल दुनियाभर के मुसलमानों के लिए इबादत, संयम और आध्यात्मिक शुद्धि का संदेश लेकर आता है। रोजा, नमाज, कुरान की तिलावत और जरूरतमंदों की मदद — यह महीना इंसान को आत्मअनुशासन और इंसानियत की राह पर चलने की प्रेरणा देता है। साल 2026 में रमजान फरवरी महीने में ही शुरू होने जा रहा है, जिसे लेकर भारत, पाकिस्तान समेत कई देशों में लोगों के बीच उत्सुकता बढ़ गई है।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस बार रमजान 18 फरवरी से शुरू होगा या 19 फरवरी से? चूंकि इस्लामिक कैलेंडर पूरी तरह चंद्रमा की स्थिति पर आधारित होता है, इसलिए हर साल इसकी शुरुआत चांद दिखने पर निर्भर करती है। यही वजह है कि अलग-अलग देशों में रमजान की शुरुआत एक दिन आगे-पीछे हो सकती है।
आइए विस्तार से समझते हैं कि खगोलीय संस्थाओं और मौसम विभागों के अनुसार इस बार रमजान कब से शुरू होने की संभावना है और भारत-पाकिस्तान में पहला रोजा किस दिन रखा जा सकता है।
चांद पर निर्भर करता है रमजान का आगाज़
इस्लामिक या हिजरी कैलेंडर सौर कैलेंडर से अलग होता है। यह पूरी तरह चंद्रमा की चाल पर आधारित होता है। हर नया महीना नए चांद (हिलाल) के दिखने के बाद शुरू होता है। रमजान इस्लामी कैलेंडर का नौवां महीना है और इसकी शुरुआत शाबान महीने के खत्म होने के बाद होती है।
चूंकि चांद का दिखना मौसम, भौगोलिक स्थिति और स्थानीय अवलोकन पर निर्भर करता है, इसलिए दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में रमजान की शुरुआत अलग तारीखों पर हो सकती है। यही कारण है कि कई बार मध्य पूर्व और दक्षिण एशिया में रोजा अलग दिन से शुरू होता है।
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एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने क्या अनुमान लगाया?
खगोलीय गणनाओं के आधार पर सऊदी अरब की एमिरेट्स एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ने इस साल रमजान की संभावित शुरुआत को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। विशेषज्ञों के अनुसार-
18 फरवरी 2026 की शाम को रमजान 1447 हिजरी का चांद दिखाई देने की संभावना है।
अगर चांद का दीदार हो जाता है, तो 19 फरवरी से रमजान की शुरुआत मानी जाएगी।
यानी पहला रोजा गुरुवार, 19 फरवरी 2026 को रखा जा सकता है।
हिजरी कैलेंडर के अनुसार इस साल 1447AH (Anno Hegirae) का रमजान होगा। विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि इस बार रोजे अपेक्षाकृत आसान रहेंगे क्योंकि यह “विंटर रमजान” होगा।
क्यों कहा जा रहा है ‘विंटर रमजान’?
रमजान हर साल लगभग 10–11 दिन पहले आता है, क्योंकि इस्लामी कैलेंडर चंद्र वर्ष पर आधारित होता है। इसी वजह से कभी रमजान गर्मियों में पड़ता है तो कभी सर्दियों में। 2026 का रमजान सर्द मौसम के दौरान आएगा, इसलिए इसे “विंटर रमजान” कहा जा रहा है। खगोलीय विशेषज्ञों के अनुसार रोजे की अवधि लगभग 12 घंटे 45 मिनट के आसपास शुरू होगी और महीने के आगे बढ़ने के साथ रोजे की अवधि धीरे-धीरे बढ़ती जाएगी। गर्मियों की तुलना में रोजेदारों को कम थकान और प्यास महसूस होगी।
यह समय रोजा रखने वालों के लिए अपेक्षाकृत आरामदायक माना जाता है।
17 फरवरी को नया चांद, लेकिन दिखने की संभावना कम
इंटरनेशनल एस्ट्रोनॉमी सेंटर की रिपोर्ट के मुताबिक 17 फरवरी 2026 को खगोलीय रूप से नया चांद पैदा हो जाएगा। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि 17 फरवरी को सूर्यास्त के बाद चांद का दिखाई देना मुश्किल होगा।
चांद की ऊंचाई और रोशनी कम होने के कारण नग्न आंखों से देख पाना कठिन रहेगा। इसलिए अधिकांश देशों में उसी दिन रमजान शुरू होने की संभावना बेहद कम है।
यही वजह है कि 18 फरवरी की शाम को चांद देखने पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है।
यूएई और खाड़ी देशों में कब से शुरू होगा रमजान?
खाड़ी देशों में अक्सर खगोलीय गणना और चांद देखने की संयुक्त प्रक्रिया अपनाई जाती है। उपलब्ध अनुमानों के अनुसार 18 फरवरी शाबान महीने का आखिरी दिन माना जा सकता है। 19 फरवरी 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और आसपास के कई अरब देशों में पहला रोजा रखा जाएगा। हालांकि अंतिम फैसला चांद दिखने की आधिकारिक घोषणा के बाद ही लिया जाता है।
पाकिस्तान में कब रखा जाएगा पहला रोजा?
पाकिस्तान मौसम विज्ञान विभाग ने भी रमजान की शुरुआत को लेकर अनुमान जारी किया है। विभाग के अनुसार:
18 फरवरी की शाम को रमजान का चांद दिखाई देने की संभावना है। अगर चांद नजर आता है, तो पाकिस्तान में पहला रोजा 19 फरवरी को रखा जाएगा।
पाकिस्तान में केंद्रीय रूएत-ए-हिलाल कमेटी चांद दिखने की पुष्टि करती है और उसी के आधार पर आधिकारिक घोषणा होती है।
भारत में रमजान कब से शुरू हो सकता है?
भारत में रमजान की शुरुआत आमतौर पर स्थानीय चांद देखने पर निर्भर करती है। यहां अलग-अलग शहरों से चांद दिखने की पुष्टि के बाद धार्मिक संस्थाएं आधिकारिक घोषणा करती हैं।संभावनाएं इस प्रकार हैं –
अगर 18 फरवरी की शाम चांद दिखाई देता है, तो 19 फरवरी से पहला रोजा रखा जाएगा। यदि चांद नहीं दिखता, तो रमजान 20 फरवरी से शुरू हो सकता है।
हालांकि खगोलीय अनुमान 19 फरवरी से रमजान शुरू होने की संभावना ज्यादा बताते हैं।
जानिये क्या है रमजान का धार्मिक महत्व
रमजान इस्लाम में आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का महीना माना जाता है। माना जाता है कि इसी महीने में कुरान शरीफ का अवतरण हुआ था। मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोजा रखते हैं, जिसमें
- भोजन और पानी से परहेज
- बुरे विचारों और कर्मों से दूरी
- ज्यादा से ज्यादा इबादत
- दान और जरूरतमंदों की मदद
को विशेष महत्व दिया जाता है।
रोजा केवल भूखे-प्यासे रहने का नाम नहीं बल्कि आत्मसंयम, धैर्य और इंसानियत का अभ्यास भी है।
रोजे का दैनिक क्रम
रमजान के दौरान दिनचर्या पूरी तरह बदल जाती है। रोजेदार सुबह सहरी (सेहरी) से रोजा शुरू करते हैं और सूर्यास्त के बाद इफ्तार करते हैं।
मुख्य चरण
- सहरी: सूर्योदय से पहले लिया जाने वाला भोजन
- रोजा: पूरे दिन संयम और इबादत
- इफ्तार: सूर्यास्त के बाद रोजा खोलना
- तरावीह नमाज: रात में विशेष नमाज
यह क्रम पूरे महीने चलता है और आध्यात्मिक वातावरण को मजबूत बनाता है।
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सामाजिक और मानवीय संदेश
रमजान केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि सामाजिक बराबरी और करुणा का भी प्रतीक है। इस दौरान लोग जकात और सदका के रूप में दान देते हैं ताकि जरूरतमंदों की मदद हो सके।
इस महीने का मूल संदेश है
- आत्मनियंत्रण
- सहनशीलता
- भाईचारा
- मानवता की सेवा
इसी कारण रमजान को रहमतों और बरकतों का महीना कहा जाता है।
रमजान केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आत्ममंथन, अनुशासन और इंसानियत को मजबूत करने का महीना है। यही वह समय होता है जब लोग अपने अंदर सकारात्मक बदलाव लाने की कोशिश करते हैं और समाज में प्रेम, दया और भाईचारे का संदेश फैलाते हैं।
अब सबकी निगाहें 18 फरवरी की शाम आसमान पर टिकी रहेंगी क्योंकि चांद के साथ ही शुरू होगा इबादत और बरकतों का पाक महीना रमजान।







