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Hormuz Route Band: Reliance-IOC ne Russia se Oil खरीदने की बुकिंग की

Reliance-IOC ne Russia se Oil खरीदने की बुकिंग की
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 12, 2026 8:49 अपराह्न
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स्ट्रेटेजिक एनर्जी सिक्योरिटी और वैश्विक भू-राजनीति के इस दौर में, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का संकट भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) द्वारा रूस से भारी मात्रा में कच्चे तेल की खरीद का निर्णय केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं, बल्कि भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक सोची-समझी चाल है।

हॉर्मुज जलडमरूमध्य ‘  वैश्विक तेल की जीवनरेखा और वर्तमान संकट

​हॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। ओमान और ईरान के बीच स्थित यह पतला समुद्री मार्ग सऊदी अरब, इराक और यूएई जैसे प्रमुख तेल उत्पादकों को वैश्विक बाजारों से जोड़ता है।

  • महत्व –  दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20% से 25% इसी रास्ते से गुजरता है।
  • संकट का कारण –  क्षेत्रीय तनाव और सुरक्षा कारणों से इस रूट के बाधित होने पर कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में 20 से 30 प्रति बैरल तक का उछाल आ सकता है।
  • भारत पर प्रभाव – भारत अपनी जरूरत का 85% कच्चा तेल आयात करता है। हॉर्मुज रूट बंद होने का मतलब है खाड़ी देशों से आने वाली सप्लाई का ठप होना।

​ रिलायंस और IOC की रणनीतिक बुकिंग –  3 करोड़ बैरल का सौदा

​जब पारंपरिक खाड़ी मार्ग असुरक्षित हो गए, तो भारत की सबसे बड़ी निजी रिफाइनर (रिलायंस) और सबसे बड़ी सरकारी रिफाइनर (IOC) ने रूस की ओर रुख किया।

​रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की भूमिका

​रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी दुनिया की सबसे जटिल रिफाइनरियों में से एक है। यह ‘भारी’ और ‘खट्टे’ (Sour) रूसी कच्चे तेल को भी उच्च गुणवत्ता वाले ईंधन में बदलने की क्षमता रखती है।

  • बुकिंग विवरण – रिलायंस ने अनुमानित 1.5 करोड़ बैरल तेल की बुकिंग की है।
  • भुगतान मोड –  डॉलर के बजाय वैकल्पिक मुद्राओं (जैसे दिरहम या युआन) और भारतीय रुपये में व्यापार तंत्र का उपयोग।

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​इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) की रणनीति

​IOC ने अपनी रिफाइनिंग क्षमता को सुरक्षित करने के लिए दीर्घकालिक और अल्पकालिक दोनों तरह के सौदे किए हैं।

  • बुकिंग विवरण –  IOC ने लगभग 1.5 करोड़ बैरल की बुकिंग सुनिश्चित की है, जो मुख्य रूप से रूसी ‘उरल्स’ (Urals) ग्रेड का तेल है।
  • परिवहन –  रूसी टैंकरों और अंतरराष्ट्रीय बेड़े का उपयोग किया जा रहा है जो पश्चिमी प्रतिबंधों के दायरे से बाहर काम कर रहे हैं।

​रूसी तेल ही क्यों? (आर्थिक और रणनीतिक कारण)

कारकविवरण
भारी डिस्काउंटरूसी तेल खाड़ी के तेल की तुलना में 5 से 10 प्रति बैरल सस्ता मिल रहा है।
आपूर्ति की सुरक्षाहॉर्मुज के बजाय आर्कटिक और बाल्टिक रूट के जरिए तेल की डिलीवरी सुरक्षित है।
द्विपक्षीय संबंधभारत और रूस के बीच “विशेष रणनीतिक साझेदारी” व्यापारिक बाधाओं को कम करती है।
लॉजिस्टिक्सबड़े कच्चे तेल के जहाजों (VLCCs) का उपयोग करके परिवहन लागत कम की जा रही है।

रिफाइनिंग प्रक्रिया और तकनीकी पक्ष

कच्चे तेल (Crude Oil) को उपयोगी उत्पादों जैसे पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन में बदलने की प्रक्रिया को रिफाइनिंग कहा जाता है। यह एक जटिल इंजीनियरिंग प्रक्रिया है जो भौतिक और रासायनिक परिवर्तनों पर आधारित है।

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पृथक्करण –  प्रभाजी आसवन (Fractional Distillation)

​यह रिफाइनिंग का पहला और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। कच्चा तेल विभिन्न हाइड्रोकार्बन का मिश्रण होता है, जिनके क्वथनांक (Boiling Points) अलग-अलग होते हैं।

  • प्रक्रिया –  कच्चे तेल को एक भट्टी में लगभग 350°C से 400°C तक गर्म किया जाता है और एक ऊंचे ‘डिस्टिलेशन टावर’ में भेजा जाता है।
  • कार्यप्रणाली –  जैसे-जैसे वाष्प ऊपर उठती है वह ठंडी होती जाती है। भारी हाइड्रोकार्बन (जैसे डामर) नीचे बैठ जाते हैं  जबकि हल्के हाइड्रोकार्बन (जैसे मीथेन, इथेन) सबसे ऊपर निकल जाते हैं। बीच के स्तरों पर डीजल, केरोसिन और पेट्रोल प्राप्त होते हैं।

रूपांतरण –  क्रैकिंग और सुधार (Cracking & Reforming)

​आसवन से प्राप्त उत्पादों की मात्रा हमेशा बाजार की मांग के अनुरूप नहीं होती। इसलिए भारी अणुओं को छोटे अणुओं में बदला जाता है।

  • फ्लुइड कैटेलिटिक क्रैकिंग (FCC) –  इसमें उच्च तापमान और उत्प्रेरक (Catalyst) का उपयोग करके भारी गैस तेल को पेट्रोल और एलपीजी में तोड़ा जाता है।
  • कैटेलिटिक रिफॉर्मिंग –  इस प्रक्रिया में कम ऑक्टेन वाले नेफ्था को उच्च ऑक्टेन वाले प्रीमियम पेट्रोल में बदला जाता है। यह इंजन की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए तकनीकी रूप से आवश्यक है।

​उपचार और शुद्धिकरण (Treatment & Purification)

​कच्चे तेल में प्राकृतिक रूप से सल्फर, नाइट्रोजन और भारी धातुएं होती हैं। यदि इन्हें निकाला न जाए, तो ये पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हैं और इंजन को संक्षारित (Corrode) कर सकते हैं।

  • हाइड्रो-डीसल्फराइजेशन (HDS) – इसमें हाइड्रोजन का उपयोग करके ईंधन से सल्फर को अलग किया जाता है। आज के समय में ‘भारत स्टेज VI’ (BS-VI) जैसे मानकों को पूरा करने के लिए यह तकनीक अनिवार्य है।

​सम्मिश्रण (Blending)

​यह अंतिम तकनीकी चरण है जहाँ विभिन्न रिफाइनरी धाराओं को मिलाकर अंतिम उत्पाद तैयार किया जाता है। यहाँ ऑक्टेन रेटिंग, वाष्प दबाव और अन्य विशिष्टताओं की जांच की जाती है ताकि उत्पाद सरकारी मानकों पर खरा उतरे।

​मुख्य रिफाइनरी उत्पाद और उनके उपयोग

उत्पादकार्बन परमाणुओं की संख्याउपयोग
LPGC_1 से C_4खाना पकाने और हीटिंग के लिए
पेट्रोल (Gasoline)C_5 से C_{10}हल्के वाहनों के ईंधन के रूप में
केरोसिन / जेट ईंधनC_{10} से C_{16}विमानन और घरेलू ईंधन
डीजलC_{14} से C_{20}भारी वाहनों और जहाजों के लिए
ल्यूब्रिकेटिंग ऑयलC_{20} से ऊपरमशीनरी के स्नेहन के लिए

वैश्विक प्रतिबंध और भारत का रुख

अमेरिका और यूरोपीय संघ द्वारा लगाए गए ‘प्राइस कैप’ ($60 प्रति बैरल) के बावजूद भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को प्राथमिकता दी है। भारत का तर्क स्पष्ट है: “ऊर्जा सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है।”

  • ​बीमा और शिपिंग – भारत ने अपने स्वयं के जहाजों और गैर-पश्चिमी बीमा कंपनियों का उपयोग करके प्रतिबंधों के प्रभाव को कम किया है।
  • ​रुपया-रुबल व्यापार – अंतरराष्ट्रीय भुगतान प्रणालियों (SWIFT) पर निर्भरता कम करने के लिए द्विपक्षीय व्यापार तंत्र विकसित किया गया है।

भविष्य की राह 

​हॉर्मुज संकट ने भारत को यह सिखाया है कि तेल आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाना कितना आवश्यक है। रूस से 3 करोड़ बैरल तेल की यह खरीद केवल एक तात्कालिक समाधान नहीं है, बल्कि यह भारत की ‘स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व’ (SPR) नीति का भी हिस्सा है।

रिलायंस और IOC की यह संयुक्त पहल भारत की अर्थव्यवस्था को महंगाई के झटकों से बचाएगी और यह सुनिश्चित करेगी कि पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी न हो।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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