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हिंदू विवाह में क्यों दिये जाते है 7 वचन, जानिये क्या है सात वचन का अर्थ और महत्व

सात वचन
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 7, 2025 6:04 अपराह्न
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भारत में हिंदू विवाह सिर्फ एक सामाजिक अनुबंध भर नहीं, बल्कि एक दिव्य संस्कार माना जाता है। यह न केवल दो व्यक्तियों को जोड़ता है बल्कि दो परिवारों, दो संस्कृतियों और दो जीवन मूल्यों को भी एक सूत्र में पिरो देता है। हिंदू धर्म में विवाह को “अमर बंधन” कहा गया है, जिसका उद्देश्य सात जन्मों तक साथ निभाने की भावना को जीवित रखना है। इसी संदर्भ में विवाह के समय लिए जाने वाले सात वचन या सप्तपदी इस रिश्ते की आत्मा माने जाते हैं। इनमें निहित हर प्रतिज्ञा पति–पत्नी को जीवनभर के दायित्वों का बोध कराती है।

हिंदू विवाह में क्यों दिये जाते है 7 वचन

आज, जब दुनिया तेजी से बदल रही है, आधुनिकता की लहर समाज को नई दिशा दे रही है, तब भी हिंदू विवाह में सात वचनों की परंपरा अपना महत्व बनाए हुए है। आइए जानते हैं कि आखिर सात जन्मों का विश्वास क्यों है, सात वचन क्या कहते हैं, और इन्हें विवाह का सबसे महत्वपूर्ण अंग क्यों माना जाता है।

सात जन्मों का विश्वास, कहां से आया और क्या है अर्थ?

हिंदू धर्म में आत्मा को अमर माना गया है। शरीर बदलता है लेकिन माना जाता है कि आत्मा जन्मजन्मांतर तक यात्रा करती रहती है। इसी दर्शन के आधार पर विवाह को सिर्फ एक जीवन का बंधन नहीं बल्कि सात जन्मों का बंधन कहा गया है।
सात जन्मों की मान्यता के पीछे तीन प्रमुख कारण बताए जाते हैं।

  • आत्मा का पुनर्जन्म- वेदों और उपनिषदों के अनुसार मृत्यु के बाद आत्मा पुनः नया शरीर धारण करती है।
  • कर्मबंधन – पति–पत्नी अपने कर्मों से जुड़े रहते हैं, इसलिए ऐसा माना जाता है कि यदि दोनों का बंधन सच्चा और पवित्र है तो अगले जन्मों में भी एक-दूसरे का साथ मिलता है।
  • विवाह का आध्यात्मिक स्वरूप विवाह को मोक्ष की यात्रा में सहयात्री का साथ माना जाता है। यह साथ कई जन्मों तक चलता है, ऐसा विश्वास है।

हालांकि यह पूरी तरह आस्था पर आधारित है, लेकिन इसका गहरा सामाजिक और भावनात्मक अर्थ भी है। यह भाव देता है कि दो इंसान केवल आज के लिए नहीं, बल्कि जीवन की हर परिस्थिति में और हर युग में एक-दूसरे का हाथ थामे रहेंगे।

सप्तपदी-सात वचनों का महत्व

विवाह की अग्नि के सात फेरे लेते समय दूल्हा–दुल्हन सात वचन देते हैं। इन वचनों को “सप्तपदी” कहा जाता है। शास्त्रों में विवाह तभी पूर्ण माना जाता है जब वर-वधू अग्नि के सामने सात कदम चलते हैं और सात प्रतिज्ञाएँ लेते हैं। तो आपको हम प्रत्येक वचन का अर्थ, उद्देश्य और आधुनिक समाज में उसकी प्रासंगिकता समझते हैं।

यह है पहला वचन-भोजन,पोषण और आजीविका का संकल्प और अर्थ

पहले फेरे में दूल्हा–दुल्हन एक-दूसरे से वादा करते हैं, कि वे घर के पोषण, भोजन की शुद्धता और आर्थिक स्थिरता के लिए साथ मिलकर प्रयास करेंगे।अर्थ यह है कि पति पत्नी के लिए आजीविका का प्रबंध करेगा।पत्नी परिवार को पोषण और प्रेम देगी। यह वचन बताता है कि परिवार चलाने की जिम्मेदारी दोनों साझा करें। चाहे नौकरी हो, घर हो या किसी संकट का समय, दोनों एक-दूसरे का समर्थन करें।

जानिये दूसरा वचन- शक्ति, साहस और जीवन सुरक्षा का वादा

दूसरे फेरे में दोनों यह प्रतिज्ञा करते हैं कि वे एक-दूसरे को हर कठिनाई में शक्ति देंगे और परिवार की रक्षा करेंगे। जिसका अर्थ है जीवन के संघर्षों में साथ देना। साथ ही शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा देना। यह वचन मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षित रिश्ते और भावनात्मक स्थिरता की नींव रखता है।

यह है तीसरा वचन- धर्म, सदाचार और जीवन की पवित्रता

इस वचन में पति–पत्नी यह स्वीकृति देते हैं कि वे धार्मिक, नैतिक और सामाजिक मूल्यों का पालन करेंगे। जिसके अनुसार धर्म और सत्य के रास्ते पर चलना, साथ ही रिश्ते की पवित्रता बनाए रखना। यह वचन इंसान को परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदार बनाता है। रिश्ते में विश्वास और निष्ठा का आधार तैयार करता है।

जानिये चौथा वचन

जिसमें प्रेम, सम्मान और परिवार की समृद्धि के बारें में बताया गया है। चौथे फेरे में भावनात्मक प्रेम का महत्व बताया गया है। जिसके अर्थ पर जायें तो इसमें एक-दूसरे से सम्मानपूर्वक व्यवहार करना,परिवार की खुशी और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना है। आज के समय में बराबरी का सम्मान, समझदारी, संवाद और सहयोग रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत है। यह वचन साथी को सिर्फ जीवनसाथी नहीं बल्कि बराबरी का मित्र मानने की प्रेरणा देता है।

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पांचवां वचन बताते हैं संतान, कर्तव्य और परिवार विस्तार

यह वचन भविष्य में आने वाली संतान और उसके पालन-पोषण की जिम्मेदारी को दर्शाता है। जिसमें संतान के प्रति उत्तरदायित्व, उसके लिए बेहतर भविष्य बनाना शामिल है। यह वचन बताता है कि माता–पिता होना सिर्फ जैविक प्रक्रिया नहीं बल्कि एक बड़ा दायित्व है।

जानिये क्या है छठा वचन जिसमें हर सुख–दुख में साथ निभाने का है वादा

इस वचन में दूल्हा–दुल्हन जीवन भर एक-दूसरे का साथ निभाने की प्रतिज्ञा करते हैं। जिसके अर्थ में जायें तो बीमारी में, दुख में, संघर्ष में और हर परिस्थिति में साथ रहना है।
जीवन को साझेदारी के रूप में जीना है। आधुनिक तनावपूर्ण जीवन में यह वचन रिश्ते को मजबूती देता है। यह बताता है कि विवाह केवल आनंद का सफर नहीं बल्कि उतार–चढ़ावों से भरी यात्रा है जिसे साथ मिलकर पूरा करना है।

यह है सातवां और अंतिम वचन

सातवां और अंतिम वचन में आजीवन बंधन और सात जन्मों तक साथ का संकल्प है, जो सबसे महत्वपूर्ण वचन है। जिसका अर्थ जीवनभर साथ निभाने का वादा है। हर जन्म में एक-दूसरे के साथी होने का प्रण करना है।
हालांकि आज के समय में रिश्ते व्यवहारिक हो गए हैं, लेकिन यह वचन आज भी प्रेम, विश्वास और समर्पण का प्रतीक है।

क्यों दिलाये जाते है सात वचन?

सात वचन विवाह की नींव हैं। इन्हें दिए बिना विवाह को पूर्ण नहीं माना जाता। इनके पीछे तीन मुख्य कारण हैं। जिसमें निम्न बातें महत्वपूर्ण है।

जिसमें रिश्ते की मजबूती,हर वचन दांपत्य जीवन के एक महत्वपूर्ण पहलू को संबोधित करता है। जिसमें –

  • आर्थिक स्थिरता
  • सुरक्षा
  • प्रेम
  • सम्मान
  • परिवार
  • निष्ठा

और साथ इन सातों से मिलकर एक पूर्ण और संतुलित संबंध बनाते हैं।

सामाजिक और नैतिक दायित्वों की याद दिलाना

यह सात वचन केवल पति–पत्नी के बीच का बंधन नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी का भी प्रतीक हैं।आध्यात्मिक एकता का संकेत है।यह वचन बताते हैं कि विवाह केवल शरीर का नहीं बल्कि मन और आत्मा का भी मिलन है। अग्नि को साक्षी मानना इस मिलन को पवित्र बनाता है। आज के समय में सात वचनों की उपयोगिता भले ही समाज आधुनिक हो गया हो, लेकिन सात वचनों की प्रासंगिकता समय के साथ और भी बढ़ गई है।

आज की भागदौड़ में पति-पत्नी को साझेदारी और सहयोग की जरूरत पहले से कहीं अधिक है। आर्थिक जिम्मेदारियां साझा करना रिश्ते को मजबूत बनाता है। मानसिक और भावनात्मक सुरक्षा विवाह की सबसे बड़ी नींव है।प्रेम और सम्मान हर स्वस्थ रिश्ते की सबसे अनिवार्य शर्तें हैं। इसलिए सात वचनों की परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि जीवन के मूल्य सिखाने वाली सीख है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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