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सऊदी अरब के रेगिस्तान में कई दशकों बाद भीषण बर्फबारी तापमान शून्य से नीचे पहुंच

​सऊदी अरब का रेगिस्तान बना सफेद जन्नत
नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 23, 2025 1:44 अपराह्न
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सऊदी अरब जिसे हम तपती धूप और अंतहीन रेत के टीलों के लिए जानते हैं वहां बर्फ की चादर बिछना किसी चमत्कार से कम नहीं है।​ यह एक ऐतिहासिक और चौंकाने वाली प्राकृतिक घटना है। सऊदी अरब के रेगिस्तान में दशकों बाद भीषण बर्फबारी हुई|

​सऊदी अरब का रेगिस्तान बना सफेद जन्नत

​सऊदी अरब का रेगिस्तान बना सफेद जन्नत

दशकों बाद ऐतिहासिक बर्फबारी और जलवायु परिवर्तन का संकेत ​सऊदी अरब का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में सबसे पहली तस्वीर विशालकाय सुनहरे रेत के टीले ऊंटों का काफिला और चिलचिलाती गर्मी की आती है। लेकिन पिछले कुछ समय में प्रकृति ने दुनिया को अपनी वह करवट दिखाई है जिसकी कल्पना शायद ही किसी ने की थी। सऊदी अरब के उत्तरी प्रांतों विशेषकर अल-जौफ (Al-Jouf) के क्षेत्रों में ऐसी भीषण बर्फबारी हुई है कि पूरा रेगिस्तान सफेद चादर से ढक गया है।​

एक दुर्लभ प्राकृतिक घटना

​सऊदी अरब के इतिहास में यह घटना बेहद दुर्लभ मानी जा रही है। अल-जौफ क्षेत्र में तापमान शून्य से नीचे गिर गया और आसमान से गिरती बर्फ ने रेत के टीलों को पूरी तरह ढक लिया। स्थानीय निवासियों के लिए यह नज़ारा वैसा ही था जैसे किसी बर्फीले देश जैसे स्विट्जरलैंड या कनाडा में होता है।​

स्थानीय मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार इस क्षेत्र में भारी बारिश और ओलावृष्टि के बाद बर्फबारी का सिलसिला शुरू हुआ। यह घटना इसलिए भी विशेष है क्योंकि सऊदी अरब का यह हिस्सा आमतौर पर शुष्क रहता है जहाँ सर्दियों में भी तापमान काफी सामान्य रहता है।​

30 साल बाद ऐसा मौसम क्या है इसका कारण

​विशेषज्ञों का कहना है कि लगभग तीन दशकों के बाद सऊदी अरब के इन इलाकों में इतनी व्यापक बर्फबारी देखी गई है। मौसम वैज्ञानिकों ने इस घटना के पीछे कई जटिल पर्यावरणीय कारणों को उत्तरदायी ठहराया है|​

लो प्रेशर सिस्टम Low Pressure System अरब सागर से नमी वाली हवाएं उत्तर की ओर बढ़ीं जहाँ उनका सामना साइबेरिया से आने वाली ठंडी हवाओं से हुआ। इस टकराव ने अल-जौफ के ऊपर एक ऐसा वातावरण तैयार किया जिससे भारी बर्फबारी संभव हो सकी।

​जेट स्ट्रीम में बदलाव वायुमंडल की ऊपरी परतों में चलने वाली तीव्र हवाएं Jet Streams जब दक्षिण की ओर झुकती हैं तो वे ध्रुवीय ठंडी हवाओं को रेगिस्तानी इलाकों तक ले आती हैं।

​अरब प्रायद्वीप की भौगोलिक स्थिति सऊदी अरब का उत्तरी हिस्सा जॉर्डन और इराक की सीमाओं के करीब है। यहाँ की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में कभी-कभी तापमान गिरता है लेकिन इस साल की तीव्रता अभूतपूर्व रही।​

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क्या यह क्लाइमेट चेंज का चेतावनी संकेत है​

सऊदी अरब में बर्फबारी को केवल एक सुंदर दृश्य के रूप में नहीं देखा जा सकता। दुनिया भर के पर्यावरणविद इसे जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं।​

मौसम का चरम होना Extreme Weather दुनिया भर में मौसम अब अपने सामान्य पैटर्न को छोड़ रहा है। जहां बारिश होनी चाहिए वहां सूखा पड़ रहा है और जहां भीषण गर्मी होती थी वहां बर्फ गिर रही है।​

ग्लोबल वार्मिंग का प्रभाव सुनने में विरोधाभासी लग सकता है लेकिन ग्लोबल वार्मिंग के कारण पृथ्वी के वायुमंडल का संतुलन बिगड़ रहा है। इससे चक्रवात अप्रत्याशित बारिश और असामान्य बर्फबारी की घटनाएं बढ़ रही हैं।​

स्थानीय जनजीवन और पर्यटन पर प्रभाव

​इस बर्फबारी ने जहां विशेषज्ञों को चिंता में डाला है वहीं स्थानीय लोगों और पर्यटकों के लिए यह किसी उत्सव से कम नहीं रहा।​

स्नो टूरिज्म का उदय

​जैसे ही बर्फबारी की खबरें फैलीं सऊदी अरब के विभिन्न शहरों से लोग अल-जौफ की ओर दौड़ पड़े। सोशल मीडिया पर हज़ारों वीडियो और तस्वीरें वायरल हुईं जिनमें लोग रेत पर बर्फ के साथ खेलते स्नोमैन बनाते और ऊंटों को बर्फ के बीच चलते हुए देख रहे थे।​

कृषि पर प्रभाव

​अल-जौफ अपनी जैतून Olive की खेती के लिए जाना जाता है। हालांकि बर्फबारी देखने में सुंदर है, लेकिन अचानक गिरे तापमान से फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी जताई जा रही है। किसानों के लिए यह चुनौती है कि वे इस असामान्य ठंड से अपनी फसलों को कैसे बचाएं।​

सुरक्षा चुनौतियां

​सऊदी प्रशासन ने सड़कों पर बर्फ जमा होने के कारण ड्राइवरों के लिए चेतावनी जारी की है। चूंकि यहाँ के लोग ऐसी परिस्थितियों के अभ्यस्त नहीं हैं इसलिए फिसलन भरी सड़कों पर वाहन चलाना जोखिम भरा हो गया है।​

सऊदी अरब की ग्रीन पहल और भविष्य

​सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी ग्रीन इनिशिएटिव शुरू किया है जिसके तहत देश में अरबों पेड़ लगाए जाने हैं। इस तरह के जलवायु परिवर्तन भविष्य में सऊदी अरब के पारिस्थितिकी तंत्र को पूरी तरह बदल सकते हैं।​

वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि तापमान में इसी तरह के बदलाव जारी रहे तो आने वाले दशकों में अरब का रेगिस्तान और अधिक हरा-भरा या फिर बार-बार बर्फबारी वाला क्षेत्र बन सकता है। प्राचीन अरबी भविष्यवाणियों और लोककथाओं में भी रेगिस्तान के हरा-भरा होने का ज़िक्र मिलता है जिसे कुछ लोग अब सच होता देख रहे हैं।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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