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मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व  जानिए क्या है खास

मनाया गया सोमनाथ स्वाभिमान पर्व  जानिए क्या है खास
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 11, 2026 4:25 अपराह्न
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जनवरी 2026 में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ भारत की सांस्कृतिक चेतना और पुनर्जागरण के इतिहास में एक मील का पत्थर है। यह केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक राष्ट्र के अदम्य साहस और आत्म-सम्मान (स्वाभिमान) की उद्घोषणा है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व – आस्था और गौरव का संगम

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ का आयोजन 8 जनवरी से 11 जनवरी 2026 तक गुजरात के प्रभास पाटन (वेरावल) स्थित प्रथम ज्योतिर्लिंग श्री सोमनाथ मंदिर में किया गया। इस पर्व के पीछे दो अत्यंत महत्वपूर्ण ऐतिहासिक पड़ाव हैं

आक्रमण के 1000 वर्ष –  जनवरी 1026 में महमूद गजनवी ने सोमनाथ पर पहला बड़ा बर्बर हमला किया था। साल 2026 उस काले अध्याय के 1000 वर्ष पूरे होने का प्रतीक है, लेकिन इसे शोक के बजाय ‘विजय और पुनरुत्थान’ के रूप में मनाया गया।

पुनर्निर्माण के 75 वर्ष –  स्वतंत्रता के पश्चात लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल के संकल्प से निर्मित आधुनिक मंदिर के प्राण-प्रतिष्ठा समारोह (1951) के 75 वर्ष (अमृत महोत्सव) भी इसी वर्ष पूरे हो रहे हैं।

मुख्य आकर्षण और कार्यक्रम

इस चार दिवसीय महोत्सव में अध्यात्म और आधुनिकता का अनूठा संगम देखने को मिला

  • अखंड ओंकार जाप –  प्रधानमंत्री मोदी के सुझाव पर ऋषिकुमारों द्वारा 72 घंटे तक निरंतर ‘ओंकार’ मंत्र का जाप किया गया, जिसका उद्देश्य विश्व शांति और मानवता का कल्याण था।
  • शौर्य यात्रा – 11 जनवरी को एक भव्य ‘शौर्य यात्रा’ निकाली गई, जिसमें 108 घोड़ों का काफिला शामिल था। यह उन वीर योद्धाओं (जैसे हमीरजी गोहिल और वेगड़ाजी भील) को श्रद्धांजलि थी जिन्होंने मंदिर की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए थे।
  • ड्रोन शो और लाइट शो – सोमनाथ के आकाश में सैकड़ों ड्रोन्स के माध्यम से मंदिर के विनाश और फिर से उठ खड़े होने की गाथा को दर्शाया गया।
  • विशेष ट्रेनें – देश के विभिन्न हिस्सों (अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा, राजकोट) से श्रद्धालुओं के लिए विशेष ‘स्वाभिमान स्पेशल’ ट्रेनें चलाई गईं।

मुख्य रूप से कौन-कौन हुआ सम्मिलित 

इस राष्ट्रीय उत्सव में देश की प्रमुख राजनीतिक और आध्यात्मिक हस्तियों ने शिरकत की

  • नरेंद्र मोदी (प्रधानमंत्री) –  सोमनाथ ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने मुख्य समारोह की अध्यक्षता की।
  • अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) –  उन्होंने इस आयोजन को ‘सनातन संस्कृति के अटूट विश्वास’ का पर्व बताया।
  • भूपेंद्र पटेल (मुख्यमंत्री, गुजरात) – गुजरात सरकार की ओर से व्यवस्थाओं का नेतृत्व किया।
  • सैकड़ों साधु-संत –  देशभर के विभिन्न अखाड़ों और संप्रदायों के प्रमुख संत इस पावन अवसर के साक्षी बने।
  • विशिष्ट अतिथि – कला, संस्कृति और इतिहास जगत के विद्वानों को भी आमंत्रित किया गया था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन – मुख्य बातें

प्रधानमंत्री ने अपने भाषण में सोमनाथ को “विनाश पर सृजन की विजय” का प्रतीक बताया। उनके संबोधन के मुख्य बिंदु थे-

“आतताइयों ने सोमनाथ को कई बार ढहाया, लेकिन वे हमारी आस्था को नहीं डिगा सके। 1026 का वह हमला भारत को मानसिक रूप से गुलाम बनाने की कोशिश थी, लेकिन आज 2026 में सोमनाथ की चमक बता रही है कि सत्य को कभी मिटाया नहीं जा सकता।”

विकसित भारत का संकल्प –  मोदी जी ने कहा कि जैसे सोमनाथ राख से उठकर फिर भव्य बना, वैसे ही भारत अपनी खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को वापस पाकर ‘विकसित भारत’ बनने की ओर अग्रसर है।

इतिहास से सीख – उन्होंने जोर दिया कि नई पीढ़ी को सोमनाथ के संघर्ष की कहानी जाननी चाहिए ताकि वे अपने ‘स्व’ (Self) और ‘स्वाभिमान’ पर गर्व कर सकें।

श्रद्धांजलि – उन्होंने सरदार पटेल, के.एम. मुंशी और डॉ. राजेंद्र प्रसाद को याद किया, जिन्होंने आधुनिक मंदिर के निर्माण के लिए राजनीतिक बाधाओं को पार किया था।

क्यों है यह पर्व हमारे लिए विशेष 

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व हर भारतीय के लिए विशेष है क्योंकि-

  • लचीलेपन का प्रतीक (Resilience) –  दुनिया में बहुत कम ऐसी सभ्यताएं हैं जो इतने आक्रमणों के बाद भी अपनी मूल पहचान के साथ जीवित हैं। सोमनाथ इसका जीवंत प्रमाण है।
  • सांस्कृतिक एकता – यह पर्व उत्तर से दक्षिण तक पूरे भारत को एक सूत्र में पिरोता है।
  • आत्मविश्वास का संचार-  यह याद दिलाता है कि चुनौतियां कितनी भी बड़ी क्यों न हों, अगर संकल्प दृढ़ हो तो पुनरुत्थान निश्चित है।
  • अतीत का सम्मान – यह उन गुमनाम नायकों को सम्मान देने का अवसर है जिन्होंने इतिहास के पन्नों में अपना लहू देकर इस ज्योतिर्लिंग की रक्षा की।

‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ केवल 1000 साल पुराने घावों को याद करने का दिन नहीं है, बल्कि यह उन घावों पर मिली जीत का उत्सव है। यह संदेश देता है कि भारत अब अपनी विरासत पर शर्मिंदा होने के बजाय, उसे सीने से लगाकर वैश्विक मंच पर अपना स्थान ले रहा है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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