डेलीबार्ता, इंदौर।मध्यप्रदेश के इंदौर क्षेत्र के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण हुई मौतों की दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। इस घटना के बाद राज्य सरकार और नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गया है। प्रदेशभर में पेयजल आपूर्ति और सीवरेज व्यवस्था की सघन जांच शुरू की गई, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही से जनहानि न हो। सरकार का स्पष्ट संदेश है कि नागरिकों को सुरक्षित, स्वच्छ और निर्बाध पेयजल उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
प्रदेशभर में लीकेज की पहचान और मरम्मत
भागीरथपुरा कांड के बाद शुरू की गई विशेष जांच के तहत प्रदेश की नगरीय निकायों में जल आपूर्ति लाइनों और सीवरेज नेटवर्क की गहन पड़ताल की गई। इस दौरान कुल 5,219 जल रिसाव (लीकेज) के स्थान चिन्हित किए गए। राहत की बात यह है कि इनमें से 4,893 लीकेज को दुरुस्त कर लिया गया है। शेष स्थानों पर भी तेजी से काम जारी है। अधिकारियों के अनुसार, लीकेज की वजह से सीवर का गंदा पानी पेयजल लाइनों में मिल जाने का खतरा बना रहता है, जिसे देखते हुए तत्काल सुधार कार्य कराए गए।
हर मंगलवार ‘जल सुनवाई’ से बढ़ी जवाबदेही
सरकार ने आम नागरिकों की समस्याओं को सीधे सुनने और त्वरित समाधान के लिए हर मंगलवार जल सुनवाई आयोजित करने का निर्णय लिया है। इस पहल का असर भी दिख रहा है। अब तक जल सुनवाई के माध्यम से 1,851 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से 1,732 शिकायतों का निराकरण कर दिया गया है। अधिकांश शिकायतें पानी की गुणवत्ता, बदबू, रंग बदलने, गंदे पानी की आपूर्ति और कम दबाव से संबंधित थीं। अधिकारियों का कहना है कि जल सुनवाई से न केवल समस्याएं सामने आ रही हैं, बल्कि संबंधित अमले की जवाबदेही भी तय हो रही है।
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ओवरहेड टैंकों की सफाई पर विशेष जोर
दूषित पानी की घटनाओं का एक बड़ा कारण लंबे समय से साफ न किए गए ओवरहेड टैंक भी होते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए प्रदेश के नगरीय निकायों में मौजूद 3,298 ओवरहेड टैंकों की जांच कराई गई। इनमें से 2,903 टैंकों की साफ-सफाई कराई जा चुकी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, टैंकों में जमा गाद, काई और गंदगी पानी की गुणवत्ता को प्रभावित करती है। नियमित सफाई से बैक्टीरिया और अन्य हानिकारक तत्वों की संभावना कम होती है।
ट्यूबवेल के पानी की जांच, 58 प्रदूषित बंद
ग्रामीण और शहरी इलाकों में बड़ी संख्या में ट्यूबवेल पेयजल का प्रमुख स्रोत हैं। सरकार ने 7,755 ट्यूबवेलों के पानी का परीक्षण कराया। जांच में 58 ट्यूबवेलों का पानी प्रदूषित पाया गया, जिसके बाद उन्हें तत्काल प्रभाव से बंद करा दिया गया। अधिकारियों के अनुसार, इन ट्यूबवेलों में बैक्टीरियल या रासायनिक प्रदूषण की आशंका थी, जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता था।
45,749 जल नमूनों की जांच
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने जानकारी दी कि प्रदेश की 413 नगरीय निकायों में पेयजल के 45,749 नमूनों की जांच की गई है। इनमें से 349 मामलों में जल प्रदूषित पाया गया। इन मामलों में से 96 पर आवश्यक कार्रवाई पूरी की जा चुकी है, जबकि शेष पर सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं।
आयुक्त ने स्पष्ट किया कि जल की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएम हेल्पलाइन पर आई शिकायतों का निराकरण
दूषित पानी से जुड़ी शिकायतें सीएम हेल्पलाइन (181) पर भी बड़ी संख्या में दर्ज की गईं। अधिकारियों के अनुसार, अब तक 515 शिकायतों का निराकरण किया जा चुका है। सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से मिली शिकायतों ने कई ऐसे क्षेत्रों को चिन्हित करने में मदद की, जहां पानी की गुणवत्ता लंबे समय से खराब थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसकी शिकायत दर्ज नहीं हो पा रही थी।
अमृत मित्र, केमिस्ट और प्रयोगशालाओं की भूमिका
जल गुणवत्ता की निगरानी के लिए प्रदेश में एक मजबूत तंत्र तैयार किया गया है। वर्तमान में 9,801 अमृत मित्र, 124 केमिस्ट और 845 प्रयोगशालाएं सक्रिय रूप से कार्यरत हैं। अमृत मित्र घर-घर जाकर पानी के नमूने एकत्र करते हैं, जबकि केमिस्ट और प्रयोगशालाएं इन नमूनों की वैज्ञानिक जांच करती हैं। इस व्यवस्था से जल परीक्षण की प्रक्रिया तेज और पारदर्शी हुई है।
15 से अधिक मानकों पर हो रही जांच
नागरिकों द्वारा दिए गए पानी के सैंपल्स की जांच 15 से अधिक मानकों पर की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से—
- रंग, स्वाद और गंध
- टरबीडिटी (धुंधलापन)
- पीएच मान
- टीडीएस (कुल घुलित ठोस पदार्थ)
- क्लोराइड
- कुल क्षारीयता
- कैल्शियम और मैग्नीशियम कठोरता
- रेसिडुअल क्लोरीन
- ई-कोलाई और कोलीफार्म जैसे खतरनाक बैक्टीरिया
विशेषज्ञों के अनुसार, ई-कोलाई और कोलीफार्म की मौजूदगी सीधे तौर पर सीवेज प्रदूषण की ओर इशारा करती है, जो गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकती है।
अधिकारियों का सख्त संदेश
नगरीय प्रशासन एवं विकास आयुक्त संकेत भोंडवे ने कहा कि प्रदेश के नागरिकों को बेहतर, सुरक्षित और निर्बाध जल व सीवर सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने साफ कहा कि जल की गुणवत्ता और सीवर व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी। मैदानी अमला लगातार निगरानी कर रहा है और जहां भी समस्या सामने आ रही है, वहां त्वरित कार्रवाई की जा रही है।
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नगरीय निकायों को स्पष्ट दिशा-निर्देश
सरकार ने सभी नगरीय निकायों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि पेयजल आपूर्ति, टैंक सफाई, लीकेज मरम्मत और शिकायतों के समाधान में किसी भी तरह की देरी न हो। साथ ही यह भी कहा गया है कि नियमित निरीक्षण और रिपोर्टिंग अनिवार्य होगी, ताकि किसी भी संभावित खतरे को समय रहते रोका जा सके।
नागरिकों से सहयोग की अपील
सरकार और प्रशासन ने नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। लोगों से कहा गया है कि यदि कहीं पानी की गुणवत्ता खराब लगे, बदबू आए, रंग बदला हुआ दिखे या सीवर का पानी मिलने की आशंका हो, तो तुरंत निर्धारित माध्यमों जल सुनवाई, सीएम हेल्पलाइन या स्थानीय निकाय के जरिए सूचना दें।
समय पर मिली जानकारी से प्रशासन को त्वरित और प्रभावी कार्रवाई करने में मदद मिलती है। इस घटना नें दिया संदेश, सीवरेज व्यवस्था में छोटी लापरवाही बन सकती है बड़े हादसे का कारण
इंदौर के भागीरथपुरा दूषित जल कांड ने यह स्पष्ट कर दिया कि पेयजल और सीवरेज व्यवस्था में छोटी-सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। इसी को देखते हुए प्रदेश सरकार ने व्यापक स्तर पर जांच, सुधार और निगरानी की प्रक्रिया शुरू की है।
लीकेज की मरम्मत, टैंकों की सफाई, ट्यूबवेल जांच, जल सुनवाई और नमूनों की वैज्ञानिक जांच जैसे कदम यह संकेत देते हैं कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है। आने वाले समय में इन प्रयासों से प्रदेश में सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल व्यवस्था को और मजबूत करने की उम्मीद की जा रही है।







