डेलीबार्ता,नई दिल्ली। स्वदेशी तकनीक (indigenous technology) से विकसित भारत के अत्याधुनिक हल्के लड़ाकू विमान तेजस (Tejas) से जुड़ी एक और दुर्घटना के बाद भारतीय वायुसेना (IAF) ने बड़ा और एहतियाती कदम उठाया है। हालिया हादसे के मद्देनजर वायुसेना (Air Force) ने लगभग 30 सिंगल-सीटर (Single-Seater) तेजस लड़ाकू विमानों की उड़ान पर फिलहाल रोक लगा दी है। यह फैसला पूरी तकनीकी जांच (Technical investigation) और सुरक्षा समीक्षा पूरी होने तक लागू रहेगा।
वायुसेना के इस कदम को सुरक्षा के प्रति सतर्कता (counter vigilance) और भविष्य में किसी भी संभावित जोखिम (potential risk) को रोकने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। घटना के बाद विशेषज्ञों की टीम द्वारा विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है, जिसमें विमान के तकनीकी सिस्टम, ऑपरेशनल प्रक्रियाओं और ब्रेकिंग मैकेनिज्म की गहन समीक्षा (in-depth review) की जा रही है।
रनवे से आगे निकलने के बाद हुआ था हादसा
समाचार एजेंसी (PTI) के मुताबिक, भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) का एक तेजस फाइटर जेट (Tejus Fighter Jet) इस महीने की शुरुआत में एक अग्रिम मोर्चे के एयरबेस (Airbase) पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, विमान के ब्रेक सिस्टम में संदिग्ध खराबी आने के कारण लैंडिंग के दौरान वह रनवे से आगे निकल गया।
इस घटना में विमान को गंभीर क्षति (serious damage) पहुंची, हालांकि पायलट ने समय रहते इजेक्शन सीट का उपयोग कर खुद को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। पायलट के सुरक्षित बच जाने से एक बड़ी जनहानि टल गई।
सूत्रों के अनुसार, विमान प्रशिक्षण (aircraft training) उड़ान पूरी कर बेस पर लौट रहा था, तभी यह हादसा हुआ। फिलहाल वायुसेना की ओर से आधिकारिक रूप से दुर्घटना के कारणों की पुष्टि नहीं की गई है।
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7 फरवरी घटना की जांच जारी
बताया जा रहा है कि यह दुर्घटना 7 फरवरी को हुई थी। घटना के बाद तकनीकी विशेषज्ञों (technical experts) और वायुसेना अधिकारियों की संयुक्त टीम ने जांच शुरू कर दी है। जांच का मुख्य फोकस यह पता लगाना है कि क्या ब्रेक फेल (Break Fail) होना तकनीकी खामी थी या किसी ऑपरेशनल कारण से यह स्थिति बनी।
वायुसेना आमतौर पर ऐसे मामलों में विस्तृत कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ( Court Of Inquiry) प्रक्रिया अपनाती है, जिसमें फ्लाइट डेटा, विमान के रखरखाव रिकॉर्ड पायलट की रिपोर्ट और तकनीकी सिस्टम (Technical Technical System)का विश्लेषण किया जाता है।
तीसरी घटना के बाद बड़ा फैसला
रिपोर्ट के अनुसार, यह तेजस लड़ाकू विमान (Tejas fighter aircraft) से जुड़ी तीसरी बड़ी दुर्घटना है। लगातार सामने आ रही घटनाओं को देखते हुए भारतीय वायुसेना ने एहतियातन सिंगल-सीटर तेजस विमानों (Single-seater Tejas aircraft) के पूरे बेड़े को अस्थायी रूप से ग्राउंड करने का निर्णय लिया है।
इस फैसले का उद्देश्य किसी संभावित तकनीकी समस्या (possible technical problem) की पहचान कर उसे पूरी तरह ठीक करना है, ताकि भविष्य में उड़ान संचालन सुरक्षित तरीके से जारी रखा जा सके। विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक लड़ाकू विमानों (modern fighter planes) में छोटी तकनीकी गड़बड़ी भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है, इसलिए व्यापक जांच जरूरी होती है।
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पूर्व भी हो चुके हैं तेजस हादसे
तेजस विमान (Tejas aircraft) से जुड़ी पहली बड़ी दुर्घटना मार्च 2024 में राजस्थान के जैसलमेर (Jaisalmer in Rajasthan) के पास हुई थी, जब एक फाइटर जेट क्रैश (fighter jet crash) हो गया था। उस समय भी जांच के आदेश दिए गए थे।
इसके बाद नवंबर 2025 में दुबई एयर शो (dubai air show) के दौरान प्रदर्शन उड़ान के समय तेजस विमान दुर्घटनाग्रस्त (tejas plane crash) हो गया था। यह हादसा अधिक गंभीर साबित हुआ, क्योंकि इसमें पायलट की जान चली गई थी। विमान निर्धारित एरोबेटिक अभ्यास (aerobatic exercises) के दौरान नियंत्रण खो बैठा था।
इन घटनाओं के बाद से तेजस की ऑपरेशनल सुरक्षा (Operational safety of Tejas) और तकनीकी विश्वसनीयता (Technical Reliability) को लेकर लगातार समीक्षा की जा रही है।
स्वदेशी रक्षा परियोजना के लिए अहम विमान (indigenous defense project)
तेजस भारत का स्वदेशी रूप से विकसित लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (Light Combat Aircraft) है, जिसे देश की रक्षा आत्मनिर्भरता (Self-reliance) का प्रतीक माना जाता है। यह विमान आधुनिक एवियोनिक्स (modern avionics), उच्च गतिशीलता (High Mobility) और उन्नत हथियार प्रणाली (advanced weapon systems) जैसी विशेषताओं से लैस है।
भारतीय वायुसेना (Indian Air Force) धीरे-धीरे पुराने हो रहे लड़ाकू विमानों की जगह तेजस (Tejus) को शामिल कर रही है। ऐसे में इस परियोजना की विश्वसनीयता और सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।
सुरक्षा को प्राथमिकता, उड़ान रोकना सामान्य प्रक्रिया
रक्षा विशेषज्ञों (Defense Experts) का कहना है कि किसी भी सैन्य विमान दुर्घटना के बाद पूरे बेड़े को अस्थायी रूप से ग्राउंड करना अंतरराष्ट्रीय स्तर (International Baccalaureate) पर अपनाई जाने वाली सामान्य सुरक्षा प्रक्रिया है। इससे संभावित तकनीकी खामी (Possible technical glitch) का समय रहते पता लगाया जा सकता है और आगे के जोखिम को रोका जा सकता है।
IAF का यह फैसला भी इसी दिशा में एक एहतियाती कदम (precautionary measures) माना जा रहा है, ताकि जांच पूरी होने तक किसी प्रकार की अनहोनी से बचा जा सके।
जांच रिपोर्ट पर टिकी आगे की रणनीति
अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट (Investigation Report) पर टिकी हुई है। यदि जांच में किसी तकनीकी खामी की पुष्टि होती है, तो संबंधित सिस्टम में सुधार या अपग्रेड किए जा सकते हैं। वहीं यदि घटना को अलग-थलग मामला पाया जाता है, तो विमानों की उड़ान फिर से शुरू कर दी जाएगी।
भारतीय वायुसेना (Indian Air force) ने स्पष्ट संकेत दिया है कि सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा और हर स्तर पर तकनीकी मानकों की समीक्षा की जाएगी।
तेजस (Tejus) भारत की रक्षा क्षमता को मजबूत करने वाली अहम परियोजना है, इसलिए इस जांच के निष्कर्ष न केवल वायुसेना बल्कि देश के स्वदेशी रक्षा कार्यक्रम के भविष्य के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।







