बैंकॉक (थाईलैंड)। भारतीय बैडमिंटन को एक नई सितारा खिलाड़ी मिल गई है। हरियाणा की युवा शटलर देविका सहाग ने प्रतिष्ठित थाईलैंड मास्टर्स सुपर 300 टूर्नामेंट का खिताब जीतकर न सिर्फ अपना पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय खिताब हासिल किया, बल्कि देश को भी गर्व का मौका दिया। अपने लंबे कद, तेज़ मूवमेंट और आक्रामक खेल शैली के कारण देविका को अब विश्व बैडमिंटन में एक उभरती हुई ताकत के रूप में देखा जा रहा है।
महिला एकल वर्ग के फाइनल मुकाबले में देविका का सामना मलेशिया की अनुभवी खिलाड़ी गोह जिन वेई से हुआ। पहले गेम में देविका ने शुरुआत से ही दबदबा बनाते हुए 21-8 से शानदार जीत दर्ज की। दूसरे गेम में भी उन्होंने 6-3 की बढ़त बना ली थी, तभी चोट के कारण गोह को मैच छोड़ना पड़ा। इसके साथ ही देविका को विजेता घोषित किया गया और उनका पहला सुपर 300 खिताब तय हो गया।
लंबी काया, लंबा हमला — देविका की खास पहचान
देविका सहाग की सबसे बड़ी ताकत उनका लंबा कद और दूर से किए जाने वाले तेज़ और सटीक हमले हैं। करीब 172 सेंटीमीटर लंबी देविका कोर्ट पर बड़ी आसानी से पूरे क्षेत्र को कवर करती हैं। उनके स्मैश में जबरदस्त ताकत होती है, वहीं नेट पर भी वह तेजी से नियंत्रण बना लेती हैं।
उनका खेल सिर्फ आक्रामक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। विरोधी खिलाड़ी को थकाने के लिए लंबी रैलियां खेलना, सही समय पर तेज वार करना और कोर्ट के कोनों में शटल भेजना — ये सब उनकी शैली का हिस्सा बन चुका है।
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पंचकुला से अंतरराष्ट्रीय मंच तक का सफर
देविका का जन्म हरियाणा के पंचकुला में हुआ। बचपन में उन्होंने स्थानीय स्तर पर बैडमिंटन खेलना शुरू किया था। शुरू में पढ़ाई और खेल के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं था, लेकिन जैसे-जैसे उनके खेल में निखार आया, परिवार ने उन्हें पूरा समर्थन दिया।
उनकी मां ने देविका की प्रतिभा को जल्दी पहचान लिया और बेहतर प्रशिक्षण के लिए उन्हें बेंगलुरु के पादुकोण-द्रविड़ सेंटर फॉर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस भेजा गया। यहां उन्हें अनुभवी कोचों के मार्गदर्शन में उच्च स्तरीय प्रशिक्षण मिला।
देविका को भारत की स्टार खिलाड़ी पी.वी. सिंधु के साथ भी अभ्यास करने का मौका मिला, जिससे उनके खेल में काफी सुधार आया। तकनीक, फिटनेस और मानसिक मजबूती — तीनों पहलुओं पर उन्होंने लगातार मेहनत की।
लगातार मेहनत का फल
थाईलैंड मास्टर्स की जीत देविका के करियर की पहली बड़ी सफलता जरूर है, लेकिन इसके पीछे वर्षों की मेहनत छिपी है। इससे पहले भी उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था।
2024 और 2025 के दौरान उन्होंने यूरोप और एशिया के कई छोटे-बड़े टूर्नामेंट जीते और उपविजेता भी रहीं। मलेशिया इंटरनेशनल में उनका पहला अंतरराष्ट्रीय खिताब आया, जबकि इंडोनेशिया मास्टर्स सुपर 100 में वह फाइनल तक पहुंचीं। इसके अलावा वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भारतीय टीम के साथ कांस्य पदक जीतकर भी उन्होंने अपनी क्षमता का परिचय दिया।
ऐतिहासिक उपलब्धि
देविका सहाग अब उन चुनिंदा भारतीय महिला खिलाड़ियों में शामिल हो गई हैं जिन्होंने सुपर 300 स्तर का खिताब जीता है। उनसे पहले यह कारनामा केवल सायना नेहवाल और पी.वी. सिंधु जैसी दिग्गज खिलाड़ी ही कर सकी थीं।
इस जीत से देविका की विश्व रैंकिंग में भी बड़ा सुधार होने की उम्मीद है, जिससे उन्हें भविष्य में बड़े टूर्नामेंट्स में सीधे प्रवेश मिलने का रास्ता आसान होगा।
कोच और खिलाड़ियों की सराहना
देविका की इस सफलता के बाद भारतीय बैडमिंटन जगत में खुशी की लहर है। उनके कोचों का कहना है कि देविका बेहद अनुशासित खिलाड़ी हैं और हर दिन अपने खेल को बेहतर बनाने के लिए मेहनत करती हैं।
स्टार खिलाड़ी पी.वी. सिंधु ने भी उनकी जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि देविका का सफर प्रेरणादायक है और आने वाले वर्षों में वह भारत के लिए बड़े खिताब जीत सकती हैं।
भविष्य की राह
हालांकि फाइनल मुकाबला चोट के कारण अधूरा रहा, लेकिन पूरे टूर्नामेंट में देविका का प्रदर्शन शानदार रहा। उन्होंने कई मजबूत खिलाड़ियों को हराकर फाइनल तक का सफर तय किया।
अब उनका अगला लक्ष्य लगातार अच्छे प्रदर्शन के जरिए विश्व बैडमिंटन में शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अपनी जगह बनाना है। आने वाले सत्र में वे और भी बड़े टूर्नामेंट्स में हिस्सा लेंगी, जहां उनसे बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है।







