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बनारस की विरासत और शाही शौक का संगम- नीता अंबानी की पसंदीदा‌ बनारसी साड़ियों की रानी रंगकाट साड़ी की अनकही कहानी

नीता अंबानी की पसंदीदा‌ बनारसी साड़ियों की रानी रंगकाट साड़ी की अनकही कहानी
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 17, 2026 1:49 अपराह्न
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नीता अंबानी का साड़ियों के प्रति प्रेम किसी से छिपा नहीं है। पारंपरिक भारतीय पहनावे को वैश्विक मंच पर गर्व के साथ पेश करने वाली नीता अंबानी जब भी किसी खास मौके पर नजर आती हैं, उनकी साड़ी चर्चा का विषय बन जाती है। कांजीवरम से लेकर पटोला, पैठणी से लेकर बनारसी उनकी अलमारी में भारत की लगभग हर प्रसिद्ध हथकरघा साड़ी मौजूद है। लेकिन इन सबके बीच एक साड़ी ऐसी है, जो उनकी खास पसंद मानी जाती है, जो है बनारस की रंगकाट साड़ी। 

यह साड़ी न सिर्फ खूबसूरत है, बल्कि इतनी दुर्लभ और महंगी भी है कि इसे खरीद पाना हर किसी के बस की बात नहीं। इसकी बुनावट, इसमें इस्तेमाल होने वाला असली सोना और इसे बनाने में लगने वाला समय सब कुछ इसे खास बनाता है।

क्या है रंगकाट साड़ी?

रंगकाट साड़ी बनारसी साड़ियों की सबसे दुर्लभ और जटिल किस्मों में गिनी जाती है। इसे अक्सर “बनारसी साड़ियों की रानी” कहा जाता है।

रंगकाट शब्द का अर्थ है दो अलग-अलग रंगों के तानों (warp) को काटकर, एक ही साड़ी में बुनना। यही इसकी सबसे बड़ी पहचान और खासियत है। इस साड़ी में बॉर्डर और पल्लू एक रंग में और पूरी साड़ी का बेस दूसरे रंग में बुना जाता है, और यह सब एक ही करघे पर हाथ से किया जाता है।

क्यों इतना मुश्किल है रंगकाट साड़ी बनाना?

रंगकाट साड़ी बनाना सामान्य बनारसी साड़ी से कहीं ज्यादा कठिन होता है। इसके लिए बुनकर को पहले करघे पर दो अलग-अलग रंगों के ताने चढ़ाने पड़ते हैं। फिर डिजाइन के अनुसार तानों को बीच-बीच में काटकर जोड़ा जाता है।

यह प्रक्रिया इतनी जटिल होती है कि एक छोटी सी गलती पूरी साड़ी खराब कर सकती है,इसे बनाने में केवल बेहद अनुभवी कारीगर ही सक्षम होते हैं। यही कारण है कि आज भी बहुत कम बुनकर रंगकाट साड़ी बनाने का जोखिम उठाते हैं।

कहां छिपा है असली सोना?

जब आप रंगकाट साड़ी को गौर से देखते हैं या कहें “जूम करके” तो आपको इसमें चमकता हुआ असली सोना और चांदी नजर आता है।

दरअसल, इस साड़ी में जो ज़री इस्तेमाल होती है, वह शुद्ध चांदी के तार जिन पर सोने की परत चढ़ाई जाती है उससे बनी होती है। यही ज़री साड़ी को वह शाही चमक देती है, जो नकली ज़री में संभव नहीं।

नीता अंबानी की रंगकाट साड़ियों में अक्सर‌भारी सोने की ज़री महीन जामदानी या मुगल-प्रेरित डिजाइन देखे जाते हैं।

कीमत क्यों छूती है आसमान?

रंगकाट साड़ी की कीमत उसकी बुनावट,ज़री की शुद्धता,कारीगर की मेहनत और डिजाइन की जटिलता पर निर्भर करती है। सामान्य तौर पर एक अच्छी रंगकाट साड़ी की कीमत लाखों रुपये से शुरू होकर कई बार 10–20 लाख रुपये या उससे भी अधिक तक जा सकती है। इसी वजह से यह साड़ी शाही परिवारों,बड़े उद्योगपतियों और कला-संग्राहकों तक ही सीमित रह जाती है।

नीता अंबानी को क्यों है रंगकाट साड़ी से खास लगाव?

नीता अंबानी न सिर्फ फैशन आइकन हैं, बल्कि भारतीय कला और हस्तशिल्प की संरक्षक भी मानी जाती हैं। उनका रंगकाट साड़ी पहनना यह दिखाता है कि वह विलासिता के साथ-साथ परंपरा और कारीगरी को भी उतनी ही अहमियत देती हैं। उनके द्वारा पहनी गई रंगकाट साड़ियां अक्सर बड़े धार्मिक आयोजनों,पारिवारिक समारोहों,और सांस्कृतिक अवसरों पर देखी गई हैं, जहां भारतीय परंपरा को प्रमुखता दी जाती है।

बनारस और रंगकाट साड़ी का ऐतिहासिक रिश्ता

बनारस (वाराणसी) सदियों से रेशम और ज़री के काम के लिए प्रसिद्ध रहा है। मुगल काल में रंगकाट साड़ियों को राजघरानों,नवाबों और रानियों द्वारा पहना जाता था। कहा जाता है कि पहले यह साड़ियां आम बाजार में नहीं मिलती थीं, बल्कि खास ऑर्डर पर बनाई जाती थीं।

कितना समय लगता है एक रंगकाट साड़ी बनने में?

एक रंगकाट साड़ी को बनने में न्यूनतम 3 से 6 महीने‌और कई बार 1 साल तक लग सकता है।

इस दौरान कई कारीगर दिन-रात पूरी एकाग्रता के साथ इस पर काम करते हैं।

आज के दौर में क्यों हो रही है रंगकाट साड़ी दुर्लभ?

आधुनिक मशीनों और सस्ती नकली ज़री के चलते,हाथ से बनी रंगकाट साड़ियों की मांग कम हुई है।‌युवा बुनकर इस जटिल कला से दूर होने लगे यही कारण है कि असली रंगकाट साड़ी आज गिनी-चुनी जगहों और सीमित कारीगरों द्वारा ही बनाई जाती है।

नीता अंबानी और भारतीय हथकरघा का संदेश

जब नीता अंबानी जैसी शख्सियत रंगकाट साड़ी पहनती हैं, तो वह सिर्फ फैशन स्टेटमेंट नहीं होता। यह एक संदेश होता है कि भारतीय हथकरघा जिंदा है, पारंपरिक कारीगरी आज भी उतनी ही मूल्यवान है। उनकी पसंद लाखों महिलाओं को पारंपरिक साड़ियों की ओर आकर्षित करती है।

बनारस की रंगकाट साड़ी केवल एक पहनावा नहीं, बल्कि हजारों धागों, महीनों की मेहनत और असली सोने की चमक से बुनी विरासत है। नीता अंबानी का इसे पहनना इस बात का प्रमाण है कि सच्ची शान दिखावे में नहीं, बल्कि परंपरा और कला के सम्मान में होती है। यही वजह है कि रंगकाट साड़ी को देखकर लोग हैरान रह जाते हैं और जूम करके देखने पर उसकी असली कीमत और खूबसूरती समझ में आती है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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