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थॉमस कप बैडमिंटन 2026: सेमीफाइनल में थमा भारत का सफर फ्रांस से 3-0 से हारकर कांस्य पदक

थॉमस कप बैडमिंटन 2026
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 3, 2026 3:33 अपराह्न
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हॉर्सेंस (डेनमार्क) भारतीय पुरुष बैडमिंटन टीम का थॉमस कप 2026 में शानदार अभियान सेमीफाइनल में आकर थम गया। फ्रांस के खिलाफ खेले गए मुकाबले में भारत को 0-3 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ भारत का खिताब बचाने का सपना टूट गया, लेकिन टीम ने टूर्नामेंट में कांस्य पदक जरूर हासिल किया। भारत ने 2022 में ऐतिहासिक खिताब जीता था और इस बार भी टीम से बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सेमीफाइनल में फ्रांस की मजबूत टीम के सामने भारतीय खिलाड़ी टिक नहीं सके।

लक्ष्य सेन की चोट ने बिगाड़ा खेल का समीकरण

भारतीय टीम की हार की सबसे बड़ी वजह स्टार खिलाड़ी लक्ष्य सेन का ऐन वक्त पर बाहर होना रहा। टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में लक्ष्य ने अपनी लय और आक्रामकता से विरोधियों को पस्त किया था, लेकिन सेमीफाइनल जैसे महत्वपूर्ण मुकाबले से ठीक पहले वे चोटिल हो गए। टीम प्रबंधन ने अंतिम समय तक इंतजार किया, लेकिन मेडिकल टीम ने उन्हें खेलने की अनुमति नहीं दी। लक्ष्य की अनुपस्थिति ने न केवल सिंगल्स वर्ग को कमजोर किया, बल्कि पूरी टीम के मनोबल पर भी असर डाला।

पहले मैच में दबाव का शिकार हुए आयुष शेट्टी

मुकाबले की शुरुआत पहले सिंगल्स मैच से हुई, जहां भारत की ओर से युवा आयुष शेट्टी कोर्ट पर उतरे। उनके सामने फ्रांस के अनुभवी और तेजतर्रार खिलाड़ी क्रिस्टो पोपोव की चुनौती थी। मैच की शुरुआत से ही आयुष थोड़े नर्वस नजर आए। पोपोव ने उनके इसी दबाव का फायदा उठाया और खेल के पहले मिनट से ही तेज स्मैश और नेट पर शानदार ड्रॉप शॉट्स का प्रदर्शन किया। आयुष ने बीच-बीच में कुछ अच्छे अंक बटोरे और वापसी की कोशिश की, लेकिन पोपोव ने उन्हें रैलियों में उलझाकर थकने पर मजबूर कर दिया। यह मैच सीधे गेमों में फ्रांस के पक्ष में रहा, जिससे भारत शुरुआती बढ़त हासिल करने में नाकाम रहा और 0-1 से पिछड़ गया।

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किदांबी श्रीकांत की हार ने बढ़ाई मुश्किलें

जब भारत एक मैच हार चुका था, तब अनुभवी किदांबी श्रीकांत से उम्मीद थी कि वे अपने अनुभव का इस्तेमाल कर बराबरी दिलाएंगे। श्रीकांत का सामना फ्रांस के उभरते सितारे एलेक्स लैनियर से था। श्रीकांत ने खेल की शुरुआत काफी सधी हुई की और एक समय ऐसा लग रहा था कि वे मैच पर पकड़ बना लेंगे। उन्होंने पहले गेम में कड़ी टक्कर दी, लेकिन खेल के आखिरी लम्हों में वे लैनियर की गति का मुकाबला नहीं कर पाए।लैनियर ने यह मैच जीतकर फ्रांस को 2-0 की अजेय बढ़त की ओर धकेल दिया।

एच एस प्रणय की आखिरी कोशिश भी रही नाकाम

तीसरे मैच में भारत की सारी उम्मीदें एच. एस. प्रणय पर टिकी थीं। इस खेल में प्रणय ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, लेकिन गेम के अंतिम अंकों पर फ्रांसीसी खिलाड़ी ने बाजी मार ली। दूसरे गेम में प्रणय थोड़े थके हुए और हताश नजर आए। जैसे-जैसे अंक बढ़ते गए, जीत भारत की मुट्ठी से फिसलती गई। अंततः प्रणय की हार के साथ ही फ्रांस ने 3-0 से मैच जीतकर फाइनल में जगह बना ली। भारत की विश्व प्रसिद्ध डबल्स जोड़ी सात्विक और चिराग को कोर्ट पर उतरने का मौका ही नहीं मिला क्योंकि मैच का फैसला पहले तीन सिंगल्स मुकाबलों में ही हो गया।

क्वार्टर फाइनल की जीत के बाद बढ़ गई थी उम्मीदें

भारत ने सेमीफाइनल से पहले क्वार्टर फाइनल में जिस तरह का प्रदर्शन किया था, उसे देखते हुए माना जा रहा था कि टीम स्वर्ण पदक की रक्षा आसानी से कर लेगी। क्वार्टर फाइनल में भारत ने चीन ताइपे जैसी दिग्गज टीम को 3-0 से हराकर बाहर कर दिया था। उस मुकाबले में सात्विक और चिराग की जोड़ी ने कमाल का तालमेल दिखाया था और लक्ष्य सेन ने भी निर्णायक जीत दर्ज की थी। लेकिन खेल की अनिश्चितता ने एक बार फिर सबको चौंका दिया। जो लय ताइपे के खिलाफ दिखी थी, वह फ्रांस के खिलाफ कहीं खो गई। 

कांस्य पदक: एक उपलब्धि और एक सबक

भले ही भारतीय टीम फाइनल की दौड़ से बाहर हो गई, लेकिन थॉमस कप जैसे विश्व स्तरीय टूर्नामेंट में कांस्य पदक जीतना कोई छोटी बात नहीं है। यह पदक भारतीय बैडमिंटन की बढ़ती ताकत का प्रतीक है। पिछले कुछ वर्षों में भारत ने बैडमिंटन में जो मुकाम हासिल किया है, उसे इस पदक ने और मजबूती दी है। हालांकि, स्वर्ण पदक की उम्मीद करने वाले प्रशंसकों के लिए यह थोड़ा निराशाजनक जरूर है, लेकिन खेल जगत में इसे भारत की निरंतरता के रूप में देखा जा रहा है। भारतीय खिलाड़ियों ने पूरे टूर्नामेंट में जिस तरह का जज्बा दिखाया, उसने दुनिया भर के बैडमिंटन प्रेमियों का दिल जीता है।

भारतीय बैडमिंटन का गौरव बरकरार

भारत का थॉमस कप 2026 का अभियान कांस्य पदक के साथ समाप्त हुआ।  टीम खिताब बचाने में नाकाम रही, लेकिन उन्होंने डेनमार्क की कोर्ट पर जिस तरह का संघर्ष किया, वह काबिले तारीफ है। कांस्य पदक के साथ वतन वापसी कर रही टीम इंडिया का स्वागत एक विजेता की तरह ही होना चाहिए, क्योंकि उन्होंने दुनिया की सर्वश्रेष्ठ टीमों के बीच अपनी जगह बनाई है। आने वाले समय में भारतीय बैडमिंटन से और भी सुनहरी यादों की उम्मीद की जा सकती है। खिलाड़ियों को अब इस हार को पीछे छोड़कर अगले लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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