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ट्रंप का वेनेजुएला पर एक और फरमान- चीन, रूस, ईरान और क्यूबा की खत्म करो दोस्ती 

ट्रंप का वेनेजुएला पर एक और फरमान
नवजोत कौर सिद्धू
On: जनवरी 7, 2026 2:50 अपराह्न
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​ट्रंप का वेनेजुएला पर एक और फरमान-जनवरी 2026 की शुरुआत दुनिया के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं थी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व (Operation Absolute Resolve) के तहत न केवल वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार करवाया बल्कि उसके तुरंत बाद एक ऐसा कड़ा फरमान जारी किया जिसने दक्षिण अमेरिका से लेकर बीजिंग और मॉस्को तक हड़कंप मचा दिया है। 

ट्रंप का यह फरमान  

वेनेजुएला को चीन रूस ईरान और क्यूबा से अपने सभी संबंध तुरंत समाप्त करने होंगे अन्यथा उसे और भी गंभीर सैन्य और आर्थिक परिणामों का सामना करना पड़ेगा। ​यह केवल एक द्विपक्षीय मुद्दा नहीं है बल्कि यह 21वीं सदी के शीत युद्ध का एक नया और आक्रामक अध्याय है।

​ट्रंप का फरमान –  मुख्य बिंदु और माँगें

​व्हाइट हाउस और मार-ए-लागो से जारी बयानों के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने वेनेजुएला की कार्यवाहक सरकार Interim Authorities और वहां के सैन्य नेतृत्व के सामने कुछ शर्तें रखी हैं

  • विदेशी शक्तियों का निष्कासन-वेनेजुएला की धरती से चीन रूस ईरान और क्यूबा के सभी सैन्य सलाहकारों खुफिया एजेंटों और तकनीकी विशेषज्ञों को तुरंत बाहर निकाला जाए।
  • आर्थिक संबंधों पर पूर्ण रोक –इन देशों के साथ तेल खनिज और अन्य व्यापारिक लेन-देन को पूरी तरह बंद कर दिया जाए।
  • अमेरिकी तेल प्रभुत्व-वेनेजुएला के तेल भंडारों का प्रबंधन अमेरिका की देखरेख में होगा। ट्रंप ने स्पष्ट कहा है कि वेनेजुएला का तेल अमेरिकी हितों और वेनेजुएला के पुनर्निर्माण के लिए इस्तेमाल किया जाएगा न कि अमेरिकी विरोधियों को मजबूत करने के लिए।
  • ऋण अदायगी और नियंत्रण-चीन और रूस द्वारा वेनेजुएला को दिए गए अरबों डॉलर के कर्ज के बदले जो संपत्तियां तेल क्षेत्र गिरवी रखी गई थीं ट्रंप प्रशासन उन्हें अमान्य घोषित करने की दिशा में बढ़ रहा है।

​चीन, रूस, ईरान और क्यूबा – इन चार देशों से दुश्मनी क्यों

​ट्रंप का मानना है कि ये चार देश वेनेजुएला के माध्यम से अमेरिका के बैकयार्ड पिछवाड़े में अस्थिरता फैला रहे हैं।

  • चीन- आर्थिक निवेश और रणनीतिक पकड़ –चीन वेनेजुएला का सबसे बड़ा लेनदार रहा है। भारी कर्ज देकर चीन ने वेनेजुएला के तेल बुनियादी ढांचे पर अपनी पकड़ बनाई थी। ट्रंप का तर्क है कि चीन वेनेजुएला के संसाधनों का शोषण कर रहा है और इसे अमेरिकी प्रभाव को कम करने के लिए एक आर्थिक आधार के रूप में इस्तेमाल कर रहा है।
  • रूस –  सैन्य उपस्थिति और हथियारों का बाजार-​रूस ने मादुरो शासन को न केवल राजनीतिक समर्थन दिया बल्कि सैन्य सुरक्षा और आधुनिक हथियार भी प्रदान किए। ट्रंप प्रशासन के अनुसार रूस की उपस्थिति मुनरो सिद्धांत Monroe Doctrine का उल्लंघन है जो कहता है कि पश्चिमी गोलार्ध में बाहरी शक्तियों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
  • ईरान-  तेल और प्रतिबंधों को धता बताने वाला गठजोड़-​ईरान और वेनेजुएला दोनों पर अमेरिकी प्रतिबंध होने के कारण दोनों ने एक-दूसरे की मदद की है। ईरान ने वेनेजुएला को ईंधन और तकनीकी सहायता भेजी जबकि वेनेजुएला ने बदले में ईरान को सोना और अन्य संसाधन दिए। ट्रंप इस प्रतिबंधित देशों के क्लब को पूरी तरह खत्म करना चाहते हैं।
  • क्यूबा – खुफिया और सुरक्षा कवच-क्यूबा के हजारों सुरक्षा और खुफिया कर्मी वेनेजुएला में मौजूद रहे हैं जो मादुरो सरकार की रक्षा करते थे। ट्रंप का मानना है कि क्यूबा ही वेनेजुएला में समाजवाद का जहर फैला रहा है और जब तक क्यूबा वहां से बाहर नहीं होता वेनेजुएला कभी आजाद नहीं हो सकता।

​आर्थिक स्थिति और तेल की राजनीति

​वेनेजुएला के पास दुनिया का सबसे बड़ा तेल भंडार लगभग 300 अरब बैरल है। ट्रंप का यह नया आदेश सीधे तौर पर वैश्विक तेल बाजार को नियंत्रित करने की कोशिश है।

  • बाजार पर प्रभाव-ट्रंप ने घोषणा की है कि वेनेजुएला के पास मौजूद 3 से 5 करोड़ बैरल तेल अमेरिका को सौंपा जाएगा ताकि उसे बाजार मूल्य पर बेचकर वेनेजुएला की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाया जा सके।
  • लेन-देन पर रोक-ट्रंप ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई देश या कंपनी इन चार प्रतिबंधित देशों के साथ वेनेजुएला के माध्यम से व्यापार करती है, तो उस पर सेकेंडरी प्रतिबंधnSecondary Sanctions लगाए जाएंगे। इसका मतलब है कि उसे अमेरिकी वित्तीय प्रणाली से बाहर कर दिया जाएगा।

​सख्त कदम की चेतावनी – क्या युद्ध होगा

​ट्रंप ने बार-बार कहा है कि सभी विकल्प मेज पर हैं। उनके सख्त कदम में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं

  • पूर्ण नौसैनिक नाकाबंदी (Naval Blockade)-वेनेजुएला के बंदरगाहों को अमेरिकी नौसेना द्वारा घेरना ताकि कोई भी चीनी या रूसी जहाज वहां न पहुंच सके।
  • सीमित सैन्य हवाई हमले-यदि सैन्य अड्डों से विदेशी तत्व बाहर नहीं निकलते तो अमेरिका वहां लक्षित हमले कर सकता है।
  • संपत्ति की जब्ती-विदेशों में जमा वेनेजुएला की सभी संपत्तियों को पूरी तरह से अमेरिका के नियंत्रण में लेना।

​वैश्विक प्रतिक्रिया और चुनौतियां

​इस फरमान ने दुनिया को दो गुटों में बांट दिया है

  • समर्थक-अमेरिका के करीबी सहयोगी और लैटिन अमेरिका के कुछ दक्षिणपंथी देश इस कदम को लोकतंत्र की बहाली मान रहे हैं।
  • विरोधी-चीन और रूस ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन और अपहरण करार दिया है। ईरान ने इसे अमेरिकी दादागिरी कहा है जबकि क्यूबा ने इसे साम्राज्यवादी आक्रामकता बताया है।

​भारत के लिए चुनौती

​भारत के लिए यह स्थिति पेचीदा है। रूस भारत का पुराना मित्र है और वेनेजुएला भारत के लिए तेल का एक प्रमुख स्रोत रहा है। अमेरिका के इस कड़े रुख के कारण भारत को अपने ऊर्जा हितों और कूटनीतिक संतुलन को बनाए रखने में भारी मशक्कत करनी पड़ सकती है।

​क्या वेनेजुएला महान बनेगा

​ट्रंप का नारा है – “Make Venezuela Great Again”

लेकिन सवाल यह है कि क्या विदेशी संबंधों को पूरी तरह काटकर और अमेरिकी नियंत्रण में रहकर कोई देश मजबूत हो सकता है यदि ट्रंप का यह प्रयोग सफल रहता है तो यह दुनिया के अन्य देशों के लिए एक मिसाल बनेगा कि अमेरिका के विरोधियों के साथ दोस्ती की कीमत क्या हो सकती है।

​हालांकि चीन और रूस जैसे देश इतनी आसानी से पीछे नहीं हटेंगे। आने वाले महीने यह तय करेंगे कि वेनेजुएला विकास की नई ऊंचाइयों को छूता है या महाशक्तियों के बीच छिड़े युद्ध का मैदान बन जाता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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