डेलीबार्ता।
देश के अलग अलग इलाकों में मनाये जानें वाले ऐसे कई प्रमुख त्यौहार है जिनका विशेष महत्व व पारंपरिक मान्यताएं हैं, इन्ही त्यौहारों में से एक है उगादी का त्यौहार जो मुख्य रुप से आंध्र प्रदेश, कर्नाटक व तेलंगाना में मनाया जाता है, इस पर्व की जहां विशेष धार्मिक मान्यता हैं वहीं इन प्रदेशों में उगादी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है, तो चलिये आपको बताते हैं कि आखिर उगादी का पर्व कैसे मनाया जाता है और इस पर्व के पीछे की मान्यताएं क्या है?
एक “युग” की शुरुआत है “उगादी”
दरअसल युगादी के यदि शाब्दिक अर्थों में जायें तो यह नववर्ष के पंचाग के शुरुआत का वह दिन है उसके प्रारंभ को दर्शाता है। उगादी जिसे युगादी भी कहते हैं वह हिंदू पंचाग के अनुसार नववर्ष के का वह प्रारंभिक दिन होता है,जिससे वर्ष की शुरुआत होती है। प्रमुख रुप से उगादी तेलंगाना, कर्नाटक व आंध्रप्रदेश में बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।
उगादी के शाब्दिक अर्थों को देखा जाये तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है। युग और आदि युग और आदि (शुरुआत) जिसका मूल अर्थ नये युग की शुरुआत है। यह चैत्र महीनें शुक्ल प्रतिपदा जो कि कैलंडर के अनुसार मार्च – अप्रैल महीनें में पड़ता है मनाया जाता है। विशेष रुप से इस वर्ष को (New Moon) नवचंद्रमा के आधार पर निर्धारित किया जाता है़।
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उगादी एक विशेष पर्व
तेलंगाना, कर्नाटक, और आंध्रप्रदेश में वर्ष के प्रथम दिन उगादी या युगादी पर्व विशेष रूप से मनाया जाता है। इस दिन नवीन संवत्सर की शुरुआत होती है। ‘संवत्सर’ का अर्थ होता है वर्ष (year), यह प्राचीन भारतीय कैलेंडर सिस्टम का एक हिस्सा था, जिसमें 60 वर्षों का एक चक्र था, और प्रत्येक वर्ष का नाम था (जैसे, प्रभव, विभव, आदि), जिसे ‘वर्ष’ कहा जाता था। यह हिंदू पंचांग का हिस्सा था, जो आमतौर पर चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा (नव संवत्सर) से शुरू होकर 12 महीने का होता है। और सभी साठ संवत्सर अपने एक विशेष नाम से जाने जाते हैं।
महाराष्ट्र में उगादी का उत्सव “गुडी पड़वा”
उगादी का पर्व महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा के रूप में मनाया जाता है। इन दोनों उत्सवों का आयोजन एक ही दिन होता है। चन्द्र-सौर कैलेंडर के अनुसार, उगादी को नववर्ष का प्रारंभ माना जाता है। यह कैलेंडर चन्द्रमा और सूर्य की स्थितियों के आधार पर साल को महीनों और दिनों में बांटता है। वहीं, एक अन्य कैलेंडर, जिसे सौर कैलेंडर कहा जाता है, केवल सूर्य की स्थिति को ध्यान में रखता है। इसी वजह से हिन्दू नववर्ष को दो भिन्न-भिन्न नामों से तथा वर्ष के दो भिन्न-भिन्न समय पर मनाया जाता है। सौर कैलेण्डर पर आधारित हिन्दु नववर्ष को उड़ीसा में पणा, पंजाब में बैसाखी, तमिलनाडु में पुथन्डु,असम में बिहू, संक्रान्ति तथा पश्चिम बंगाल में नब बरस के नाम से जाना जाता है।
अनुष्ठानिक तेल स्नान से शुरुआत
उगादी उत्सव के दिन का आरम्भ अनुष्ठानिक तेल-स्नान से होता है, जिसके पश्चात प्रार्थना की जाती है। ‘अनुष्ठानिक’ (Ritual/Ceremonial) का अर्थ है अनुष्ठान, यज्ञ, पूजा-पाठ या धार्मिक विधियों से संबंधित। यह शब्द उन क्रियाओं, व्यवहारों या आयोजनों को दर्शाता है जो एक निश्चित नियम, पैटर्न और परंपरा के अनुसार पवित्र उद्देश्यों के लिए की जाती हैं। यह सांस्कृतिक, सामाजिक या आध्यात्मिक महत्व को व्यक्त करता है। शास्त्रों के अनुसार, तेल-स्नान तथा नीम के पत्तों का सेवन करना एक अत्यन्त महत्वपूर्ण अनुष्ठान है। उत्तर भारतीय भक्तगण, उगादी उत्सव नहीं मनाते हैं, किन्तु वह इस दिन से नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि पूजन आरम्भ करते हैं, जिसके प्रथम दिवस पर मिश्री के साथ नीम का सेवन किया जाता है।
जानिये पौराणिक मान्यताएं
कहते हैं कि इसी दिन भगवान ब्रह्मा ने इस दुनिया की रचना की थी, इसलिए लोग इसे सृष्टि की शुरुआत का प्रतीक मानते हैं। उगादि के दिन घरों को आम के पत्तों से सजाते हैं, खास पूजा करते हैं, और नए इरादे बनाते हैं। इस मौके पर उगादि पचड़ी जरूर बनती है — इसमें मीठा, खट्टा, कड़वा, तीखा, नमकीन और कसैला, ये छह तरह के स्वाद होते हैं। इन स्वादों को जिंदगी के अलग-अलग अनुभवों का प्रतीक मानते हैं, जैसे कि हर खुशी, दुख, कड़वाहट या हैरानी को खुले दिल से अपनाना चाहिए। लोग नए कपड़े पहनते हैं, परिवार और दोस्तों के साथ त्योहार को खुलकर मनाते हैं — ये सच में एक नए दौर की शुरुआत जैसा होता है।
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2026 में उगादी
हिंदू पंचांग के हिसाब से युगादी चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को मनाते हैं। जरूरी है कि प्रतिपदा तिथि सूर्योदय के वक्त हो। अगर प्रतिपदा दो दिनों के सूर्योदय पर पड़ रही है तो त्योहार पहले दिन ही मनाया जाएगा। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि प्रतिपदा सूर्योदय के समय नहीं आती—ऐसे में जिस दिन तिथि शुरू हुई, उसी दिन त्योहार मनाया जाता है। युगादी कभी भी अधिक मास में नहीं मनाते, ये सिर्फ शुद्ध चैत्र माह में ही मनाया जाता है।
2026 में प्रतिपदा 19 मार्च को सुबह 6:55:41 बजे शुरू होगी और 20 मार्च को सुबह 4:54:54 बजे खत्म हो जाएगी। तेलुगू संवत्सर 2083 का नाम सिद्धार्थी है। नवसंवत्सर के पहले दिन का जो स्वामी होता है, उसे पूरे साल का स्वामी मानते हैं। इस बार 2083 का पहला दिन गुरुवार है, यानी बृहस्पति का दिन। तो, इस साल के स्वामी भी बृहस्पति होंगे।
सीधा कहें तो, 2026 में उगादी 19 मार्च को मनाया जाएगा।







