अमेरिकी संसद के उच्च सदन यानी सीनेट ने ईरान में जारी सैन्य टकराव और युद्ध जैसी स्थितियों पर नियंत्रण लगाने के उद्देश्य से ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ (War Powers Resolution) को आगे बढ़ाने के पक्ष में मतदान किया है। यह कदम राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन द्वारा बिना कांग्रेस (संसद) की औपचारिक अनुमति के ईरान के खिलाफ शुरू की गई सैन्य कार्रवाइयों को रोकने और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ जैसी सैन्य रणनीतियों पर संसदीय जवाबदेही तय करने के लिए उठाया गया है।
मतदान की वर्तमान स्थिति और प्रक्रियात्मक वोटिंग
सीनेट में इस प्रक्रियात्मक प्रस्ताव (Procedural Vote) को 50-47 के करीबी अंतर से मंजूरी मिली। अमेरिकी सीनेट के इतिहास में यह आठवां ऐसा प्रयास था जब विपक्ष (डेमोक्रेट्स) इस युद्ध शक्तियों से जुड़े प्रस्ताव को सीनेट की समिति से निकालकर मुख्य पटल पर चर्चा और पूर्ण मतदान के लिए आगे बढ़ाने में सफल रहा है।
इस मतदान में खास बात यह रही कि राष्ट्रपति ट्रम्प की अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के 4 सांसदों (सीनेटर्स) ने अपनी पार्टी लाइन से अलग जाकर राष्ट्रपति की नीतियों के खिलाफ मतदान किया। इन चार रिपब्लिकन सांसदों के नाम निम्नलिखित हैं:
- रैंड पॉल (Rand Paul – केंटकी)
- सुसान कोलिन्स (Susan Collins – मेन)
- लीजा मर्कोव्स्की (Lisa Murkowski – अलास्का)
- बिल कैसिडी (Bill Cassidy – लुइसियाना)
पार्टी से बगावत का कारण – हाल ही में प्राइमरी चुनाव हार चुके लुइसियाना के सीनेटर बिल कैसिडी और अन्य बागी सांसदों का मानना है कि व्हाइट हाउस और पेंटागन (अमेरिकी रक्षा मंत्रालय) ने ईरान सैन्य अभियान को लेकर संसद को पूरी तरह से अंधेरे में रखा है। अमेरिकी संविधान के तहत युद्ध की घोषणा करने या उसे वित्तीय मंजूरी देने का अधिकार केवल संसद (कांग्रेस) के पास है, जबकि राष्ट्रपति प्रशासन ने इस मोर्चे पर पारदर्शिता नहीं दिखाई है।
इसके विपरीत, डेमोक्रेटिक पार्टी के सीनेटर जॉन फेटरमैन एकमात्र ऐसे डेमोक्रैट रहे जिन्होंने अपनी पार्टी के रुख के खिलाफ जाकर इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया। वहीं तीन रिपब्लिकन सांसद इस मतदान के दौरान अनुपस्थित रहे।
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पारित होने की स्थिति और आगे की राह
इस प्रक्रियात्मक वोटिंग में जीत हासिल करने का मतलब यह नहीं है कि यह प्रस्ताव कानून बन गया है। यह केवल एक प्रारंभिक सफलता है। पूर्ण रूप से प्रभावी होने के लिए इसे निम्नलिखित चरणों से गुजरना होगा
- सीनेट में अंतिम मतदान – अभी इस प्रस्ताव पर सीनेट के भीतर पूरी बहस होगी, जिसके बाद इस पर अंतिम वोटिंग (Final Floor Vote) कराई जाएगी।
- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (निचला सदन) – सीनेट से पारित होने के बाद इस प्रस्ताव को अमेरिकी संसद के निचले सदन (प्रतिनिधि सभा) में भेजा जाएगा। निचले सदन में भी इसे साधारण बहुमत से पारित होना अनिवार्य होगा।
- सीजफायर का कानूनी पेंच – ट्रम्प प्रशासन का तर्क है कि ईरान के साथ फिलहाल एक अस्थायी संघर्ष विराम (Ceasefire) चल रहा है, इसलिए 1973 के वॉर पावर्स एक्ट के तहत तय की गई 60 दिनों की समयसीमा (जिसके भीतर राष्ट्रपति को सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए संसद की मंजूरी लेनी होती है) का उल्लंघन नहीं हुआ है। हालांकि, कानूनी विशेषज्ञ और सांसद इस तर्क को खारिज कर रहे हैं।
राष्ट्रपति का वीटो अधिकार और इसका प्रभाव
यदि यह ‘वॉर पावर्स रेजोल्यूशन’ अमेरिकी संसद के दोनों सदनों (सीनेट और प्रतिनिधि सभा) से सफलतापूर्वक पारित हो भी जाता है तो भी इसका कानून बनना तय नहीं है। अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था के तहत राष्ट्रपति के पास ‘वीटो’ (Veto Power) का विशेषाधिकार होता है।
राष्ट्रपति का वीटो अधिकार क्या है?
अमेरिकी संविधान के अनुच्छेद 1, धारा 7 के तहत, कांग्रेस द्वारा पारित किसी भी विधेयक या प्रस्ताव को कानून बनने से पहले राष्ट्रपति के पास हस्ताक्षर के लिए भेजा जाता है। यदि राष्ट्रपति उस नीति या प्रस्ताव से असहमत हैं, तो वे उसे खारिज (वीटो) कर सकते हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प इस प्रस्ताव पर निश्चित रूप से अपने वीटो अधिकार का इस्तेमाल करेंगे।
क्या राष्ट्रपति के वीटो को पलटा जा सकता है?
हाँ, अमेरिकी संविधान संसद को राष्ट्रपति के वीटो को पलटने (Veto Override) की शक्ति देता है लेकिन इसकी प्रक्रिया बेहद कठिन है
- राष्ट्रपति के वीटो को निष्प्रभावी करने के लिए संसद के दोनों सदनों (सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) में दो-तिहाई (2/3) का भारी बहुमत होना आवश्यक है।
- वर्तमान राजनीतिक गणित को देखते हुए डेमोक्रेट्स और कुछ बागी रिपब्लिकन मिलकर भी सीनेट और निचले सदन में दो-तिहाई का आंकड़ा (67% वोट) जुटाने की स्थिति में नहीं हैं।
सीनेट में हुआ यह मतदान भले ही अंततः राष्ट्रपति ट्रम्प के वीटो के कारण कानून का रूप न ले पाए, लेकिन यह राजनीतिक और कूटनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण है। यह दिखाता है कि बिना विधायी अनुमति के चलाए जा रहे युद्धों और बढ़ती तेल की कीमतों को लेकर खुद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है। यह प्रस्ताव राष्ट्रपति की असीमित सैन्य शक्तियों पर अंकुश लगाने और अमेरिकी विदेश नीति में संसद की सर्वोच्चता को बहाल करने के एक बड़े प्रतीक के रूप में उभरा है।







