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Weather Changes In India- 17 राज्यों में आंधी ओले और बर्फबारी का तांडव ओलावृष्टि का संकट

Weather Changes In India- 17 राज्यों में आंधी ओले और बर्फबारी का तांडव ओलावृष्टि का संकट
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 21, 2026 6:00 अपराह्न
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भारत इस समय एक विशिष्ट मौसमी चक्र से गुजर रहा है। मार्च 2026 की शुरुआत में जहाँ पूरा देश भीषण गर्मी और ‘लू’ (Heatwave) जैसी स्थिति का सामना कर रहा था अब पिछले 24 घंटों में देश के 17 से अधिक राज्यों में मौसम ने ऐसी करवट ली है कि कहीं धूल भरी आंधी चल रही है, तो कहीं ओलावृष्टि ने फसलों को सफेद चादर से ढक दिया है। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी की है कि अगले 48 घंटों तक हवाओं की गति 60 किमी/घंटा से अधिक रह सकती है।

लू के बाद अचानक यह बदलाव क्यों आया? (वैज्ञानिक कारण)

​मौसम विशेषज्ञों और भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार इस अचानक बदलाव के मुख्य रूप से दो कारण हैं

​अति-शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ (Intense Western Disturbance)

​मार्च के पहले पखवाड़े में पश्चिमी विक्षोभ (WD) की अनुपस्थिति के कारण उत्तर भारत में सूखी गर्मी बढ़ गई थी। लेकिन 17 मार्च की रात से एक अत्यधिक तीव्र पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हुआ। यह एक ‘ट्रफ’ (कम दबाव की रेखा) के रूप में आया है जिसने भूमध्य सागर से नमी लेकर हिमालयी क्षेत्रों और मैदानी इलाकों में हलचल मचा दी।

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​हवाओं का मिलन (Wind Confluence)

​इस समय बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम पूर्वी हवाएं और उत्तर-पश्चिम से आने वाली ठंडी हवाएं मध्य भारत (एमपी, राजस्थान) के ऊपर मिल रही हैं। जब विपरीत स्वभाव की हवाएं मिलती हैं, तो गरज-चमक के साथ ओलावृष्टि (Hailstorm) और तेज आंधी की स्थिति बनती है।

उन 17 राज्यों की सूची जहाँ अलर्ट जारी किया गया है

​भारतीय मौसम विभाग ने जिन राज्यों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि का अलर्ट (Yellow & Orange Alert) जारी किया है वे निम्नलिखित हैं

क्षेत्रराज्य/केंद्र शासित प्रदेश
उत्तर भारतजम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-NCR, उत्तर प्रदेश, राजस्थान
मध्य भारतमध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़
पूर्वी भारतबिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा
पूर्वोत्तर भारतअसम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम

पहाड़ी राज्यों का हाल – बर्फ की सफेद चादर

​उत्तर भारत के पहाड़ी क्षेत्रों जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कुदरत का अलग ही रूप देखने को मिल रहा है।

  • भारी बर्फबारी – पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने के कारण ऊचाई वाले इलाकों में भारी हिमपात हुआ है। इसके चलते कई राष्ट्रीय राजमार्ग बंद कर दिए गए हैं।
  • तापमान में गिरावट – बर्फबारी के कारण इन राज्यों के निचले इलाकों में कड़ाके की ठंड लौट आई है, जिससे पर्यटन में तो इजाफा हुआ है लेकिन स्थानीय परिवहन ठप है।

​ मैदानी इलाकों में हलचल –  दिल्ली-NCR, यूपी और बिहार

​मैदानी राज्यों में मौसम ने राहत और आफत दोनों साथ 

  • दिल्ली-NCR – दिल्ली में 60 किमी/घंटा तक की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और गरज के साथ बारिश ने पारा 4 से 6 डिग्री तक गिरा दिया है। जो तापमान 35°C पार कर चुका था, वह अब 28°C के आसपास आ गया है।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार –  इन राज्यों में आसमान में काले बादलों का डेरा है। हल्की से मध्यम बारिश के साथ ठंडी हवाओं ने बढ़ते तापमान पर लगाम लगा दी है, जिससे लोगों को गर्मी से बड़ी राहत मिली है।

​मध्य भारत का संकट –  एमपी और राजस्थान में ओलावृष्टि

​इन दोनों राज्यों में सबसे ज्यादा ओलावृष्टि देखी गई है। ग्वालियर, चंबल और राजस्थान के पूर्वी जिलों में चने के आकार के ओले गिरे हैं जिससे फसलों को नुकसान पहुँचा है लेकिन गर्मी से भारी राहत मिली है।

  • ओलों की बारिश –  राजस्थान के कई जिलों और मध्य प्रदेश के मालवा-निमाड़ क्षेत्र में चने के आकार के ओले गिरे हैं।
  • कृषि पर प्रभाव –  ओलावृष्टि ने पककर तैयार खड़ी फसलों (जैसे गेहूं, सरसों और धनिया) को भारी नुकसान पहुँचाया है। किसान इस अप्रत्याशित बदलाव से चिंतित हैं।

​मौसमी बदलाव के मुख्य कारण और  प्रभाव

क्षेत्रमुख्य मौसमी घटनाहवा की गतिप्रभाव
उत्तर पर्वतीयभारी बर्फबारी30-40 किमी/घंटामार्ग अवरुद्ध, शीतलहर
उत्तर मैदानीहल्की बारिश / आंधी50-60 किमी/घंटातापमान में गिरावट
मध्य भारततीव्र ओलावृष्टि60+ किमी/घंटाफसलों का नुकसान

वैज्ञानिक दृष्टिकोण –  क्यों बदला मौसम?

​इस अचानक बदलाव के पीछे मुख्य कारण शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ का भूमध्य सागर से उठकर भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आना है। जब यह ठंडी हवाएं अरब सागर से आने वाली नमीयुक्त गर्म हवाओं से मिलती हैं, तो अस्थिरता पैदा होती है। इसी का परिणाम कपासी-वर्षी मेघ (Cumulonimbus clouds) के रूप में निकलता है, जो भारी आंधी और ओलावृष्टि के लिए जिम्मेदार होते हैं।

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​आम जनजीवन और स्वास्थ्य पर असर

​जहाँ एक ओर बढ़ते तापमान से जूझ रहे लोगों ने इस ठंडक में “चैन की सांस” ली है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। अचानक तापमान गिरने से वायरल बुखार और श्वसन संबंधी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

सावधानी – 

  • आंधी के दौरान –  बिजली के खंभों और पेड़ों के नीचे शरण न लें। तेज हवाओं के दौरान घर के अंदर रहना ही सुरक्षित है।
  • किसानों के लिए –  कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर रखें और सिंचाई को फिलहाल रोक दें।
  • पर्यटकों के लिए –  उत्तराखंड और हिमाचल की यात्रा करने वाले लोग मौसम विभाग की अपडेट देखकर ही आगे बढ़ें।

​यह मौसम का मिजाज अगले 48 से 72 घंटों तक इसी तरह बना रह सकता है।वही 17 राज्यों में अलर्ट जारी है हालाँकि इस बारिश ने बढ़ती गर्मी से ‘चैन की सांस’ तो दी है लेकिन यह किसानों के लिए दोहरी चुनौती लेकर आया है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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