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विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस- शब्दों का उत्सव ज्ञान का संरक्षण का संपूर्ण महाकुंभ

विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस- शब्दों का उत्सव ज्ञान का संरक्षण का संपूर्ण महाकुंभ
नवजोत कौर सिद्धू
On: अप्रैल 22, 2026 4:20 अपराह्न
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​23 अप्रैल का दिन दुनिया भर के पुस्तक प्रेमियों, लेखकों, प्रकाशकों और पुस्तकालयों के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। यूनेस्को द्वारा घोषित ‘विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस’ (World Book and Copyright Day) न केवल पढ़ने की आदत को बढ़ावा देने का माध्यम है, बल्कि यह उन रचनाकारों के अधिकारों के संरक्षण का भी संकल्प है, जो अपने शब्दों से दुनिया को दिशा देते हैं।

​ ऐतिहासिक पृष्ठभूमि –  23 अप्रैल ही क्यों?

​इस विशेष तिथि का चयन आकस्मिक नहीं था। 23 अप्रैल का साहित्य की दुनिया में एक गहरा प्रतीकात्मक महत्व है

  • साहित्यिक दिग्गजों का स्मरण – सन् 1616 में इसी दिन विश्व साहित्य के तीन महान स्तंभों विलियम शेक्सपियर, मिगुएल डी सर्वेंट्स और इंका गार्सिलासो डी ला वेगा का निधन हुआ था।
  • जन्म और मृत्यु का संयोग –  इसी तिथि को मौरिस ड्रुओन, व्लादिमीर नाबोकोव और मैनुअल मेजिया वैलेजो जैसे कई अन्य प्रसिद्ध लेखकों का जन्म या मृत्यु हुई है।
  • कैटलोनिया की परंपरा –  स्पेन के कैटलोनिया क्षेत्र में 23 अप्रैल को ‘सेंट जॉर्ज डे’ मनाया जाता है, जहाँ परंपरा के अनुसार लोग एक-दूसरे को गुलाब और पुस्तकें भेंट करते हैं। इसी परंपरा ने यूनेस्को को प्रेरित किया।

यूनेस्को का निर्णय –  1995 में पेरिस में आयोजित यूनेस्को के सामान्य सम्मेलन में लेखकों को श्रद्धांजलि देने और युवाओं में पढ़ने के प्रति प्रेम जगाने के उद्देश्य से आधिकारिक तौर पर 23 अप्रैल को इस दिवस के रूप में चुना गया।

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​कॉपीराइट – रचनात्मकता का सुरक्षा कवच

​अक्सर लोग ‘विश्व पुस्तक दिवस’ पर तो ध्यान देते हैं, लेकिन इसके साथ जुड़े ‘कॉपीराइट’ शब्द को गौण मान लेते हैं। वास्तव में, बिना कॉपीराइट के साहित्य का अस्तित्व संकट में पड़ सकता है।

कॉपीराइट क्या है?

​कॉपीराइट एक कानूनी शब्द है जो उन अधिकारों का वर्णन करता है जो रचनाकारों को उनके साहित्यिक और कलात्मक कार्यों पर प्राप्त होते हैं। इसमें पुस्तकें, संगीत, पेंटिंग, मूर्तियाँ, फिल्में और यहाँ तक कि कंप्यूटर प्रोग्राम भी शामिल हैं।

कॉपीराइट क्यों आवश्यक है?

  • आर्थिक प्रोत्साहन –  यह लेखकों को उनके काम से आर्थिक लाभ कमाने का अधिकार देता है, जिससे वे भविष्य में और अधिक लिखने के लिए प्रोत्साहित होते हैं।
  • रचनात्मक सुरक्षा –  यह किसी अन्य व्यक्ति को लेखक की अनुमति के बिना उनके काम को चुराने, बदलने या गलत तरीके से उपयोग करने से रोकता है।
  • नैतिक अधिकार –  लेखक को यह अधिकार होता है कि वह अपने कार्य का श्रेय प्राप्त करे और उसके कार्य को किसी ऐसे तरीके से प्रस्तुत न किया जाए जिससे उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचे।

​ ‘वर्ल्ड बुक कैपिटल’ (विश्व पुस्तक राजधानी)

​प्रत्येक वर्ष, यूनेस्को और अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक संघ, लेखक संघ और पुस्तकालय संघ मिलकर एक शहर को ‘विश्व पुस्तक राजधानी’ के रूप में चुनते हैं। यह चयन एक वर्ष (23 अप्रैल से अगले 23 अप्रैल तक) के लिए होता है।

  • उद्देश्य – चयनित शहर पुस्तकों और पढ़ने को बढ़ावा देने के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित करता है।
  • वर्ष 2024 – इस वर्ष की विश्व पुस्तक राजधानी स्त्रासबर्ग (फ्रांस) है, जो अपने साहित्यिक कार्यक्रमों के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन और पर्यावरणीय चेतना पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।

​पठन संस्कृति का महत्व –  डिजिटल युग में पुस्तकें

​आज के दौर में जहाँ रील और शॉर्ट वीडियो का बोलबाला है, वहाँ पुस्तकों की प्रासंगिकता और बढ़ गई है।

  • गहन चिंतन (Deep Thinking) –  इंटरनेट पर हम सूचनाएं ‘स्कैन’ करते हैं, लेकिन पुस्तकें हमें ‘विषय में डूबने’ और गहराई से सोचने की क्षमता प्रदान करती हैं।
  • मानसिक स्वास्थ्य – शोध बताते हैं कि प्रतिदिन केवल 6 मिनट पढ़ने से तनाव का स्तर 60% तक कम हो सकता है।
  • सहानुभूति का विकास –  कहानियाँ हमें दूसरों के जूतों में पैर रखकर दुनिया देखने का मौका देती हैं, जिससे समाज में संवेदनशीलता बढ़ती है।

​ इस दिवस को कैसे मनाएं? (गतिविधियाँ)

​विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस केवल सरकारी आयोजनों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। आप इसे व्यक्तिगत स्तर पर भी मना सकते हैं

  • पुस्तक दान करें – अपनी पुरानी पुस्तकें किसी जरूरतमंद या स्थानीय पुस्तकालय को दें।
  • बुक क्लब की शुरुआत –  दोस्तों के साथ मिलकर एक किताब पढ़ें और उस पर चर्चा करें।
  • स्थानीय लेखकों का समर्थन – अपने क्षेत्र के लेखकों की पुस्तकें खरीदें और उनके बारे में सोशल मीडिया पर लिखें।
  • कॉपीराइट के प्रति जागरूकता –  पायरेटेड किताबें (सस्ती डुप्लीकेट प्रतियां या अनधिकृत PDF) न खरीदें। लेखकों की मेहनत का सम्मान करें।

​23 अप्रैल हमें याद दिलाता है कि पुस्तकें अतीत और भविष्य के बीच का सेतु हैं। वे ज्ञान की मशाल हैं जो अज्ञानता के अंधेरे को दूर करती हैं। इस ‘विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस’ पर आइए हम संकल्प लें कि हम न केवल स्वयं पढ़ेंगे, बल्कि दूसरों को भी पढ़ने के लिए प्रेरित करेंगे और लेखकों के बौद्धिक संपदा अधिकारों का सम्मान करेंगे।

“एक अच्छी पुस्तक हज़ार मित्रों के बराबर होती है।”

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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