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World Consumer Rights Day- 15 मार्च को उपभोक्ताओं के अधिकारों का दिन विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस जानिये इतिहास और महत्व

15 मार्च को उपभोक्ताओं के अधिकारों का दिन विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस जानिये इतिहास और महत्व
नवजोत कौर सिद्धू
On: मार्च 3, 2026 8:03 अपराह्न
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उपभोक्ताओं के अधिकारों को लिये प्रतिवर्ष 15 मार्च को उपभोक्ता दिवस (Consumer Rights Day) मनाया जाता है। यह दिन उपभोक्ताओं के लिये उनके सम्मान और उनकी रक्षा को लेकर किया जानें वाला एक ऐसा अधिकार है जो उन्हें रक्षा प्रदान करता है। बात इतिहास की करें तो यह दिन पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी (President John F. Kennedy) द्वारा 15 मार्च, 1962 को उपभोक्ता अधिकारों की घोषणा से प्रेरित था। इस दिन का उद्देश्य उपभोक्ताओं (Consumers) को जागरुक करनें के साथ ही उनके संरक्षण और वैश्विक स्तर पर उनके जागरुकता को बढ़ाने के साथ बाज़ार में उचित प्रथाओं को बढ़ावा देना है ताकि किसी उपभोक्ता से साथ किसी तरह का छल न हो सके।

World Consumer Rights Day 2026 की क्या है थीम

इस वर्ष World Consumer Rights Day 2026 (15 मार्च) की थीम ‘सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्ता’ है। यह थीम वैश्विक बाज़ार में खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों के खतरों को खत्म करने, उपभोक्ता सुरक्षा को प्राथमिकता देने और सुरक्षित उत्पादों पर विश्वास पैदा करने पर केंद्रित है। इसके तहत हर उपभोक्ता को ऐसे सभी अधिकार मिलते हैं, जो उसे सजग बनाते हैं। यह दिन सभी उपभोक्ताओं (Consumers) के मूल अधिकारों को बढ़ावा देने के साथ ही उन अधिकारों का सम्मान और संरक्षण करने के लिए प्रोत्साहित करने का एक अवसर होता है जिससे उपभोक्ता और जागरुक होता है। 

जानिये पहली बार कब मनाया गया विश्व उपभोक्ता दिवस

1983 में पहली बार विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस (World Consumer Rights Day) मनाया गया था। दरअसल राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी (John F. Kennedy) के 15 मार्च, 1962 को अमेरिकी कांग्रेस को दिए गए संबोधन की याद में यह चुना गया था। और वह औपचारिक रूप से उपभोक्ता अधिकारों को मान्यता देने वाले पहले विश्व नेता बने थे।

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 उपभोक्ताओं के लिए शुरु की नई पहल और नीतियाँ

उपभोक्ताओं के अधिकारों में मजबूत बनानें, उनके शिकायतों के निदान और इस व्यवस्था को पारदर्शी बनानें के साथ निष्पक्ष बाजार उपलब्ध करानें के लिये कई पहल और नीतियां शुरु की गई। इसके साथ ही वर्ष 2024 में, प्रमुख विकासों में ई-कॉमर्स विनियमन, डिजिटल उपभोक्ता संरक्षण, उत्पाद सुरक्षा मानकों और सतत उपभोग पहलों में सुधार शामिल किये गये हैं।

जानिये क्या है Consumer Protection Act, 2019

उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम (Consumer Protection Act), 2019 में जिला, राज्य और केंद्रीय स्तरों पर Three-Tier Structure का प्रावधान है, जिसे आमतौर पर उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा और अनुचित व्यापार प्रथाओं से संबंधित विवादों सहित उपभोक्ता विवादों का सरल और त्वरित निवारण प्रदान करने के लिए उपभोक्ता आयोग (consumer commission) के रूप में जाना जाता है। Consumer Commission को एक विशिष्ट प्रकृति की राहत देने और जहां भी उचित हो, उपभोक्ताओं को मुआवजा (compensation) देने का अधिकार है।

State Consumer Welfare Fund-  संवर्धन और स्थापना में मिलेगी मदद

वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान, विभिन्न राज्यों को उनके संबंधित State Consumer Welfare Fund की स्थापना और Enhancement के लिए केंद्र सरकार के हिस्से के रूप में 32.68 करोड़ रुपये जारी किए गए|

ऐसे में देखा जाए तो 28 states और 8 union territories में से 24 states और 1 union territory ने उपभोक्ता कल्याण कोष की स्थापना की है। उपभोक्ता कल्याण कोष (Consumer Welfare Fund) का समग्र उद्देश्य उपभोक्ताओं के कल्याण को बढ़ावा देना और उनकी रक्षा करने के साथ ही देश में उपभोक्ता आंदोलन (consumer movement) को मजबूत करने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

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Online Consumer Complaints के लिए e-filing का किया गया विस्तार

एक दौर ऐसा भी आया जब कोविड-19 में उपभोक्ताओं पर लगे प्रतिबंधों के कारण, ई-दाखिल पोर्टल को उपभोक्ता शिकायत दर्ज करने के लिए सस्ती, त्वरित और परेशानी मुक्त प्रणाली के रूप में पेश किया गया था।

E-filing एक ऐसा ऑनलाइन platform है जिसे Consumer Complaint निवारण प्रक्रिया को कारगर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है, इससे उपभोक्ताओं को संबंधित Consumer Forum तक पहुँचने का एक कुशल और सुविधाजनक तरीका प्रदान करता है, जिससे उपभोक्ता अपनी शिकायत दर्ज करने के लिए कहीं जाने और भौतिक रूप से उपस्थित हुये बिना भी कर सकता है।ई-दाखिल की स्थापना के बाद यह उपभोक्ता अधिकारों को बढ़ावा देने और समय पर न्याय सुनिश्चित करने में एक सशक्त माध्यम बना है। 

गौरतलब है कि यह पोर्टल एक सरल,सहज और आसान-सा-नेविगेट करने वाला इंटरफ़ेस देता है, जिससे उपभोक्ता बेहद कम प्रयास में अपनी शिकायत दर्ज कर सकते हैं। शिकायत दर्ज करने से लेकर उनकी स्थिति पर नज़र रखने तक, ई-दाखिल मामले दर्ज करने के संबंध में Paper Less और Transparency प्रक्रिया भी सुनिश्चित करता है।

NCH 2.0 पहल,राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन

एनसीएच अपनी शिकायतों के समाधान के इच्छुक उपभोक्ताओं के लिए एक केंद्रीय बिंदु बनकर सामनें आया, इसके द्वारा उपभोक्ताओं को  शिकायतें दर्ज करने के साथ ही कुशल और प्रभावी तरीके से समाधान खोजने में मदद उपलब्ध कराई।उपभोक्ता शिकायत निवारण प्रक्रिया को और बढ़ाने के लिए, राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) ने एनसीएच 2.0 पहल शुरू की गई, जिसमें शिकायत निवारण को कारगर बनाने के लिए उन्नत तकनीकों को शामिल किया गया है।

विभाग ने दिया राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नया रूप

गौर करनें वाली बात यह भी है कि एनसीएच (NCH) द्वारा प्राप्त कॉलों की संख्या दस गुना से अधिक बढ़ी है। बात आंकडों की करें तो दिसंबर 2015 में 12,553 शिकायते थी लेकिन इनकी संख्या दिसंबर 2024 में 1,55,138 तक पहुंच गई। विभाग ने राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (एनसीएच) को नया रूप दिया है, जिससे यह मुकदमा-पूर्व चरण में शिकायत निवारण के लिए एक केंद्रीय मंच बन गया है।

17 भाषाओं में उपलब्ध हेल्पलाइन

वहीं शिकायतों का आसानी से निराकरण हो सके और हर उपभोक्ता अपनी शिकायतें दर्ज करा सकें इसके लिये अंग्रेजी, हिंदी सहित ऐसी 17 अन्य भाषाएं हैं जहां उपभोक्ता टोल-फ्री नंबर 1915 के माध्यम से अपनी शिकायत दर्ज कर सकता है।इसके साथ ही (INGRAM) एकीकृत शिकायत निवारण तंत्र पोर्टल के माध्यम से भी शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं,जिसकी पहुंच आसान है और व्हाट्सएप, एसएमएस, ईमेल, एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल और उमंग ऐप जैसे कई प्लेटफार्म प्रदान करता है।

URL, “जागो ग्राहक जागो” और मोबाइल एप्स से भी जानकारी 

लगातार बढ़ रहे डिजिटल दौर को देखते हुये उपभोक्ता मामले विभाग “जागो ग्राहक जागो” ऑनलाइन पोर्टल और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से उपभोक्ता की ऑनलाइन गतिविधियों के दौरान सभी यूआरएल के बारे में आवश्यक ई-कॉमर्स जानकारी प्रदान करता है इतना ही नहीं उन्हें यह सचेत भी करता है कि कोई URL असुरक्षित हो सकता है और इससे सावधानी बरतने की आवश्यकता है। यह पोर्टल्स उपभोक्ताओं को सूचित निर्णय लेने और बाज़ार में अपने अधिकारों का दावा करने के लिए आवश्यक जानकारी, संसाधन और सहायता प्रदान करके उन्हें मजबूत बनाने के लिए समर्पित हैं।

आपको बता दें कि भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा “ई-कॉमर्स  स्व-शासन के लिए सिद्धांत और दिशानिर्देश” पर भारतीय मानक का मसौदा ऑनलाइन मार्केटप्लेस के लिए पारदर्शी, निष्पक्ष और उपभोक्ता-अनुकूल ढांचा स्थापित करने का लक्ष्य रखा है‌। ऐसे में जब देश विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2026 मनानें की तैयारी में है, तो ध्यान अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और उपभोक्ता-अनुकूल अर्थव्यवस्था सुनिश्चित करने पर केद्रिंत करना और अधिकारों की पारदर्शी रखनें का है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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