तेहरान और ब्रुसेल्स के बीच की दूरी भौगोलिक रूप से भले ही हजारों मील की हो, लेकिन पिछले कुछ दिनों में हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर जो बयानबाजी हुई है, उसने इस दूरी को कूटनीतिक कड़वाहट में बदल दिया है। ईरान और यूरोपीय संघ (EU) के बीच उभरा यह नया विवाद केवल समुद्री रास्तों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पश्चिम एशिया में बदल रहे शक्ति समीकरणों और वैश्विक राजनीति की नई लकीरें खींच रहा है। ईरान का यह दो टूक कहना कि उसे किसी से ‘उपदेश’ लेने की जरूरत नहीं है, यह साफ करता है कि आने वाले दिनों में समंदर की ये लहरें शांत रहने वाली नहीं हैं।
एक बयान और ईरान की तीखी प्रतिक्रिया
मामले की शुरुआत तब हुई जब यूरोपीय संघ ने एक आधिकारिक बयान जारी कर हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही की वकालत की। यूरोपीय संघ का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के तहत इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को पूरी स्वतंत्रता मिलनी चाहिए। यूरोपीय यूनियन ने साफ किया कि कोई भी देश इस मार्ग को नियंत्रित करने या जहाजों की आवाजाही में बाधा डालने का अधिकार नहीं रखता।हालाँकि, ईरान को यह ‘नसीहत’ रास नहीं आई। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे ‘पाखंड’ और ‘दोहरा मानदंड’ करार दिया। ईरान का तर्क है कि वह इस क्षेत्र का सबसे बड़ा तटीय देश है और यहाँ की सुरक्षा सुनिश्चित करना उसकी जिम्मेदारी और संप्रभु अधिकार है। ईरान ने यूरोपीय देशों को आईना दिखाते हुए कहा कि जो देश खुद अंतरराष्ट्रीय कानूनों का अपनी सुविधा के अनुसार पालन करते हैं, उन्हें दूसरों को कानून सिखाने का कोई हक नहीं है।
पहले से ही तनावपूर्ण माहौल
यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम एशिया में पहले से ही हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ ईरान के रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण रहे हैं, और हाल के घटनाक्रमों ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।समुद्र में जहाजों की आवाजाही को लेकर भी कई बार टकराव की स्थिति बन चुकी है। कुछ घटनाओं में जहाजों को रोके जाने और चेतावनी दिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है।
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हॉर्मुज महज एक समुद्री रास्ता नहीं है?
हॉर्मुज जलडमरूमध्य को समझने के लिए इसके रणनीतिक महत्व को समझना जरूरी है। नक्शे पर देखें तो यह फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच एक संकरा सा रास्ता है, जिसकी चौड़ाई महज 33 किलोमीटर के आसपास है। लेकिन इस छोटे से रास्ते का कद इतना बड़ा है कि यहाँ से होने वाली एक छोटी सी हलचल भी न्यूयॉर्क से लेकर टोक्यो और दिल्ली तक के शेयर बाजारों को हिला देती है।दुनिया भर में खपत होने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 से 30 प्रतिशत हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात जैसे बड़े तेल उत्पादक देशों के जहाज इसी रास्ते से दुनिया भर में पहुँचते हैं। इसे दुनिया की ‘इकोनॉमिक लाइफलाइन’ या आर्थिक जीवनरेखा कहा जाता है। अगर यह रास्ता एक दिन के लिए भी बंद हो जाए, तो दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कमी हो जाएगी और महंगाई का एक ऐसा तूफान आएगा जिसे संभालना किसी भी सरकार के बस में नहीं होगा।
युद्ध की पृष्ठभूमि से बड़ा तनाव
यह विवाद केवल कूटनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे चल रहा व्यापक सैन्य संघर्ष भी अहम भूमिका निभा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ ईरान के तनाव ने इस पूरे क्षेत्र को अस्थिर बना दिया है।हाल के घटनाक्रमों में ईरान द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कड़ा करने और कुछ जहाजों पर कार्रवाई करने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय चिंता और बढ़ गई है।ब्रिटेन और अन्य देशों ने भी इस मार्ग से सामान्य जहाजरानी बहाल करने की अपील की है, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
पाखंड का आरोप: ईरान के तर्क में कितना दम?
ईरान जब यूरोपीय संघ पर ‘पाखंड’ का आरोप लगाता है, तो उसका इशारा पश्चिमी देशों की उन नीतियों की तरफ होता है जहाँ वे अपने मित्र देशों की गलतियों पर चुप्पी साध लेते हैं, लेकिन ईरान जैसे देशों पर नियमों का दबाव बनाते हैं। ईरान का कहना है कि जलडमरूमध्य की सुरक्षा के नाम पर यूरोपीय देश असल में अपनी सैन्य पैठ बढ़ाना चाहते हैं।दूसरी तरफ, यूरोपीय संघ का कहना है कि वे किसी देश के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि ‘फ्रीडम ऑफ नेविगेशन’ यानी समुद्री आवाजाही की स्वतंत्रता के वैश्विक सिद्धांत की रक्षा कर रहे हैं। उनके अनुसार, यदि किसी एक देश को ऐसे महत्वपूर्ण रास्तों को नियंत्रित करने की छूट दे दी गई, तो यह अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाएगी।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का विवाद केवल एक समुद्री रास्ते का विवाद नहीं है, बल्कि यह आधुनिक युग की जटिल राजनीति का प्रतीक है। यह दिखाता है कि कैसे एक छोटा सा भौगोलिक टुकड़ा पूरी दुनिया की शांति और समृद्धि को बंधक बना सकता है। ईरान और यूरोपीय संघ को यह समझना होगा कि इस तनाव में जीत किसी की नहीं होगी, लेकिन हार पूरी मानवता की हो सकती है। संवाद और सम्मान ही वह एकमात्र रास्ता है, जिससे इस संकट का हल निकल सकता है। वर्ना, हॉर्मुज की ये लहरें कब सुनामी बन जाएं, कोई नहीं कह सकता।







