डेलीबार्ता,नई दिल्ली। भारत और यूरोपियन यूनियन (EU) के बीच वर्षों से लंबित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) आखिरकार फाइनल हो गया है। करीब चार साल की गहन और जटिल बातचीत के बाद इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते का रास्ता साफ हो गया है। मंगलवार को होने वाले भारत–EU शिखर सम्मेलन में इसकी औपचारिक घोषणा किए जाने की संभावना है। हालांकि समझौते के लागू होने में अभी करीब एक साल का समय लगेगा, लेकिन इसके ऐलान मात्र से ही भारतीय उद्योग और निर्यातकों में उत्साह का माहौल है।
18 दौर की बातचीत के बाद बनी सहमति
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच FTA पर बातचीत की शुरुआत वर्ष 2007 में हुई थी। शुरुआती वर्षों में कई मुद्दों पर सहमति न बनने के कारण यह प्रक्रिया 2013 में ठप पड़ गई। इसके बाद लगभग एक दशक तक यह समझौता ठंडे बस्ते में चला गया। जून 2022 में दोनों पक्षों ने एक बार फिर बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद लगातार 18 दौर की वार्ताओं के जरिए आखिरकार सभी प्रमुख मसलों पर सहमति बन पाई।
कॉमर्स सेक्रेटरी राजेश अग्रवाल ने सोमवार को जानकारी देते हुए बताया कि अधिकारियों के स्तर की बातचीत पूरी हो चुकी है और दोनों पक्ष 27 जनवरी को औपचारिक रूप से बातचीत के समापन का ऐलान करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत के नजरिये से यह समझौता संतुलित और फायदेमंद है, जो दोनों क्षेत्रों के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा।
भारत–EU की ऐतिहासिक डील से बदलने वाला है वैश्विक व्यापार संतुलन
कानूनी शब्दावली पर चल रहा काम
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, बातचीत तकनीकी तौर पर पूरी हो चुकी है और अब समझौते की कानूनी शब्दावली (लीगल टेक्स्ट) को अंतिम रूप दिया जा रहा है। यह प्रक्रिया अगले 5 से 6 महीनों में पूरी हो सकती है। इसके बाद भारत और यूरोपियन यूनियन औपचारिक रूप से इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे।
हस्ताक्षर के बाद दोनों पक्षों में इसे लागू करने के लिए आंतरिक मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होगी। भारत में इसके लिए केंद्रीय कैबिनेट की स्वीकृति आवश्यक होगी, जबकि यूरोपियन यूनियन में इसे वहां की संसद से मंजूरी मिलेगी। राहत की बात यह है कि EU के सभी 27 सदस्य देशों की अलग-अलग मंजूरी की जरूरत नहीं होगी। उम्मीद जताई जा रही है कि यह पूरी प्रक्रिया करीब एक साल में पूरी हो जाएगी और 2027 की शुरुआत में यह समझौता लागू हो सकता है।
- किन सेक्टर्स को होगा सबसे ज्यादा फायदा-भारत–EU FTA से भारतीय निर्यातकों को सबसे बड़ा फायदा यूरोपीय बाजार में आयात शुल्क (टैरिफ) में कटौती के रूप में मिलेगा। इससे भारतीय उत्पाद अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और उनकी मांग बढ़ेगी।
- टेक्सटाइल और परिधान उद्योग-टेक्सटाइल और रेडीमेड गारमेंट्स भारत का प्रमुख निर्यात क्षेत्र है। FTA के बाद यूरोप में भारतीय कपड़ों पर लगने वाले भारी शुल्क में कमी आएगी, जिससे बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत की स्थिति मजबूत होगी।
- लेदर और फुटवियर-लेदर उत्पाद और जूते-चप्पल के निर्यात में भी भारत को बड़ा फायदा मिलेगा। यूरोपीय बाजार में इन उत्पादों की मांग पहले से ही मजबूत है और शुल्क कम होने से भारतीय कंपनियों के ऑर्डर बढ़ने की संभावना है।
- जेम्स एंड जूलरी-हीरे, सोने और आभूषणों के निर्यात में भारत पहले से ही वैश्विक स्तर पर अहम भूमिका निभाता है। FTA के बाद EU में भारतीय ज्वेलरी की पहुंच और आसान होगी, जिससे इस सेक्टर में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- केमिकल्स और फार्मा-भारतीय केमिकल और फार्मास्युटिकल कंपनियों के लिए भी यह समझौता फायदेमंद साबित होगा। कम टैरिफ और आसान बाजार पहुंच से इन उद्योगों का निर्यात बढ़ेगा।
- समुद्री उत्पाद-मछली, झींगा और अन्य समुद्री उत्पादों के निर्यात पर यूरोप में लगने वाले शुल्क में कमी आने से तटीय राज्यों के मछुआरों और प्रोसेसिंग यूनिट्स को सीधा लाभ मिलेगा।
निवेश और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि यह FTA केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निवेश के नए रास्ते भी खोलेगा। यूरोपियन कंपनियां भारत में मैन्युफैक्चरिंग, रिन्यूएबल एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, डिजिटल टेक्नोलॉजी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ा सकती हैं। इससे भारत में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और तकनीक का हस्तांतरण भी होगा। कॉमर्स सेक्रेटरी के अनुसार, यह समझौता भारत की ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी पहलों को भी मजबूती देगा, क्योंकि विदेशी निवेश से घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ेगी।
EU के लिए भी क्यों अहम है यह समझौता
यूरोपियन यूनियन के लिए भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बड़े बाजारों में से एक है। भारत की विशाल उपभोक्ता आबादी और बढ़ती मध्यम वर्गीय मांग EU कंपनियों के लिए आकर्षक अवसर प्रस्तुत करती है। FTA के जरिए यूरोपीय कंपनियों को भारतीय बाजार में आसान पहुंच मिलेगी, खासकर ऑटोमोबाइल, मशीनरी, वाइन, डेयरी और हाई-टेक उत्पादों के क्षेत्र में।
आर्थिक रिश्तों में नया अध्याय
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत–EU FTA दोनों पक्षों के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय जोड़ने वाला साबित होगा। यह समझौता न केवल व्यापार और निवेश को बढ़ावा देगा, बल्कि रणनीतिक साझेदारी को भी मजबूत करेगा। वैश्विक स्तर पर बदलते भू-राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य में यह डील भारत और यूरोप दोनों के लिए समयोचित और दूरदर्शी कदम मानी जा रही है। ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि आज होने वाला यह ऐलान भारत के व्यापारिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है, जिसका असर आने वाले वर्षों में देश की अर्थव्यवस्था, उद्योग और रोजगार पर साफ तौर पर दिखाई देगा।







