पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी अब नंदीग्राम सीट छोड़ने जा रहे है। पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने 2 सीट से चुनाव लड़ा था। उन्होंने एक नंदीग्राम सीट से और दूसरा भवानीपुर सीट से चुनाव लड़ा था। संवैधानिक नियमों के अनुसार कोई भी विधायक केवल एक ही सीट से विधानसभा में नेतृत्व कर सकता है। ऐसे में शुभेंदु अधिकारी ने विधानसभा में भवानीपुर सीट का नेतृत्व करते हुए शपथ ली।
शुभेंदु अधिकारी ने टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को इन दोनों सीटों से चुनाव में मात दी है। इस विधानसभा चुनाव में शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी को भवानीपुर सीट से 15000 वोटो से मात दी थी। इसके पहले भी उन्होंने ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से मात दी। शुभेंदु अधिकारी पहले ऐसे नेता बने जिन्होंने ममता बनर्जी को 2 सीट से मात दी हो। शुभेंदु अधिकारी के दोनों सीटों से चुनाव में जीत से भाजपा को बहुत बड़ा फायदा हुआ। उसके न केवल सीट बढ़े बल्कि ममता बनर्जी को उन्हीं के गढ़ में हराकर जनता के बीच अपना लोहा भी मनवाया।
एक सीट को छोड़ने का किया था इशारा
शुभेंदु अधिकारी बंगाल के दो सीटों से चुनाव लड़े और इन दोनों सीटों से ही उन्हें जीत मिली। विधानसभा में उन्होंने भवानीपुर सीट से शपथ ली। हालांकि उन्होंने सीएम बनने के बाद यह कहा था कि वह 10 दिनों के अंदर किसी एक सीट को छोड़ देंगे। छोड़ने वाली सीट कौन सी होगी इसका निर्णय उन्होंने पार्टी हाई कमान पर छोड़ दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर पार्टी उनसे पूछेगी तो वह अपनी राय जरूर देंगे। शुभेंदु अधिकारी केंद्रीय ग्रह मंत्री अमित शाह के काफी करीबी नेताओं में गिने जाते हैं। जब बंगाल में भारतीय जनता पार्टी को केवल 2 सीट मिले थे तब भी शुभेंदु अधिकारी डटे रहे और अमित शाह के साथ लगातार चुनावी अभियान करते रहे। शायद यही वजह है कि आज शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनने के बाद किसी को कोई आपत्ति नहीं है।
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मुख्यमंत्री बनने के बाद निर्णय
शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री बनने के बाद कई निर्णय लिए है। चुनाव से पहले उन्होंने भारत और बांग्लादेश के बीच चल रहे तनाव को कम करने की भी बात की थी और बंगाल व बांग्लादेश के बॉडर में बाड़ लगवाने की भी बात की थी। शुभेंदु अधिकारी ने अपने पहले कैबिनेट बैठक में बाड़ लगवाने की मंजूरी दे दी है। साथ ही बंगाल में सरकारी नौकरियों की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को 5 वर्ष की छूट दी है। महिलाओं की सुरक्षा को लेकर भी उन्होंने राज्य पुलिस को कड़े दिशा निर्देश दिए है। कानून व्यवस्था भी सुधारने की बात अपने पहले कैबिनेट बैठक में शुभेंदु अधिकारी ने की है। उन्होंने सभी मंत्रियों को विभाग भी बांट दिए है। महिलाओं की सुरक्षा पर बहुत राजनीति हुई इसीलिए महिला विकास आयोग की कमाल अग्निमित्रा पॉल को दी गई। ग्रामीण कार्य विकास की जिम्मेदारी दिलीप घोष को दी गई। ऐसे और भी कई विभाग है जिसका बंटवारा शुभेंदु अधिकारी ने अपनी पहली कैबिनेट बैठक में किया।
शुभेंदु अधिकारी का मंत्रिमंडल
| मंत्री का नाम | विभाग का नाम |
| शुभेंदु अधिकारी (मुख्यमंत्री) | ग्रह, वित्त, कार्मिक और मुख्य जिम्मेदारी |
| दिलीप घोष | पंचायत, ग्रामीण विकास, पशु संसाधन विकास और कृषि |
| अग्निमित्रा पॉल | महिला एवं बाल कल्याण, नगर व शहरी विकास |
| निषिद्ध प्रामाणिक | उत्तर बंगाल विकास, खेल और युवा कल्याण |
| अशोक कीर्तनिया | खाद पूर्ति और शहकारिता |
| खुदीराम टुडू | जनजातीय विकास, पिछड़ा वर्ग कल्याण और अल्पसंख्यक मामले |
ममता बनर्जी से भी सफल कार्यकाल की उम्मीद
शुभेंदु अधिकारी ने 9 मई को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। शपथ लेने के बाद से ही वह एक के बाद एक कड़े फैसले लेने से पीछे नहीं हट रहे है। बंगाल की जनता शुभेंदु अधिकारी को अब अगला जननेता मान रही है। टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी ने 15 साल तक बंगाल की सत्ता संभाली। वैसे ही अब बंगाल की जनता शुभेंदु अधिकारी को दे







