व्यापारभारतविदेशी समाचारखेलजीवन शैलीराजनीतिधर्मभौगोलिकसेलिब्रेटीज़शिक्षास्वास्थ्य

ट्रंप ने चीन का गिफ्ट फेंका कूड़ेदान में वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!

ट्रंप ने चीन का गिफ्ट फेंका कूड़ेदान में वजह जानकर रह जाएंगे हैरान!
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 17, 2026 1:32 अपराह्न
Follow Us:

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपना चीन दौरा पूरा करके अमेरिका वापस लौट गए है। उनके चीन दौरे में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय चीन द्वारा दिए गए गिफ्ट्स को कचरे के डिब्बे में फेंकना है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और व्हाइट हाउस के रिपोर्टर्स ने चीन द्वारा दिए गए पूरे गिफ्ट्स को अपने विमान के नीचे रखे कचरे के डिब्बे में फेंक दिया। ऐसा इसलिए क्योंकि दशकों से अमेरिका और चीन पर जासूसी का खतरा मंडराता आया है। 

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल ने चीन का दिया हुआ गिफ्ट्स अपने पास नहीं रखा बल्कि पास में रखे कचरे के डब्बे में फेंक दिया। इसे अमेरिका द्वारा चीन पर अविश्वास अभी भी बना हुआ है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने जिन उपहार को कचरे के डिब्बे में फेंका उसमें स्टाफ का बर्नर फोन, कार्यक्रम को कवर किए गए पहचान पत्र और चीन द्वारा जारी किया गया लैपल पिन शामिल था। 

ट्रंप का चीन में दो दिनों का दौरा

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप चीन के बीजिंग में अपने दो दिनों के हाई प्रोफाइल दौरे में पहुंचे थे। यहां उन्होंने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह मुलाकात इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि अमेरिका और चीन दोनों विश्व की आर्थिक शक्ति बनना चाहते है। 

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का दौरा इन बातों पर भी हो सकता है –

  1. आर्थिक संतुलन – अमेरिका और चीन पर आपसी प्रतिस्पर्धा लगातार बढ़ रही है। दोनों पर एक दूसरे की टेक्नोलॉजी का आरोप भी लगता आया है। भारी सब्सिडी भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। 
  1. रणनीतिक प्रतिस्पर्धा – अमेरिका और चीन दोनों अपने आप को दुनिया की बड़ी सैन्य शक्तियों के रूप में मानते है। दोनों देश एक दूसरे को सबसे बड़े भू और समुद्री प्रतिस्पर्धियों में गिनते है। 
  1. सुरक्षा और जासूसी – दोनों देश विश्व की आर्थिक शक्ति बनने के लिए लगातार जासूसी करते और आंतरिक सुरक्षा का पता लगाने का काम करते आए है। 

also read :

साइबर जासूसी के खतरे का डर

वैसे तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया के सामने अपने चीन दौरे पर चीन को अपना दोस्त बता रहे है लेकिन चीन पर उनका अविश्वास उनकी दोस्ती को नहीं बता रहा है। अर्थात अगर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो कदम दोस्ती के लिए आगे बढ़ा रहे है तो चार कदम अपनी सुरक्षा के लिए पीछे भी खींच रहे है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनके प्रतिनिधिमंडल को पता है कि अगर चीनी समानों को अपने साथ लेकर अमेरिका गए तो जासूसी का खतरा मंडराता जाएगा। 

अमेरिका जानता है कि अगर चीन के द्वारा दिए गए उपहार उनके सीक्रेट सर्विस को कैप्चर कर लेंगे तो अमेरिका और व्हाइट हाउस की खुफिया जानकारी चीन के पास जा सकती है। चीन सालों से खुफिया तरीके से दूसरे देशों की टेक्नोलॉजी को चुराता आया है। शायद यही वजह है कि अमेरिका ने चीन के गिफ्ट्स को अमेरिका न ले जाते हुए कूड़ेदान में फेंकना उचित समझा। 

भारत ने चीनी CCTV बैन किया

जासूसी के खतरे को देखते हुए भारत ने चीन द्वारा उत्पादित CCTV को भारतीय बाजारों में पूरी तरह से बंद कर दिया। CCTV को भारतीय बाजारों में प्रतिबंधित करने का मुख्य कारण जासूसी है। चीन ये चाहता है कि भारत जिन तरीकों से विकसित देशों की सूची में शामिल होना चाहता है उन तरीकों को चीन इंटरसेप्ट कर भारत को लाचार करे जिससे चीन का व्यापार बाजार आगे बढ़े। चीन को आत्मनिर्भर भारत योजना से बहुत नुकसान हुआ है। भारत के लोग छोटी छोटी चीजों को चीन से आयात न करते हुए खुद ही निर्माण करते है। इससे भारत के लोगों को रोजगार मिलता है और विदेशी निर्भरता कम होती है। 

हाल के दिनों में भारत ने जो जरूरी चीज है केवल उन्हीं का आयात विदेशों से किया है। भारत ने खुद की बनाई हुई  चीज़ों को विदेशों में export किया है, जो भारत के लिए गर्व की बात है। भारत भी अमेरिका से सीख चुका है कि चीन के सामान पर बिल्कुल भी विश्वास नहीं करना है। ऐसा बिल्कुल नहीं है कि केवल अमेरिका और भारत ही चीन के सामनों को जासूसी के खतरे से अपने देश में नहीं लाते बल्कि चीन स्वयं ही दूसरे देशों के गिफ्ट्स को अपने देशों में लाने से बचने का प्रयास करते आ रहा है। 

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment