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आखिरी मिनटों में चूकी भारतीय महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया ने पहला मैच जीता

आखिरी मिनटों में चूकी भारतीय महिला हॉकी टीम ऑस्ट्रेलिया ने पहला मैच जीता
नवजोत कौर सिद्धू
On: मई 27, 2026 1:33 अपराह्न
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पर्थ।ऑस्ट्रेलियाई सरजमीं पर कदम रखते ही भारतीय महिला हॉकी टीम को पहले ही मुकाबले में कड़ी चुनौती और कड़े सबक दोनों एक साथ मिले। चार मैचों की इस बेहद महत्वपूर्ण द्विपक्षीय श्रृंखला के पहले ही मुकाबले में मेजबान ऑस्ट्रेलिया ने भारत को 2-1 से शिकस्त दे दी। पर्थ के मैदान पर खेला गया यह मुकाबला किसी रोलर-कोस्टर राइड से कम नहीं था। भारतीय टीम ने मैच में एक समय शानदार वापसी करते हुए मुकाबले को बराबरी पर ला खड़ा किया था, लेकिन आखिरी पलों में अनुभव की कमी और मेजबान टीम के आक्रामक काउंटर-अटैक ने भारत के मुंह से जीत छीन ली। 

इस शुरुआती जीत के साथ ही ऑस्ट्रेलियाई टीम ने श्रृंखला में 1-0 की मनोवैज्ञानिक बढ़त हासिल कर ली है।नए कोचिंग स्टाफ और नई रणनीतियों के साथ मैदान पर उतरी भारतीय टीम की कमान इस बार युवा और ऊर्जावान कप्तान सलिमा टेटे के हाथों में है। भारत ने मैच के दौरान कई ऐसे मूव्स बनाए जिसने ऑस्ट्रेलियाई डिफेंस की धड़कनें बढ़ा दी थीं, लेकिन शूटिंग सर्किल के भीतर आकर फिनिशिंग की कमजोरी एक बार फिर टीम की हार का सबसे बड़ा कारण बनी।

शुरुआती क्वार्टर: ऑस्ट्रेलिया का तूफान और सविता की ‘दीवार’

मैच की सीटी बजते ही ऑस्ट्रेलियाई फॉरवर्ड लाइन ने भारतीय पाले पर धावा बोल दिया। शुरुआती 15 मिनट में ऐसा लग रहा था कि खेल पूरी तरह से एकतरफा होने वाला है। ऑस्ट्रेलिया ने विंग्स का बेहतरीन इस्तेमाल किया और भारतीय रक्षापंक्ति को लगातार पीछे धकेलने पर मजबूर किया। इस दौरान ऑस्ट्रेलिया को बैक-टू-बैक पेनल्टी कॉर्नर भी मिले, लेकिन यहां भारत की संकटमोचक और अनुभवी गोलकीपर सविता पुनिया दीवार बनकर खड़ी हो गई। सविता ने न सिर्फ सीधे आते शॉट्स को रोका, बल्कि रिबाउंड पर भी अपनी चपलता दिखाते हुए तीन से चार निश्चित गोल बचाए।

मिडफील्ड में नवनीत कौर और नेहा गोयल ने खेल की रफ्तार को धीमा करने और गेंद पर नियंत्रण बनाने की काफी कोशिश की। हालांकि, ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों की गजब की स्पीड और फिजिकल गेम के सामने भारतीय मिडफील्ड शुरुआत में थोड़ी बेबस और दबाव में नजर आई। भारतीय खिलाड़ी गेंद को अपने पास ज्यादा देर तक होल्ड नहीं कर पा रहे थे, जिसके कारण फॉरवर्ड लाइन तक गेंदे समय पर नहीं पहुंच रही थीं।

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हाफटाइम के बाद भारत का पलटवार: रोमांच का चरम

पहले हाफ में पिछड़ने के बाद भारतीय टीम जब तीसरे क्वार्टर में मैदान पर उतरी, तो उनकी बॉडी लैंग्वेज पूरी तरह बदली हुई थी। कोच की पेप-टॉक का असर साफ दिख रहा था। अब भारतीय टीम डिफेंसिव होने के बजाय आक्रामक हॉकी खेल रही थी। अनुभवी फॉरवर्ड वंदना कटारिया और युवा सनसनी दीपिका ने मिलकर ऑस्ट्रेलिया के राइट फ्लैंक को निशाना बनाया। इसी आक्रामकता का फायदा भारत को जल्द ही मिला, जब सर्कल के ठीक बाहर से बने एक बेहतरीन मूव को भारतीय फॉरवर्ड ने गोल में तब्दील कर दिया। इस बराबरी के गोल ने पर्थ के मैदान पर मौजूद भारतीय समर्थकों में जोश भर दिया और मुकाबला 1-1 की रोमांचक स्थिति में आ गया।बराबरी हासिल करने के बाद भारतीय टीम के पास बढ़त बनाने का भी सुनहरा मौका था। टीम ने लगातार दो पेनल्टी कॉर्नर हासिल किए, लेकिन ड्रैग-फ्लिक में सटीकता की कमी और ऑस्ट्रेलिया के फर्स्ट रशर्स की मुस्तैदी के कारण भारत इन मौकों को भुनाने में नाकाम रहा। आधुनिक हॉकी का यह नियम है कि यदि आप मौकों का फायदा नहीं उठाएंगे, तो आपको भुगतना पड़ेगा। ठीक ऐसा ही हुआ; भारत के मिस हुए मौके के तुरंत बाद ऑस्ट्रेलिया ने एक घातक काउंटर-अटैक किया और भारतीय डिफेंडर्स के संभलने से पहले ही गेंद को नेट के भीतर डाल दिया। स्कोर अब 2-1 हो चुका था।

अंतिम क्वार्टर: आखिरी मिनट का ड्रामा 

चौथे और अंतिम क्वार्टर में भारतीय टीम के पास खोने के लिए कुछ नहीं था। कप्तान सलिमा टेटे खुद आगे बढ़कर टीम का नेतृत्व कर रही थीं और मिडफील्ड से लगातार थ्रू-पास निकाल रही थीं। रक्षापंक्ति में उदिता और ज्योति ने कुछ बेहद साहसी टैकल किए और ऑस्ट्रेलिया को तीसरी बढ़त बनाने से रोका। मैच खत्म होने में जब महज दो मिनट का समय बचा था, तब भारत को एक पेनल्टी कॉर्नर मिला। यह मैच को ड्रॉ कराने का सबसे बड़ा और आखिरी मौका था। पूरा स्टेडियम सांसें थामे खड़ा था, लेकिन ऑस्ट्रेलियाई गोलकीपर और उनके डिफेंस ने भारतीय ड्रैग-फ्लिक को बेहद खूबसूरती से ब्लॉक कर दिया और इसी के साथ भारतीय टीम की उम्मीदें टूट गईं।

सबक और आगामी मुकाबलों की चुनौती

भले ही भारतीय टीम यह मुकाबला हार गई हो, लेकिन खेल के कई हिस्सों में उनका प्रदर्शन विश्व स्तरीय था। यह दौरा भारतीय महिला हॉकी के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि टीम इसके जरिए आने वाले बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट्स और एशिया कप की तैयारियां परख रही है।मैच के बाद कोचिंग स्टाफ के सामने सबसे बड़ी चुनौती पेनल्टी कॉर्नर कन्वर्जन रेट को सुधारना और सर्कल पेनिट्रेशन के दौरान होने वाली हड़बड़ाहट को रोकना होगी। सीनियर खिलाड़ी वंदना कटारिया और नवनीत कौर को अगले मैचों में और जिम्मेदारी लेनी होगी, जबकि दीपिका जैसी युवा खिलाड़ियों के लिए यह दौरा किसी पाठशाला से कम नहीं है। श्रृंखला में अभी तीन मैच और खेले जाने बाकी हैं, और जिस तरह का जज्बा भारतीय टीम ने दूसरे हाफ में दिखाया, उसे देखते हुए यह कहना गलत नहीं होगा कि अगले मुकाबले में एक जोरदार पलटवार देखने को मिल सकता है।

Dr Pankaj Sharma

fitness coach and writer mainly work on sports, fitness, Religious, foreign news, and technology

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