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सिंगापुर ओपन- हारते-हारते जीते सात्विक-चिराग इंडोनेशियाई जोड़ी को चखाया मजा कोर्ट पर फिर लहराया तिरंगा

सिंगापुर ओपन- हारते-हारते जीते सात्विक-चिराग इंडोनेशियाई जोड़ी को चखाया मजा कोर्ट पर फिर लहराया तिरंगा
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 1, 2026 12:03 अपराह्न
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सिंगापुर। बैडमिंटन कोर्ट से रविवार को एक ऐसी खबर आई जिसने हर हिंदुस्तानी खेल प्रेमी का सीना गर्व से चौड़ा कर दिया। हमारी स्टार पुरुष युगल जोड़ी—सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी ने वो कर दिखाया, जिसकी उम्मीद हर फैन को थी। सिंगापुर ओपन सुपर-750 बैडमिंटन टूर्नामेंट के खिताबी मुकाबले में इस भारतीय जोड़ी ने इंडोनेशिया के फजार अल्फियान और मोहम्मद शोहिबुल फिक्री को उनके ही अंदाज में मात दे दी। एक घंटे से ऊपर चले इस हाई-वोल्टेज ड्रामे वाले मैच में सात्विक और चिराग ने 18-21, 21-17, 21-16 से जीत दर्ज कर चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली।

मैच इतना रोमांचक था कि देखने वालों की सांसें थमी हुई थीं। पहला गेम हाथ से निकलने के बाद लग रहा था कि मैच गया, लेकिन सात्विक-चिराग ने गजब का कमबैक किया। उन्होंने न सिर्फ दबाव को झेला, बल्कि इंडोनेशियाई खिलाड़ियों को घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया। दो साल के लंबे इंतजार के बाद सिंगापुर के इस बड़े मंच पर भारत का तिरंगा एक बार फिर सबसे ऊपर लहराया।

पहले गेम में चूके, पर हिम्मत रत्ती भर कम नहीं हुई

फाइनल की शुरुआत देखकर ही समझ आ गया था कि आज कोर्ट पर आर-पार की जंग होने वाली है। दोनों जोड़ियां एक-दूसरे को इंच-इंच के लिए तरसा रही थीं। नेट पर शटल का ऐसा खेल चला कि लंबी-लंबी रैलियां देखने को मिलीं। पहले गेम के हाफ टाइम तक मुकाबला बराबरी का था, लेकिन इसके बाद पासा थोड़ा पलट गया। इंडोनेशिया की जोड़ी ने कुछ बेहद आक्रामक शॉट्स खेले, वहीं सात्विक और चिराग से अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां हुईं, जिनका खामियाजा भुगतना पड़ा। नतीजा यह हुआ कि पहला गेम इंडोनेशिया के फजार और फिक्री ने 21-18 से झटक लिया।स्टेडियम में सन्नाटा था। भारतीय फैंस निराश थे क्योंकि पहला गेम हारने के बाद मनोवैज्ञानिक दबाव बढ़ जाता है। मगर सात्विक-चिराग की डिक्शनरी में हार मान लेना लिखा ही नहीं है। दोनों खिलाड़ियों ने ब्रेक के दौरान अपने कोच से बात की, अपनी रणनीति बदली और तय किया कि अब डिफेंसिव होने का कोई फायदा नहीं है, अब तो आर-पार का हमला बोलना होगा।

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दूसरे गेम में सात्विक के स्मैश और चिराग का माइंड गेम

दूसरा गेम शुरू होते ही भारतीय जोड़ी का एक अलग ही रूप देखने को मिला। सात्विक ने कोर्ट के पिछले हिस्से से ऐसे रॉकेट जैसे स्मैश दागे कि विरोधी खिलाड़ी बस देखते रह गए। वहीं चिराग ने नेट के पास खड़े होकर अपनी चपलता से ऐसा जाल बुना कि इंडोनेशियाई जोड़ी उसमें फंसती चली गई। पावर और प्लानिंग का यह मेल रंग लाया और भारत ने शुरुआत में ही अच्छी-खासी लीड बना ली।हालांकि, इंडोनेशियाई खिलाड़ियों ने भी वापसी के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाया। वे बार-बार अंकों के फासले को कम करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन इस बार भारतीय लड़कों ने अपना आपा नहीं खोया। पूरे संयम के साथ खेलते हुए सात्विक और चिराग ने दूसरा गेम 21-17 से जीतकर मैच को 1-1 की बराबरी पर ला खड़ा किया। अब फैसला आखिरी और निर्णायक गेम में होना था।

आखिरी गेम का रोमांच: जब ‘चैंपियंस’ की तरह खेले भारतीय शेर

तीसरा गेम यानी करो या मरो का मुकाबला। दोनों टीमों को पता था कि यहां की गई एक छोटी सी भूल भी सीधे सिल्वर मेडल पर लाकर पटक देगी। शुरुआती 5-6 अंकों तक खेल बिल्कुल बराबरी पर चल रहा था, दिल की धड़कनें बढ़ी हुई थीं। लेकिन इसके बाद सात्विक-चिराग ने मैच को अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने खेल की रफ्तार को अचानक इतना बढ़ा दिया कि इंडोनेशियाई जोड़ी हक्की-बक्की रह गई।सात्विक के आक्रामक स्मैश और चिराग की गजब की प्लेसिंग ने कमाल कर दिया। 

विरोधी खिलाड़ी अब शटल को सिर्फ बचाने की कोशिश कर रहे थे और भारतीय जोड़ी लगातार अंक बटोर रही थी। मैच पॉइंट मिलते ही सात्विक कोर्ट पर गिर पड़े और चिराग ने खुशी के मारे शर्ट उतारकर हवा में लहरा दी। 21-16 से यह गेम जीतकर उन्होंने इतिहास रच दिया। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाया और वहां मौजूद दर्शकों का शुक्रिया अदा किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि चोटों से जूझने के बाद कोर्ट पर वापसी का एक करारा जवाब थी।

सेमीफाइनल में ही दिखा दिया था दम

देखा जाए तो इस जोड़ी ने शनिवार को सेमीफाइनल में ही अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। उन्होंने वर्ल्ड नंबर वन और दक्षिण कोरिया की टॉप सीड जोड़ी किम वोन-हो और सियो सेउंग-जे को सीधे गेमों में हराकर फाइनल का टिकट कटाया था। उस बड़ी जीत ने सात्विक और चिराग के हौसले इतने बुलंद कर दिए थे कि फाइनल का दबाव भी उन पर हावी नहीं हो सका।

भारतीय बैडमिंटन को मिली नई संजीवनी

सिंगापुर ओपन कोई छोटा-मोटा टूर्नामेंट नहीं है, इसे बैडमिंटन की दुनिया के सबसे कठिन दौरों में गिना जाता है। सात्विक और चिराग पिछले कुछ समय से फिटनेस और इंजरी की समस्याओं से परेशान चल रहे थे, इसलिए यह खिताब उनके लिए किसी टॉनिक से कम नहीं है। इस जीत से उन्होंने साबित कर दिया कि वे आज भी दुनिया के बेस्ट डबल्स प्लेयर्स में से एक हैं। इस कामयाबी से भारतीय बैडमिंटन को एक नई ऊर्जा मिलेगी और आने वाले ओलंपिक खेलों के लिए खिलाड़ियों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर होगा। पूरे देश को सात्विक और चिराग की इस जांबाज परफॉर्मेंस पर नाज है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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