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चुनावों से ठीक पहले सुलग उठा पाक अधिकृत कश्मीर पुलिस-प्रदर्शनकारी भिड़े; 30 की मौत पूरा इलाका छावनी में तब्दील

चुनावों से ठीक पहले सुलग उठा पाक अधिकृत कश्मीर पुलिस-प्रदर्शनकारी भिड़े; 30 की मौत पूरा इलाका छावनी में तब्दील
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 10, 2026 6:25 अपराह्न
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मुजफ्फराबाद। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में राजनीतिक असंतोष और प्रशासनिक कार्रवाई के बीच हालात हिंसक हो गए हैं। क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई झड़पों में 30 से अधिक लोगों की मौत हो गई, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल बताए जा रहे हैं। आगामी विधानसभा चुनावों से पहले भड़की इस हिंसा ने पूरे क्षेत्र को तनाव के माहौल में ला खड़ा किया है।प्राप्त जानकारी के अनुसार, हाल ही में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर प्रशासन द्वारा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए थे। यह संगठन लंबे समय से क्षेत्र में राजनीतिक अधिकारों, आर्थिक समस्याओं और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ आवाज उठाता रहा है। प्रतिबंध के बाद संगठन के समर्थक बड़ी संख्या में सड़कों पर उतर आए और कई स्थानों पर प्रदर्शन शुरू हो गए।

रावलाकोट में सबसे ज्यादा तनाव

हिंसा का सबसे गंभीर असर रावलाकोट शहर में देखने को मिला। बताया जा रहा है कि पुलिस कार्रवाई के दौरान एक स्थानीय व्यापारी की मौत हो गई थी। इसके बाद लोगों का गुस्सा भड़क उठा और बड़ी संख्या में नागरिक अस्पताल के बाहर तथा शहर के प्रमुख मार्गों पर जमा हो गए। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन उग्र हो गया और प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच टकराव शुरू हो गया।प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कई स्थानों पर स्थिति इतनी बिगड़ गई कि पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा। झड़पों के दौरान गोलीबारी, पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं भी सामने आईं। प्रशासन का कहना है कि कुछ उपद्रवी तत्वों ने सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया और सुरक्षा बलों पर हमला किया, जिसके बाद जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी।

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मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की संख्या 30 से अधिक पहुंच चुकी है, जबकि 200 से ज्यादा लोग घायल हैं। घायलों में प्रदर्शनकारी, आम नागरिक और सुरक्षा बलों के जवान भी शामिल बताए जा रहे हैं। कई गंभीर रूप से घायल लोगों का विभिन्न अस्पतालों में उपचार जारी है, जिसके कारण मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

चुनावी व्यवस्था को लेकर बढ़ा विवाद

विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा संकट की जड़ आगामी विधानसभा चुनावों से जुड़ा विवाद है। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर की 45 सदस्यीय विधानसभा में 12 सीटें पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। आंदोलनकारी संगठनों का आरोप है कि इस व्यवस्था के कारण स्थानीय नागरिकों की राजनीतिक भागीदारी प्रभावित होती है और क्षेत्र की वास्तविक आबादी को पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं मिल पाता।हाल ही में अदालत द्वारा इन आरक्षित सीटों को संवैधानिक संरक्षण मिलने के बाद विरोध और तेज हो गया। प्रदर्शनकारी इस फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों के विरुद्ध बता रहे हैं, जबकि प्रशासन इसे संवैधानिक व्यवस्था का हिस्सा बता रहा है।

आर्थिक समस्याएं भी बनीं नाराजगी की वजह

राजनीतिक मुद्दों के अलावा क्षेत्र में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और विकास कार्यों की धीमी गति को लेकर भी लोगों में असंतोष है। पिछले कुछ वर्षों से विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठन इन मुद्दों को उठाते रहे हैं। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग तो किया जा रहा है, लेकिन स्थानीय जनता को उसका अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।विशेषज्ञों का मानना है कि लंबे समय से जमा हो रहा यही असंतोष अब बड़े आंदोलन के रूप में सामने आया है। प्रशासनिक कार्रवाई और संगठन पर प्रतिबंध ने इस असंतोष को और भड़का दिया।

इंटरनेट सेवाएं बंद, सुरक्षा बढ़ाई गई

हिंसा के बाद प्रशासन ने कई संवेदनशील क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी हैं। साथ ही अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। कई नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया है तथा आंदोलन से जुड़े कुछ प्रमुख लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए प्रमुख शहरों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कई इलाकों में बाजार बंद रहे और जनजीवन प्रभावित हुआ। सार्वजनिक परिवहन सेवाओं पर भी असर पड़ा है।

मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता

घटनाओं के बाद विभिन्न मानवाधिकार संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि किसी भी स्थिति में नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। संगठनों ने प्रशासन और प्रदर्शनकारियों दोनों से संयम बरतने की अपील की है तथा विवाद का समाधान संवाद के माध्यम से निकालने पर जोर दिया है।

आगे क्या?

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि सरकार और आंदोलनकारी समूहों के बीच जल्द बातचीत नहीं हुई तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। चुनाव नजदीक होने के कारण क्षेत्र में राजनीतिक गतिविधियां भी तेज हैं और ऐसे में बढ़ता तनाव प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।फिलहाल पूरे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। सुरक्षा बल सतर्क हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले दिनों में सरकार की अगली रणनीति और आंदोलनकारियों की प्रतिक्रिया यह तय करेगी कि क्षेत्र में शांति बहाल होती है या राजनीतिक संकट और गहराता है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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