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मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द सियासी भूचाल और कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी विरोध

मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द सियासी भूचाल और कांग्रेस का राष्ट्रव्यापी विरोध
नवजोत कौर सिद्धू
On: जून 10, 2026 1:31 अपराह्न
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मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में उस समय एक बड़ा भूचाल आ गया जब राज्यसभा चुनाव के लिए कांग्रेस की मुख्य उम्मीदवार और राहुल गांधी की करीबी मानी जाने वाली वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रिटर्निंग ऑफिसर (RO) द्वारा रद्द कर दिया गया। मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों पर होने वाले इस चुनाव में कांग्रेस की ओर से मीनाक्षी नटराजन एकमात्र मजबूत चेहरा थीं। उनके नामांकन के निरस्त होते ही सूबे की सियासत गरमा गई है और कांग्रेस ने इसे लोकतंत्र की हत्या करार देते हुए मोर्चा खोल दिया है।

​नामांकन रद्द होने का मुख्य कारण- छुपाया गया कानूनी मामला?

​मंगलवार को स्क्रूटनी (नामांकन पत्रों की जांच) के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को खारिज करने का आदेश जारी किया। इस निलंबन के पीछे मुख्य कारण चुनावी हलफनामे (Affidavit) में कथित रूप से “जानकारी छुपाना” बताया गया है।

  • भाजपा की आपत्ति- तीसरी राज्यसभा सीट से भाजपा के उम्मीदवार महेश केवट और भाजपा प्रदेश महासचिव राहुल कोठारी ने नटराजन के नामांकन पर लिखित आपत्ति दर्ज कराई थी।
  • तेलंगाना कोर्ट का मामला- भाजपा प्रत्याशी के वकील संकेत गुप्ता के अनुसार मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ तेलंगाना की एक अदालत में एक आपराधिक मामला लंबित है। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के कड़े दिशा-निर्देशों के मुताबिक किसी भी उम्मीदवार को अपने हलफनामे में सभी लंबित मामलों का विवरण देना अनिवार्य होता है।
  • अधूरा हलफनामा- भाजपा का आरोप था कि नटराजन ने जानबूझकर इस मामले को छुपाया और इस संबंध में कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने के बावजूद हलफनामे में इसका जिक्र नहीं किया। निर्वाचन अधिकारी ने इस दलील और तकनीकी खामी को सही मानते हुए कांग्रेस उम्मीदवार का पर्चा खारिज कर दिया।

​कांग्रेस का पलटवार और तीखे आरोप- “यह सीट की चोरी है”

​नामांकन रद्द होते ही कांग्रेस आलाकमान से लेकर राज्य इकाई तक में भारी आक्रोश देखा गया। कांग्रेस नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर और सोशल मीडिया के जरिए भाजपा सरकार पर चौतरफा हमले किए।

  • फर्जी आरोपों का दावा- मध्य प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी ने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई प्राथमिकी (FIR) या चार्जशीट दर्ज नहीं है। उन्हें केवल अदालत से एक ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) मिला था जिसे चुनावी हलफनामे में दर्शाना कानूनी रूप से अनिवार्य नहीं है।
  • विधायकों को डराने में नाकाम रहने पर साजिश- मीनाक्षी नटराजन ने खुद इस घटनाक्रम पर बोलते हुए कहा “जब भाजपा ने देखा कि कांग्रेस के सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं और उन्हें तोड़ा या खरीदा नहीं जा सकता तब उन्होंने कानूनी नोटिस की आड़ में यह कायराना साजिश रची।”
  • हॉर्स ट्रेडिंग और चार्टर्ड प्लेन विवाद- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उनके विधायकों को एकजुट रखने के लिए जब कर्नाटक भेजने की तैयारी थी तब भोपाल एयरपोर्ट पर उनके चार्टर्ड विमान को जानबूझकर उड़ने की अनुमति नहीं दी गई। कांग्रेस के अनुसार यह पूरी तरह से विपक्ष की आवाज को दबाने और “राज्यसभा सीट चोरी करने” का एक सुनियोजित खेल है।

​दिल्ली से भोपाल तक भारी विरोध-प्रदर्शन

​इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस ने न केवल कानूनी बल्कि सड़क की लड़ाई भी शुरू कर दी है।

  • चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर धरना- दिल्ली में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल और भूपेश बघेल बिना पूर्व सूचना के रात को ही केंद्रीय निर्वाचन आयोग (ECI) के दफ्तर पहुंच गए। वरिष्ठ अधिकारियों के न मिलने पर कांग्रेस नेताओं ने दफ्तर के बाहर धरना दिया और निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा। चुनाव आयोग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को बैठक का समय दिया है।
  • कोर्ट जाने की तैयारी- कांग्रेस नेता सचिन पायलट ने कहा कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास में ऐसा कभी नहीं हुआ कि बिना ठोस आधार और बिना समय दिए किसी प्रमुख उम्मीदवार का पर्चा खारिज किया जाए। पार्टी इस फैसले के खिलाफ तुरंत अदालत (High Court/Supreme Court) का दरवाजा खटखटाने जा रही है।

​भाजपा का रुख और सियासी नंबर गेम

​मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि कांग्रेस को अब आत्ममंथन करना चाहिए कि वे आपराधिक रिकॉर्ड छुपाने वाले उम्मीदवारों को मैदान में क्यों उतारते हैं। वहीं वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इसे ‘न्याय और संविधान की जीत’ बताया।

समीकरण- 230 सदस्यीय मध्य प्रदेश विधानसभा में वर्तमान प्रभावी संख्या के आधार पर भाजपा के पास 164 और कांग्रेस के पास प्रभावी रूप से लगभग 61-62 विधायक हैं। एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता थी जिससे कांग्रेस की एक सीट पक्की थी। लेकिन भाजपा ने तीसरी सीट पर महेश केवट को उतारकर मुकाबला दिलचस्प बना दिया था। अब नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा उम्मीदवार की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ नजर आ रहा है।

​मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होना मध्य प्रदेश कांग्रेस के लिए एक बहुत बड़ा राजनीतिक झटका है। जहां तकनीकी और कानूनी आधार पर भाजपा इसे सही ठहरा रही है वहीं कांग्रेस इसे सत्ता का दुरुपयोग और लोकतंत्र का हनन बताकर अदालत और जनता के बीच जाने की तैयारी कर चुकी है। इस घटनाक्रम ने राज्यसभा चुनाव को कानूनी जंग में तब्दील कर दिया है।

Swati Pandey

A versatile writer mainly works on trending news, daily updates from politics, business, crime, current affairs and entertainment.

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