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मध्य प्रदेश में SIR की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी – 42.74 लाख नाम हटे

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नवजोत कौर सिद्धू
On: दिसम्बर 23, 2025 7:29 अपराह्न
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मध्यप्रदेश में निर्वाचन आयोग द्वारा हाल ही में Special Intensive Revision (SIR) यानी विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के बाद ड्राफ्ट वोटर लिस्ट प्रारूप मतदाता सूची जारी की गई है। इस प्रक्रिया में प्रदेश के चुनावी इतिहास की सबसे बड़ी सफाई देखने को मिली है जिसमें लगभग 42.74 लाख नाम हटाए गए हैं।

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​मध्यप्रदेश SIR ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2025 

​मध्यप्रदेश में निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण SIR अभियान चलाया। 23 दिसंबर 2025 को जारी हुई ड्राफ्ट वोटर लिस्ट के अनुसार राज्य में मतदाताओं की संख्या में भारी फेरबदल हुआ है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य वोटर लिस्ट से मृत स्थानांतरित Shifted और डुप्लीकेट नामों को हटाकर इसे पूरी तरह शुद्ध बनाना था।

​आंकड़ों का सारांश – कितने नाम हटे

​प्रारंभिक आंकड़ों और निर्वाचन सदन से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश में कुल 42.74 लाख मतदाताओं के नाम सूची से विलोपित Delete किए गए हैं। यह कुल मतदाता संख्या का लगभग 7.2% से 7.5% हिस्सा है।

​विलोपन के मुख्य कारण

  • ​मृतक मतदाता लगभग 8.4 लाख।
  • ​स्थानांतरित (Shifted) लगभग 22.5 लाख सबसे बड़ा कारण।
  • ​अनुपस्थित (Absent) लगभग 8.4 लाख।
  • ​दोहरी प्रविष्टियां (Duplicate/Multiple) लगभग 2.5 लाख।
  • ​अन्य लगभग 94 हजार।

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​पुरुष और महिला मतदाताओं का विवरण किसके कितने नाम कटे?

​आमतौर पर चुनावी आंकड़ों में पुरुषों की संख्या अधिक रहती है लेकिन इस बार के शुद्धिकरण अभियान में महिलाओं के नाम कटने का अनुपात भी काफी चर्चा में है।

पुरुष मतदाता 22.85 लाख पलायन और काम के सिलसिले में शहर बदलने के कारण सर्वाधिक नाम हटे। महिला मतदाता 19.89 लाख विवाह के उपरांत ससुराल जाने और मृत्यु की जानकारी अपडेट न होने के कारण नाम हटे।

पुरुषों के नाम कटने का मुख्य कारण

​पुरुषों के मामले में सबसे बड़ा कारण रोजगार हेतु पलायन रहा है। जो लोग एक जिले से दूसरे जिले या दूसरे राज्य में बस गए और उनका नाम पुराने पते पर ही दर्ज था उन्हें शिफ्टेड श्रेणी में डालकर हटाया गया है।

​महिलाओं के नाम कटने का मुख्य कारण

​महिलाओं के मामले में विवाह एक प्रमुख कारक है। मध्यप्रदेश के ग्रामीण इलाकों में शादी के बाद महिलाएं दूसरे गांव या शहर चली जाती हैं लेकिन उनका नाम मायके की वोटर लिस्ट में बना रहता था। SIR के दौरान घर-घर जाकर किए गए सत्यापन में ऐसी महिलाओं के नाम विलोपित किए गए हैं।

बड़े शहरों का हाल – इंदौर और भोपाल में भारी गिरावट

​प्रदेश के चार महानगरों इंदौर, भोपाल ग्वालियर और जबलपुर में सबसे ज्यादा नाम हटाए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में लोगों के घर बदलने की दर अधिक होने के कारण यहां आंकड़ों में बड़ा उछाल देखा गया।

  • ​इंदौर –  यहां सबसे अधिक लगभग 4.4 लाख नाम हटाए गए। यह कुल मतदाताओं का लगभग 15% है।
  • ​भोपाल- राजधानी भोपाल में करीब 4.3 लाख नाम कटे हैं, जो कुल लिस्ट का लगभग 20.2% है।
  • ​ग्वालियर – यहां लगभग 2.5 लाख नाम विलोपित हुए।
  • ​जबलपुर – यहां करीब 2.4 लाख मतदाताओं के नाम सूची से बाहर हुए।

SIR Special Intensive Revision क्या है

​यह निर्वाचन आयोग का एक विशेष अभियान है। सामान्यत: हर साल संक्षिप्त पुनरीक्षण होता है, लेकिन विशेष गहन पुनरीक्षण SIR में बूथ लेवल ऑफिसर BLO हर घर जाकर मतदाताओं का भौतिक सत्यापन करते हैं।

​इस प्रक्रिया के चरण –

  • ​घर-घर सर्वे – BLO ने घर जाकर पूछा कि क्या मतदाता अभी भी वहां रहता है।
  • ​दस्तावेज सत्यापन –  शिफ्ट हुए या मृत लोगों के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र या पंचनामा तैयार किया गया।
  • ​डिजिटलीकरण – प्राप्त डेटा को ऑनलाइन पोर्टल पर अपडेट किया गया।
  • ​ड्राफ्ट प्रकाशन – 23 दिसंबर को यह सूची सार्वजनिक की गई ताकि लोग आपत्ति दर्ज कर सकें।

​अब आगे क्या मतदाताओं के लिए जरूरी जानकारी

​निर्वाह आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह अभी प्रारूप Draft) सूची है अंतिम सूची नहीं। जिन लोगों के नाम गलती से कट गए हैं उनके पास अभी भी सुधार का मौका है।

  • ​दावे और आपत्तियां  – मतदाता 18 जनवरी 2026 तक अपने दावे या आपत्तियां दर्ज करा सकते हैं।
  • ​कैसे चेक करें नाम-  मतदाता voters.eci.gov.in पोर्टल पर जाकर या Voter Helpline App के माध्यम से अपना नाम चेक कर सकते हैं।
  • ​फॉर्म 6 और 7 – अगर नाम कट गया है और आप पात्र हैं तो फॉर्म 6 भरकर दोबारा नाम जुड़वा सकते हैं। अगर किसी गलत नाम पर आपत्ति है तो फॉर्म 7 का उपयोग करें।
  • ​अंतिम प्रकाशन – सभी दावों के निराकरण के बाद फरवरी 2026 में अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी।
  • राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव – ​इतनी बड़ी संख्या में नाम हटने से आने वाले स्थानीय चुनावों और भविष्य के विधानसभा चुनावों के समीकरण बदल सकते हैं।
  • ​वोटिंग प्रतिशत – सूची शुद्ध होने से कागजों पर वोटिंग प्रतिशत में सुधार दिखेगा क्योंकि अब केवल वही लोग लिस्ट में हैं जो वास्तव में वहां मौजूद हैं।
  • ​फर्जी मतदान पर रोक – डुप्लीकेट नामों के हटने से बोगस वोटिंग की संभावना लगभग खत्म हो जाएगी।
  • ​युवा मतदाता – इस अभियान के साथ ही 18 साल पूरे कर चुके लाखों नए युवाओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया भी तेज की गई है।

Pradeep Pandey

A versatile writer mainly works on politics, business, crime, current affairs and entertainment

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