दक्षिण एशिया की भू-राजनीति में भारत और श्रीलंका के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं बल्कि सभ्यतागत और सांस्कृतिक हैं। हाल के वर्षों में श्रीलंका ने अपने इतिहास के सबसे कठिन आर्थिक और राजनीतिक संकट का सामना किया। इस संकट की घड़ी में भारत ने अपनी नेबरहुड फर्स्ट (Neighborhood First) और सागर नीति (SAGAR – Security and Growth for All in the Region) के तहत हाथ आगे बढ़ाया।

इसी कड़ी में ऑपरेशन सागर बंधु के तहत घोषित $450 मिलियन लगभग 3,700 करोड़ रुपये का पुनर्निर्माण पैकेज भारत की प्रतिबद्धता का एक जीवंत प्रमाण है।
ऑपरेशन सागर बंधु क्या है
ऑपरेशन सागर बंधु भारत द्वारा शुरू की गई एक व्यापक सहायता पहल है जिसका उद्देश्य श्रीलंका को उसके आर्थिक संकट के बाद पुनर्निर्माण और स्थिरता की राह पर वापस लाना है।
उद्देश्य
इसका प्राथमिक लक्ष्य श्रीलंका के बुनियादी ढांचे का विकास ऊर्जा सुरक्षा और डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। रणनीतिक महत्व यह केवल वित्तीय मदद नहीं है बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने का एक प्रयास है। भारत का मानना है कि एक स्थिर और समृद्ध श्रीलंका पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए आवश्यक है।
$450 मिलियन पैकेज का विस्तृत विवरण
भारत द्वारा घोषित इस $450 मिलियन के पैकेज को दो मुख्य भागों में विभाजित किया गया है|
- बुनियादी ढांचा और पुनर्निर्माण $400 मिलियन
यह राशि श्रीलंका के उन क्षेत्रों में निवेश की जाएगी जो आर्थिक मंदी के कारण ठप पड़ गए थे।
- सड़क और परिवहन – ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों को जोड़ने के लिए सड़कों का आधुनिकीकरण।
- रेलवे विकास- श्रीलंका के रेल नेटवर्क को उन्नत बनाना ताकि माल ढुलाई और यात्री परिवहन सुगम हो सके।
- बंदरगाह विकास – कोलंबो और त्रिंकोमाली जैसे रणनीतिक बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाना।
- सौर ऊर्जा और नवीकरणीय ऊर्जा $50 मिलियन
भारत ने विशेष रूप से $50 मिलियन की राशि श्रीलंका में सौर ऊर्जा परियोजनाओं के लिए आवंटित की है।
- ऊर्जा आत्मनिर्भरता – श्रीलंका वर्तमान में ईंधन आयात पर भारी निर्भर है। सौर ऊर्जा परियोजनाओं से उसे अपनी बिजली जरूरतों के लिए आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी।
- पर्यावरण अनुकूल विकास – यह वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के प्रति दोनों देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
श्रीलंका के लिए इस पैकेज का महत्व
श्रीलंका के लिए यह पैकेज एक लाइफलाइन की तरह है। इसके कई दूरगामी लाभ हैं
- विदेशी मुद्रा भंडार में स्थिरता – भारत की क्रेडिट लाइन से श्रीलंका को अपनी आवश्यक वस्तुओं के आयात के लिए विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलती है।
- रोजगार सृजन- पुनर्निर्माण परियोजनाओं के शुरू होने से स्थानीय स्तर पर हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा जिससे घरेलू अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी।
- विश्वास की बहाली – अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के बीच यह संदेश जाता है कि श्रीलंका अब निवेश के लिए सुरक्षित और स्थिर हो रहा है।
भारत की SAGAR दृष्टि और क्षेत्रीय सुरक्षा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में SAGAR Security and Growth for All in the Region का विजन दिया था। ऑपरेशन सागर बंधु इसी का एक विस्तार है।
चीन की ऋण जाल कूटनीति का उत्तर: श्रीलंका जैसे देशों पर चीन का भारी कर्ज है। भारत की सहायता बिना किसी शर्त के और ‘विकास-केंद्रित’ है, जो इसे चीन चुनौतियाँ और आगे की राह इतनी बड़ी सहायता के बावजूद, धरातल पर कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं:
- प्रोजेक्ट कार्यान्वयन: नौकरशाही की देरी परियोजनाओं की गति धीमी कर सकती है।
- भू-राजनीतिक दबाव: श्रीलंका को भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखना होता है, जो कभी-कभी भारतीय परियोजनाओं की गति को प्रभावित करता है।
- भारत को ‘पीपल-टू-पीपल’ (जनता से जनता) संपर्क पर अधिक ध्यान देना चाहिए। विकास परियोजनाओं के साथ-साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से भारत के प्रति श्रीलंका की जनता का विश्वास और गहरा होगा।न के डेट-ट्रैप Debt Trap से अलग बनाती है।
- समुद्री सुरक्षा – हिंद महासागर में भारत अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है ताकि समुद्री डकैती तस्करी और अन्य सुरक्षा चुनौतियों का मुकाबला किया जा सके।
द्विपक्षीय सहयोग के अन्य प्रमुख क्षेत्र
$450 मिलियन के इस पैकेज के अलावा भारत और श्रीलंका कई अन्य महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर साथ काम कर रहे हैं|
परियोजना विवरण
डिजिटल पहचान परियोजना भारत के आधार की तर्ज पर श्रीलंका में यूनिटरी डिजिटल आइडेंटिटी फ्रेमवर्क। ग्रिड कनेक्टिविटी भारत और श्रीलंका के बिजली ग्रिडों को जोड़ना ताकि ऊर्जा का आदान-प्रदान हो सके। मत्स्य पालन विवाद पाक जलडमरूमध्य में मछुआरों के मुद्दों को मानवीय दृष्टिकोण से सुलझाना। पर्यटन रामायण सर्किट और बौद्ध सर्किट के माध्यम से पर्यटन को बढ़ावा देना।
चुनौतियाँ और आगे की राह
इतनी बड़ी सहायता के बावजूद धरातल पर कुछ चुनौतियाँ मौजूद हैं-
- प्रोजेक्ट कार्यान्वयन- नौकरशाही की देरी परियोजनाओं की गति धीमी कर सकती है।
- भू-राजनीतिक दबाव – श्रीलंका को भारत और चीन के बीच संतुलन बनाए रखना होता है, जो कभी-कभी भारतीय परियोजनाओं की गति को प्रभावित करता है।
भारत को पीपल-टू-पीपल जनता से जनता संपर्क पर अधिक ध्यान देना चाहिए। विकास परियोजनाओं के साथ-साथ शिक्षा स्वास्थ्य और संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने से भारत के प्रति श्रीलंका की जनता का विश्वास और गहरा होगा।






